खोये हुए बेग प्राप्त करने में बस कर्मचारियों द्वारा अतुलनीय सहयोग

खोये हुए बेग प्राप्त करने में बस कर्मचारियों द्वारा अतुलनीय सहयोग – सच्ची प्रेरणादायक घटना

घटना 13 दिसम्बर 2017 की है। मैं दिल्ली में सर्विस करता हूँ। लोकल ट्रेन से प्रतिदिन कोसी और आफिस आना-जाना होता है। सर्दियों में अक्सर ट्रेन काफी देरी से आती हैं। ऐसे ही एक शाम कोसी की तरफ जाने वाली लोकल ट्रेन काफी देरी से थी इसलिए बस से जाने के इरादे के साथ बस अड्डे चला गया। वहाँ पलवल के लिए बस जाने को तैयार देखी तो उसमें चढ़ गया। पलवल उतर कर अपने गृहस्थान कोसी के लिए बस पकड़ी।

आज काफी देर हो गयी थी। घर पहुंचने की जल्दी थी। जब घर के नजदीक से बस निकली तो उतरने की जल्दीबाजी में अपने बेग को बस में ही भूल गया। घर पहुंचते ही याद आया तो मैं बहुत ही चिन्तित हो गया। बेग में कुछ अत्यन्त आवश्यक कागजात तथा मेरे पेनकार्ड आईकार्ड आदि भी थे।

दूसरे दिन आफिस पहुंचकर इसी उधेड़बुन में लगा रहा कि कैसे बस वालों से सम्पर्क करूं। आशा की हल्की सी किरण थी कि हो सकता है कि शायद बेग मिल ही जाए। सहयोगियों से चर्चा की। सभी ने कहा की तुम्हारा सामान मिलने की ना के बराबर उम्मीद है। फिर भी मैंने प्रयत्न करने की सोची। भगवान का नाम लिया और उत्तरप्रदेश ट्रांसपोर्ट काॅलसेन्टर में फोन लगाया। आपरेटर ने मुझसे पूछा कि कौन सी डिपो की बस है? मैने टिकट में डिपो का कोई सुराग ढूंढने की कोशिश की पर सब बेकार। उसमें डिपो का क्या पता लिखा है और कहाँ लिखा है कुछ समझ नहीं आया। इस प्रकार काॅलसेन्टर आपरेटर से मुझे निराशा ही हाथ लगी।

मैं ईश्वर से प्रार्थना किये जा रहा था कि काश किसी तरह बेग मिल जाए तो अनावश्वक परेशानियों से बच जाऊँ। तभी एक सहयोगी की बात से आशा का संचार हुआ। उसने बताया कि इंटरनेट में गाड़ी नम्बर डाल कर पता करो शायद डिपो के बारे में पता ही चल जाए।

इसी खोज खबर में मुझे इंटरनेट से श्री एस.पी. सिंह, सर्विस मैंनेजर, यूपी.एस.आर.टी.सी., आगरा रीजन का नम्बर मिला। हल्की सी उम्मीद के साथ उन्हें फोन लगाया। उनके प्रेमपूर्वक व्यवहार और पूरी सहायता का आश्वासन मिलने से मुझे अत्यधिक प्रसन्नता हुई। इस तरह की बातचीत का तो मुझे तनिक मात्र भी उम्मीद नहीं थी। सरकारी आधिकारी और साथ ही साथ बस कर्मचारियों के व्यवहार की आयेदिन सुनने को मिलने वाली नाकारात्मक चर्चा ही तो मैं सुनते आया था।

श्री एस.पी. सिंह जी ने बेग की डिटेल अपनी विभागीय गु्रप में डाल दी। उन्होंने उस बस की वर्तमान स्थिति में बारे में मुझे अवगत कराया और बताया कि बस में एक बेग मिला है। उन्होंने मुझे परिचालक श्री विरेन्द्र जी का मोबाईल नम्बर मेसेज किया और उनसे बात करने की सलाह दी। परिचालक ने भी मेरा पूरा सहयोग किया और बेग की पहचान की जानकारी दी। उनकी पहचान के अनुसार वह मेरा ही बेग था। बता नहीं सकता कि मन को कितनी सकून और शान्ति मिली।

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उधर श्री एस.पी. सिंह जी अभी भी पूरी तरह मुझसे सम्पर्क बनाये हुए थे तथा वस्तुस्थिति की जानकारी ले रहे थे। परिचालक द्वारा दिये गये डिपो के कार्यालय में मैंने अपने एक मित्र को भेज कर बेग प्राप्त कर लिया। खोए हुए सामान को पाकर मेरी खुशी का ठिकाना न रहा। बेग का सभी सामान बिल्कुल ज्यो-का-त्यों था।

श्री एस.पी.सिंह और उनके विभागीय सहयोगियों का प्रेमपूर्वक व्यवहार और सहायता करने की तत्परर्ता देखकर मैं अत्यन्त प्रभावित हुआ। मैंने परिचितों और मित्रों को यह घटना सुनायी तो सभी ने एक स्वर में इन सच्चे विभागीय सेवकों की खुले हृदय से सराहना की तथा उनकी स्वस्थ और लम्बी आयु की भगवान से कामना की।

प्रेषक: सुमित अग्रवाल, कोसी
Email : sumitagrawal091@gmail.com

हमें हर्ष है कि श्री एस.पी. सिंह के प्रेरणात्मक कार्य को हमारे ब्लाग में छपने के बाद राष्ट्रीय दैनिक हिन्दुस्तान ने प्रमुखता से स्थान दिया है। हम राष्ट्रीय दैनिक को इसके लिए बधाई देते हैं।

हमें अपने आसपास निःस्वार्थ रूप से इस तरह के अनुसरणीय कार्य करने वाले व्यक्ति मिल जाते हैं। हमें उनके कार्य को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए बल्कि प्रोत्साहित करना चाहिए और उनके किये गये अतुलनीय कार्य को अपने तक सीमित न रख कर अपने सहयोगी, रिश्तेदारों और मित्रों तक ले जानी चाहिए।

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