बाडेन पाॅवेल – स्काउट्स एवं गाइड्स के प्रवर्तक

Scouts and Guides – मानवता के युवा सेवक

आज संसार के कोने-कोने में खाकी वर्दी पहने और गले में रंगीन रुमाल (स्कार्फ) बांधे लाखों युवक-युवतियाँ मिल जायेंगे जो अपने को वृहद परिवार का सदस्य मानते हुए विश्वभ्रातृत्व और सेवा का आदर्श उपस्थित कर रहे हैं। वे मानवता में सहानुभूति, प्रेम और सेवा की भावनाओं को जाग्रत कर रहे हैं और बाडेन पाॅवेल द्वारा प्रदर्शित मार्ग पर संसार भर के ये नवयुवक-युवतियाँ आगे बढकर मानवता की सच्ची सेवा कर रहे हैं। इस संगठन की शाखाएं संसार के लगभग सभी देशो में फैली हुई है। 2007 के एक अनुमान के अनुसार दुनियाभर में 3 करोड़ 80 लाख स्काउट और गाइड हैं।

बाडेन पाॅवेल – स्काउट्स एवं गाइड्स के प्रवर्तक

Baden Powell का जीवन-दर्शन हमें आदर्श मानवता की ओर अभिप्रेरित करता है। उन्होंने नवयुवक स्काउटों को मानवता की सेवा का महत्व बतलाते हुए जो विचार प्रकट किये हैं, वे प्रत्येक मनुष्य के लिए अनुकरणीय हैं।

बाडेन पाॅवेल का जन्म 22 फरवरी 1857 को लंदन में हुआ था। इनके पिता श्री एच.जी. बाडेन पाॅवेल आॅक्सफर्ड विश्वविद्यालय में प्रोफेसर थे। जब वे सिर्फ 3 वर्ष के थे पिता जी का निधन हो गया। इनकी माता जी श्रीमति हेनरिट्टा ग्रेस के सिर पर 10 व्यक्तियों का बड़ा परिवार की जिम्मेदारी आ गया।

बाल्यावस्था से ही बालक बाडेन पावल प्रकृति प्रेमी थे। उन्हें प्राकृतिक परिवेश बहुत भाता था। वे सुबह-सुबह घूमने निकल जाते थे तथा विभिन्न शारीरिक अभ्यास करते थे। प्रारम्भिक शिक्षा के बाद उस समय होने वाली एक सैनिक परीक्षा में दूसरा स्थान प्राप्त किया उन्होंने सबको हैरान कर दिया।

सैनिक जीवन

वे ट्रेनिंग के बाद सेना की 13वीं हुसार्स बटालियन का अधिकारी बनाकर भारत भेजा दिये गये। भारत में उन्होंने 10 वर्ष व्यतीत किये, जहां उन्होंने अनेक प्रकार के सैनिक अनुभवों के साथ-साथ भारतीय जीवन और आदर्शों का भी अनुभव किया। भारत से बाहर अफ्रीका में उन्होेंने कई युद्धों में भाग लिया और विजय प्राप्त की। 1899-1900 के बोअर युद्ध में उन्होंने सेना की छोटी सी टुकड़ी के साथ दक्षिण अफ्रिका के मेफकिंग शहर की रक्षा की जो कि ब्रिटिश सेना की सप्लाई लाइन थी। अपनी इस वीरता और नेतृत्व के कारण वे अपने देश के राष्ट्रीय नायक बन गये। मेफकिंग विजय के बाद श्री बाडेन पाॅवेल को मेजर जनरल पद पर पदोन्नित दे दी गयी। आज भी इंग्लैंड के इतिहास में उन्हें मेफकिंग का वीर कहा जाता है।

इसी युद्ध के दौरान उन्होंने गाइड टू स्काउटिं नामक सेना की ट्रेनिंक पुस्तक लिखी। इस पुस्तक का प्रकाशन 1903 में हुआ जो जल्दी ही बेस्ट सेलर बन गयी। शारीरिक गतिविधियों का विषय होने के कारण यह पुस्तक बच्चों के बीच बहुत लोकप्रिय हो गयी। इसको देखते हुए उनके मस्तिष्क में बालक संगठन बनाने का विचार आया।

