काबिलियत तो मौका मिलने पर पता चलती है

काबिलियत तो मौका मिलने पर पता चलती है – Motivational Hindi Story of Roman Emperor Claudius

क्लाउडियस

यह कहानी है रोमन सम्राट क्लाउडियस (Roman Emperor Claudius) की। वे विभिन्न शारीरिक दिक्कतों से ग्रस्त थे। उनके सिर और हाथों में कम्पन रहती थी। कुछ लंगडाहट के साथ चलते थे तथा अटक-अटक कर बोलते थे। इतिहासकारों का मत है कि शायद वे मस्तिष्क पक्षाघात अथवा टॉरेट्स सिंड्रोम की बीमारी से पीड़ित थे।

उनके परिवार ने उनकी शारीरिक विकलांगता का मजाक उड़ाया। परिवार ने इन कमजोरियों को राजपरिवार की सार्वजनिक शर्मिंदगी का एक स्रोत माना। उनकी माँ तक उन्हें राक्षक कहकर पुकारती थी। कभी किसी को डांटती थी तो कहती थी कि वह तो क्लाउडियस से भी ज्यादा निकम्मा है। उनकी बहन का मानना था कि रोम कभी भी उसे सम्राट के पद पर पसंद नही करेगा।

उन्होंने जीवन में अपेक्षाकृत देर से राजनीति में प्रवेश किया। शारीरिक बाधाओं के कारण उन्हें महत्वपूर्ण सार्वजनिक पदों पर नहीं बैठाया गया। उन्हेें हमेशा दूर-दूर रखा जाता था। क्लाउडियस के चाचा, सम्राट तिबेरीयस ने बार-बार राजनीतिक कैरियर शुरू करने के उनके अनुरोधों को अस्वीकार कर दिया।

क्लॉडियस ने निराश होकर अपनी राजनीतिक आकांक्षाओं को त्याग दिया और अपना समय पासा खेलने तथा शराब पीने में व्यतित करने लगे। फिर उनका झुकाव किताबों और शैक्षिक अध्ययन की तरफ हो गया। अपने परिवार द्वारा उनपर नालायक और निकम्मापन का चप्पा लगने के बावजूद वह वास्तव में काफी तेज दिमाग के थे, उन्होंने इतिहासकार लेवी को प्रभावित किया जिन्होंने क्लाउडियस को लिखने के लिए प्रोत्साहित किया। क्लाउडियस ने रोमन इतिहास पर दर्जनों पुस्तकें लिखी। उनका लिखा हुआ कार्य अब उपलब्ध नहीं है पर अपने समय पर उसका काफी सम्मान था। अतिसम्मानित रोमन इतिहासकार टैसिटस ने भी अपने स्वयं के लेखों में क्लाउडियस के काम को एक स्रोत के रूप में इस्तेमाल किया था।

जब वे 37 वर्ष के थे तब उन्हें कम प्रतिष्ठा वाले पद पर पहली बाद नियुक्ती दी गयी। जब उनके भतीजे कैलिगुला ने शाही पद ग्रहण किया तब उसने क्लाउडियस को अपना सह-सलाहकर नियुक्त कर दिया, उस वक्त क्लाउडियस लगभग 46 वर्ष की उम्र के थे। उन्हें भतीजे सम्राट कैलिगुला के हाथों लगातार सार्वजनिक रूप से अपमानित होना पड़ता था। प्राचीन इतिहासकार स्यूटोनियस के अनुसार, कैलिगुला को अपने चाचा का मजाक उड़ाने में बहुत उल्लास का अनुभव होता था। अगर क्लाउडियस को सार्वजनिक भोज के झपकी आ जाती थी तो मेहमान को जैतून और खजूर उस पर फैंकने के लिए प्रोत्साहित किया जाता था।

शारीरिक दुर्बलताओं के कारण उन्हें एक लाभ भी हुआ। जब परिवार के एक-के-बाद एक सदस्य की हत्या हो रही थी तब वे अपने संभावित दुशमनों से बचे रहे क्योंकि उन्हें कभी भी गंभीर खतरे के रूप में नहीं देखा गया।

24 जनवरी, 41 को कैलिगुला की हत्या के बाद क्लॉडियस (Claudius) के पास अप्रत्याशित रूप से सत्ता का गयी। भतीजे की हत्या के बाद वह डर के मारे महल में पर्दे के पीछे छिप गये। राजपरिवार के वफादार शाही गार्डों ने उन्हें खोज निकाला। परिवार के आखिरी पुरुष सदस्य होने के कारण मौके पर ही उसे सम्राट घोषित कर दिया। सीनेट पहले तो इस फैसले से सहमत नहीं था लेकिन बाद में सहमति दे दी। इस तरह वे रोम के चौथे सम्राट बन गए।

वे इटली के बाहर पैदा होने वाले पहले रोमन सम्राट थे, उनका शासनकाल 41 एडी से 54 एडी तक रहा। उनके माता-पिता का नाम ड्रुसस और एंटोनिया माइनर था। तमान शरीरिक कमजोरियों और हमेशा ताना सुनने-सहने वाले क्लाउडियस एक सक्षम, कुशल और लोकप्रिय प्रशासक साबित हुए। सत्ता संभालने के बाद उन्होंने सबसे पहले भतीजे के हत्यारों को सजा सुनाई। माँ की याद में खेलों का आयोजन किया। सत्ता में आने के बाद उनकी सेहत में भी काफी तेजी से सुधार आया। यह कहा जा सकता है कि अपमान और तानों से मिलने वाला मानसिक आहात से ही वे ज्यादा बीमार रहते थे। उन्हें निर्माण कार्य में भी बहुत रूचि थी। उन्होंने साम्राज्य में कई नई सड़कों, जल निकायों और नहरों का निर्माण किया। अपने शासनकाल के दौरान साम्राज्य ने ब्रिटेन पर जीत हासिल की। वह न्यायप्रिय शासक थे। न्याय व्यवस्था पर व्यक्तिगत रूप से नजर रखते थे। उन्होंने सार्वजनिक अदालते बैठाई और प्रत्येक दिन लगभग 20 फैसले सुनाये।

क्लाउडियस ( (King Claudius) की मौत के कारण पर इतिहासकार विभिन्न मत रखते हैं। कुछ प्राचीन इतिहासकारों का कहना है कि क्लौडियस को उनकी पत्नी द्वारा रात्रि के भोजन में जहरीला मशरूम खिलाकर मार दिया गया था। तीसरी पत्नी अग्रिप्पिना ने अपने बेटे नीरो की ताजपोशी सुनिश्चित करने के लिए साजिश के तहत यह कृत्य अंजाम दिया। लेकिन कुछ वर्तमान इतिहासकार भिन्न राय रखते हैं, उनका तर्क है कि क्लाउडियस की मौत अज्ञातवश जहरीला मशरूम खाने से हुई थी। जो भी सच्चाई रही हो वह तो समय की परतों पर कही दब गयी है परन्तु यह सत्य है कि नालायक, निकम्मा कहे जाने वाला व्यक्ति को जब मौका मिला तो वह एक सक्षम तथा न्यायप्रिय सम्राट साबित हुए, जिन्होंने रोमन साम्राज्य का ब्रिटेन तक विस्तार किया और राज्य का मान-सम्मान बढ़ाया।

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