ज्ञानी की तलाश – स्टोरी इन हिंदी

राजा जनक और अष्टावक्र – Story in Hindi

स्टोरी इन हिंदी

राजा जनक बहुत ज्ञानी थे परन्तु उनका ज्ञान किसी गुरू से प्राप्त नहीं था। उनकी किसी को गुरु बनाकर ज्ञान प्राप्त करने की तीव्र इच्छा हुई। कई दिनों तक विचार करने के बाद एक उपाय सूझा।

उनका राज-काज प्रभावित न हो इसलिए सच्चे ज्ञानी ही उनके पास आ सकें इसलिए उन्होंने पूरे नगर में घोषणा करवा दी कि जो कोई मुझे अभी तक प्राप्त न हुआ ‘ज्ञान’ का उपदेश देगा, उसे इच्छानुसार धन प्रदान किया जाएगा परन्तु यदि वह ज्ञान का उपदेश देने में समर्थ न हो पायेगा उसे जेल में बंद कर दिया जाएगा।

राजा जनक की घोषणा को सुन-सुनकर बहुत सारे तथाकथित ज्ञानी सभा में पहुंचे, परंतु जनक को ‘समुचित ज्ञान’ का उपदेश न कर सके और उनको बंदगृह में जाना पड़ा।

अष्टावक्र के पिता भी अपने ज्ञान के अहंकार और धन के लोभ में राजा जनक की सभा में पहुंच गये। वे राजा-अनुसार ज्ञान प्रदान न कर सके और उन्हें जेल में जाना पड़ा।

समाचार पाते ही पिता को जेल से छुड़ाने के लिए अष्टावक्र जनक के राजदरबार पहुंच गये। अष्टावक्र के अंग टेढे-मेढ़े थे जिससे की वह बहुत कुरूप दिखते थे।

उस समय राजा जनक स्वयं भी सभा में विराजमान थे। अष्टावक्र के शरीर को देखकर राजदरबारियों और सभा में मौजूद ज्ञानियों को हंसी आ गयी। सबकी हंसी से सभा में ठहाके की आवाज गूंज गयी।

ऋषिकुमार अष्टावक्र इस प्रकार के अनुचित व्यवहार से विचलित नहीं हुए। उन्होंने दरबारियों की हंसी का उत्तर और अधिक ठहाके की हंसी से दिया।

अष्टावक्र के इस प्रकार से हँसते हुए देखकर राजा जनक को बहुत आश्चर्य हुआ।

राजा ने ऋषिकुमार से पूछा-‘महाराज! आप क्यों हँस रहे हैं?’

अष्टावक्र ने प्रतिउत्तर में पूछा-‘आप लोग मुझे देखते ही क्यों हँसे थे?’

राजा जनक ने कहा-‘आपके टेढ़े-मेढ़े शरीर को देखकर हमलोगों को अनायास ही हँसी आ गयी।’

ऋषिकुमार ने अपनी हँसी का कारण बताया-‘मुझे तो आप लोगों के सुन्दर शरीर के भीतर कितनी गंदगी भरी पड़ी है, उसे देखकर इतनी जोर की हँसी आयी। भला, मिथिला-नरेश, जिनकी सभा में ज्ञान की चर्चा होती है, ज्ञान प्राप्त करने के लिए जिन नरेश ने डंका पिटवाया है, उनके दरबारी तथा स्वयं वे भी शरीर के रूप-रंग और बनावट के प्रेमी हैं। उनके यहाँ ‘ज्ञान’ की नहीं, नश्वर शरीर की महत्ता है। जहां ज्ञान की चर्चा के लिए सभा जुटी हो, वहां ईश्वर द्वारा प्रदान शरीर की बनावट देखकर ‘हँसना’ मानव की ‘मानवता’ नहीं, ‘दुर्बलता’ कही जायेगी।’

राजा जनक के यहाँ ज्ञान नहीं, नश्वर शरीर के रूप-रंग, बनावट की महत्ता है-यह वाक्य जनक को बैचेन कर गया। सभी दरबारियों ने लज्जा के कारण शिश झुका दिया।

पूरी लिस्ट: पौराणिक कहानियाँ – Mythological stories in Hindi


आपको यह ज्ञानी की तलाश – स्टोरी इन हिंदी  कैसी लगी, कृप्या कमेंट बाक्स पर साझा करें।

Random Posts

  • फ़्लोरेन्स नाइटिंगेल फ़्लोरेन्स नाइटिंगेल | सेवा की प्रतिमूर्ति

    फ़्लोरेन्स नाइटिंगेल | सेवा की प्रतिमूर्ति फ़्लोरेन्स नाइटिंगेल (Florence Nightingale) का जन्म 12 मई सन् 1820 ई. में इटली के शहर फ्लाॅरेन्स में एक ब्रिटिश परिवार में हुआ था। वह […]

  • anna mani अन्ना मणि | Mahan Mahila Scientist in Hindi

    अन्ना मणि | Mahan Mahila Scientist in Hindi महान भारतीय वैज्ञानिक अन्ना मणि (ANNA MANI) की सफलता की कहानी पुरुषों और महिलाओं (ladies) को बराबर प्रेरित करती है। उनके समय […]

  • washerman धोबी की ईमानदारी (Washerman’s Honesty)

    धोबी की ईमानदारी (Washerman’s Honesty) जीवन में कुछ ऐसी घटनायें अक्सर घटित होती हैं जो हमारे दिल कि गहराईयों में पेठ कर जाती हैं। यह छोटी-छोटी घटनायें हमें अनमोल पाठ […]

  • rath pulia सबसे श्रेष्ठ मनुष्य कौन!

    सबसे श्रेष्ठ मनुष्य कौन! बौद्ध जातक में एक कथा का वर्णन है जिसमें एक बार काशी के राजमार्ग पर दो राजाओं का रथ आमने-सामने आ गये। बीच में एक पुलिया […]

5 thoughts on “ज्ञानी की तलाश – स्टोरी इन हिंदी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*
*