सफलता में सबसे बड़ी बाधा – अश्लील फिल्म और साहित्य

अश्लील फिल्म और साहित्य से जितना दूर रहें उतना ही बेहतर है।

अश्लील फिल्म 1

प्रत्येक युवा आज यह कहते सुन पड़ता है कि अश्लील फिल्म और साहित्य ( xxx films and literature ) का मन पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। मुझे इसमें संदेह करने का कोई कारण नज़र नहीं आता, पर आश्चर्य तो तब होता है, जब वह ही युवा विवेकहीन होकर बड़े शौक से इस प्रकार के साहित्य को पढ़ते और वट्सअप पर मित्रों को सेयर करते हुए गर्व की अनुभूति करता हैं।

आप राष्ट्र के भविष्य हैं

दोस्तों युवावर्ग ही राष्ट्र के भविष्य की आधारशिला है। उसमें विकृति आ जाने के कारण राष्ट्र विकृत एवं निकम्मा बन जाता है। आज देश के युवावर्ग का एक बड़ा भाग का रूझान गंदे साहित्य चाहे वह पत्र-पत्रिका हो अथवा इंटरनेट में फैली हुई अश्लील फिल्में और लेख, की तरफ हो गया है जिससे कि वे चारित्रिक और सामाजिक-व्यवसायिक असफलता तरफ बढ़ते जा रहे हैं।

यह युवावस्थ बड़ी भयावह है, उसको आप संभाल सकते हैं। आपको इस प्रकार की अश्लीलता से दूर रहना है। भविष्य आपको बनाना है, इसलिए इस प्रकार की बात को आप बेहतर समझ सकते हैं। देखिए आप ही तो राष्ट्र की निधि हैं। आप भविष्य में सफलता की नई ऊँचाईयां छूने में सक्षम होंगे। आपमें से बहुत से मित्र अत्यंत सफल विद्वान, खिलाड़ी, व्यवसायी अथवा समाजसेवी बनने वाले हैं।

आपके सामने कई आदर्श हैं उनसे प्रेरणा लें

आप सबके सामने एक आदर्श होना चाहिए और उसके अनुसार अपने को बनाने का प्रयत्न करें। आपसे मुझे यही कहना है कि जो आपके सपने हैं, उसके लिए जियें, उससे अपने को बनायें। सुकरात, गांधी और विवेकानंद ने अपने शिष्यों को यही बताया था कि अपने को पहचानो। यदि हम अपने को पहचानें, अपनी कमियों को अंदर घुसकर देखें तो हम अपना ही शुद्धिकरण करते हैं। किंतु हम प्रायः अपनी कमियों को जानने का यत्न ही नहीं करते, बुद्धि की आंखों पर पट्टी बंधी रहती है, जिसे हम देख ही नहीं पाते। सच तो यह है कि हम अपने इस नग्नरूप को देखकर घबराते हैं नही तो सबसे छुपाते-छुपते यह अश्लील सामग्री देखते-पढ़ते ही क्यों। सफलता इसमें है कि हम अपनी दुर्बलताओं पर अधिकार करें। यह समय आपके लिए अपने को बनाने का है।

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अश्लील फिल्म और साहित्य को देखने-पढ़ने से व्यक्तित्व पर होने वाला प्रभाव

अश्लील साहित्य दिशा से भ्रमित करती है

जिस दिमाग में रचनात्मक विचार आते हैं उसमें अश्लील hindi x story और सामग्री  ले लेती है जो कि व्यक्ति को दिशा विहीन कर देती है। वह धीरे-धीरे अपने लक्ष्य के प्रति उदासीन होता जाता है। युवावस्था उत्साह की अवस्था है, पर उसे नियन्त्रण में रक्खें। आपको शक्ति का संचार करना है और उसे इंजन की तरह चलाना और सही दिशा में ले जाना है।

इससे मानसिक अवसाद पैदा होता है।

अपने व्यक्तित्व का विकास आपका मुख्य कर्तव्य है। विकास बौद्धिक और चारित्रिक दोनो प्रकार का होना चाहिए। बुद्धि कितनी भी तीव्र क्यों न हो, वह चरित्र का विकास नहीं करती जब तक कि हममें चारित्रिक बल न आ जाए।

एकाग्रचित्ता में कमी आती है।

यदि आपका दिमाग ठिकाने नही तो आपका कोई भी काम ठिकाने का नहीं हो सकता। जीवन में सच्ची सफलता प्रायः अनुशासन की दृढ़ भावना, आत्मसंयम तथा काम करने और आराम करने की नियमित आदतें बनाने पर अवलम्बित होती हैं।

रिश्तों के प्रति असंवेदनशील

अपनी इसी अश्लील सामग्री को अत्यधिक देखने के कारण बहुत से युवा रिश्तों के प्रति असंवेदनशील होते चले जाते है तथा रिश्तों की मर्यादा को भी भूलने लगते है। विकृत सोच का प्रभाव शरीर के हाव-भाव और कार्यशैली पर सीधी-सीधा दिखाई देता है। यह उसके कार्य करने की शैली को प्रभावित करने लगता है।

शरीर कांतिविहीन होता चला जाता है

इस प्रकार अत्यधिक अश्लील साहित्य को देखने से उसका प्रभाव आपके शरीर पर पड़ने लगता है और शरीर कांतिविहीन और बीमार-बीमार सा लगने लगता है। सकारात्मक उर्जा जो कि प्रगति के कार्यों में लगानी चाहिए उसमे भी धीरे-धीरे कमी आने लगती है।

अपना नेतृत्व स्वयं करें

वट के एक बीज के अंदर वट का महान वृक्ष समाया है। अनुकूल परिस्थिति में एक बीज महान वृक्ष बन जाता है और प्रतिकूल परिस्थिति में वही बीज मिट्टी बन जाता है। ऐसी ही स्थिति युवावर्ग की है। यदि आप अपने लिए अनुकूल वातावरण का निर्माण करें तो उचित विकास होता है और अश्लीलता की तरफ बढ़ते है तो विकास रुक जाता है तथा उसमें विकृतता उत्पन्न हो जाती है।

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अतः अंत मैं यहां यही कहना चाहता हूँ कि हमारे मित्र जो सचेत हैं, जो समझ और सोच सकते हैं, उन्हें चाहिए कि अपना नेतृत्व वे स्वयं करें। वे साथ-ही-साथ अपने सहयोगियों/भाईयों को इस कुपथ से बचाने के लिए स्वयं कटिबद्ध हों। वे इस बात को याद रखें कि जब तक वे सफलता के लिए संघर्ष कर रहे हैं, तब तक वे एक ऐसे यज्ञ में लगे हैं, जहां कष्ट, संयम और धैर्य से ही सफलता मिल सकती है।

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