पहला स्काउट कैम्प और आन्दोलन की शुरूआत

1907 में अपने विचारों और इरादों का परिक्षण करने के लिए उन्होंने विभिन्न परिवेश के 20 बच्चों के साथ एक कैम्प का आयोजन किया। वे बच्चे एक हप्ते तक ब्राउन¬-सी द्वीप पर रहे जहां विभिन्न प्रकार की शारीरिक और मानसिक गतिविधियों में भाग लिया। श्री पावेल का यह परिक्षण अत्यन्त सफल रहा और इस आन्दोलन की रूपरेखा संसार के सामने आ गयी जो मानवता का सम्बल है। इस शिविर में श्री बाडेन पाॅवेल ने जो उपयोगी बातें बालकों को बतलायी, उन्हीं को संगृहित कर एक पुस्तक प्रकाशित की गयी थी, जिसके आधार पर हजारों बालक स्वयमेव स्काउट बनने लगे।

सन् 1909 में पहली राष्ट्रीय स्काउट रेली आ आयोजन किया गया जिसमें 11000 बच्चों ने भाग लिया। वहाँ पर लडकियां भी थीं जो कि इस नये आंदोलन का भाग बनना चाहती थीं। बच्चों के उत्साह और आन्दोलन की प्रगति को देख में श्री बाडेन पाॅवेल ने उनको संगठित किया। लड़कियांे की रूचि देखते हुए सन् 1910 में सामानान्तर संगठन का उन्होंने निर्माण किया, गर्लस गाइड। इस संगठन को चलाने की जिम्मेदारी पावेल की बहन एगनिस बेडन पावल को दी गयी।

सन् 1912 में उनकी मुलाकाता एक नवयुवती ओलेव सेंट क्लेयर सोम्य से हुई। जल्दी ही यह मुलाकात प्यार में बदल गयी। उस समय वे 55 वर्ष के थे और युवती सिर्फ 23 की थी। उनके तीन बच्चे हुए।

दुर्भाग्य से तब तक प्रथम विश्वयुद्ध आरम्भ हो चुका था जिसने इस आन्दोलन में तत्कालिक रूप से रूकावट पैदा की। सन् 1920 में, विश्व युद्ध के दो वर्ष बाद ओलम्पिया, लंदन में अंतराष्ट्र्रीय स्काउटिंग सम्मेलन आयोजित किया गया जिसमें श्री बेडन पावल इसके ‘चीफ स्काउट’ निर्वाचित हुए।

अंतिम समय और निधन

सन् 1938 में उन्होंने संगठन से रिटाटरमेंट ले लिया। वे नायरी (कीनिया) अफ्रीका में बस गये। 8 जनवरी 1941 में 83 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया।

Also Read:  रेड क्रॉस सोसायटी के जनक – हेनरी डूनेंट


आपको यह कहानी बाडेन पाॅवेल – स्काउट्स एवं गाइड्स के प्रर्वतक Baden Powell Biography in Hindi  कैसी लगी, कृप्या कमेंट बाक्स पर साझा करें।

Random Posts

  • short story of birds कलह से हानि होती है Hindi Moral Story of Two Birds

    कलह से हानि होती है Hind Moral Story of Two Birds प्राचीन काल की बात है, किसी जंगल में एक व्याध रहता था। वह पक्षियों (birds) को जाल में फँसाकर अपनी […]

  • harish chandra Indian Great Scientist in Hindi हरीश चंद्र | Indian Great Scientist in Hindi

    हरीश चंद्र | Indian Great Scientist in Hindi डा. हरीश चंद्र (Dr. Harish Chandra) समकालीन पीढ़ी के अद्वितीय गणितज्ञों (Greatest Mathematician) में से एक थे। उन्होने अनंत आयामी समूह प्रतिनिधित्व […]

  • hanuman shanidev fight हनुमान जी द्वारा शनिदेव को दण्ड

    हनुमान जी द्वारा शनिदेव को दण्ड, short story of Hanuman Shanidev Fight and why we devote oil to Shanidev in Hindi एक बार की बात है। शाम होने को थी। […]

  • hone ko koi nahi taal sakta होनी को कोई नहीं टाल सकता | Real-life incidence

    होनी को कोई नहीं टाल सकता | Real-life incidence काफी पुरानी  बात है। अप्रैल 89 का समय था , मैं अपने मित्र से मिलने रतलाम गया था। उनके यहाँ उस […]

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*
*