मौलवी साहब की जूतियाँ – Kids story in Hindi

मौलवी साहब की जूतियाँ – Kids story in Hindi

kids story in hindi

‘बच्चों, मेरी जूतियाँ उठा लाओ।’ मौलवी साहब ने कहा।

मौलवी साहब काफी देर से बच्चों को पढ़ा रहे थे। बच्चे भी बड़ी ध्यान ने उनकी बात को समझ रहे थे। अब मौलवी साहब का घर जाने का समय हो गया तो उन्हें बच्चों से जूतियाँ उठा लाने को कहा।

दोनो बच्चे मौलवी साहब की बहुत इज्जत करते थे। वे जूतियाँ उठाने के लिए भाग पड़े कि कौन मौलवी साहब की खिदमत कर सके। बच्चे एक साथ ही जूतियों के पास पहुंच गये। वे आपस मे ही उलझ पड़े कि कौन जूतियाँ उठाये। दोनों यही चाहते थे कि मैं ही जूतियाँ उठाऊँ और मौलवी साहब के पास पहुंचूं।

झगड़ा सुलझने का नाम ही नही ले रहा था। तब दोनों ने मिलकर एक युक्ति निकाली। एक-एक जूती लेकर दोनों भाई मौलवी साहब के पास पहुंच गये।

इन मौलवी साहब का नाम उस्ताद फ़र्राह था और ये दोनों बालक बगदाद के खलीफा मा‘मुन अल रशीद के बेटे थे। उन दिनों खलीफ़ा मुसलमानों के सबसे शक्तिशाली बादशाह थे। इसी तरह उस्ताद फ़र्राह भी काफी प्रसिद्ध थे। वे खलीफ़ा के इन दोनों बेटों को पढ़ना-लिखना सिखाया करते थे।

खलीफ़ा के पास यह बात चापलूसों द्वारा पहुँच गयी कि आज मौलवी साहब ने दोनों शहजादों से अपनी जूतियाँ उठवायी हैं। उन्होंने तुरन्त मौलवी साहब को बुलाने का आदेश दिया।

मौलवी साहब के तो जैसे होश ही उड़ गये। वे घबराये हुए खलीफा के सामने पहुँचें। उनके आश्चर्य की सीमा न रही जब खलीफा ने उनको बड़े प्रेम से अपने पास बिठाया। मौलवी साहब को इसमें भी कुछ खतरनाक राज़ ही नजर आ रहा था।

खलीफा ने कहा-‘मौलवी साहब! एक बात बताइए। आज इस दुनिया में सबसे बड़ा कौन है और सबसे ज़्यादा इज्जत किसकी होनी चाहिए?’

मौलवी साहब का वैसे ही बुरा हाल था। वे खलीफा के मन की बात नहीं समझे, सिर झुकाकर बोले-‘हुजूर! आज की दुनिया में तो आप ही सबसे बड़े हैं तथा आपकी इज्जत भी सबसे ज्यादा है क्योंकि आप मुसलमानों की खलीफा हैं।’

खलीफा ने मुसकराकर कहा-‘नहीं, दुनिया में सबसे बड़े उस्ताद फर्राह हैं और इज्जत भी उस्ताद फर्राह ही की सबसे ज्यादा है; क्योंकि खलीफा के बेटे उनकी जूतियाँ उठाते हैं।’

मौलवी साहब की तो वैसे ही हालात खराब थी। अब खलीफा को क्या जवाब दें! उन्हें कुछ न सूझा तो माफी मांगते हुए गिड़गिड़ाकर बोले-‘मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गयी कि मैंने जो शाहजादों से जूतियाँ उठवायी। हूजूर अल्लाह के नाम पर मेरा कसूर माफ कीजिए।’

खलीफा मुस्कुराते हुए बोले-‘आप डरते क्यों हैं जनाब! मैं झूठ नहीं बोल रहा हूँ। आप मेरे बच्चों के उस्ताद हैं। इसलिए सचमुच दुनिया में आप ही सबसे बड़े हैं और इज्जत भी आपकी ही सबसे ज्यादा है। सच मानिये, इस बात से मैं बहुत खुश हूँ कि आप मेरे बच्चों से खिदमत कराते हैं और वे भी खुशी-खुशी आपकी खिदमत भी करते हैं।’

उन्होंने आगे कहा-‘उस्ताद, माँ-बाप और बादशाह की खिदमत करने से हमेशा आदमी की इज्जत बढ़ती है। आज मेरे बच्चों ने आपकी जो खिदमत की है, उससे उनकी ही नहीं, मेरी भी इज्जत बढ़ी है।’

बच्चों इस कहानी से आप समझ गये होंगे कि अपने से बड़ों का हमेशा आदर-सम्मान करना चाहिए इससे की आपके माता-पिता का भी सम्मान बढ़ता है और उन्हें आप पर गौरव का अनुभव होगा जैसे कि खलीफा जैसे बड़े बादशाह को अपने पुत्रों पर हुआ।

कदमताल पर प्रकाशित कहानियों की सूची


आपको यह कहानी मौलवी साहब की जूतियाँ – Kids story in Hindi   कैसा लगी, कृप्या कमेंट बाक्स पर साझा करें।

Random Posts

  • वाल्मीकि वाल्मीकि । डाकू से महर्षि तक का सफर

    वाल्मीकि । डाकू से महर्षि तक का सफर महर्षि वाल्मीकि का पूर्व नाम रत्नाकर था। रत्नाकर का काम राहगीरों को लूट कर धन कमाना था। रत्नाकर जिस किसी को भी लूटता, […]

  • flop life फ्लोप लाइफ (Flop Life)

    फ्लोप लाइफ (Flop Life) in Essay आपने दूरदर्शन (Television) पर स्व. जसपाल भट्टी (Jaspal Bhatti) का फ्लोप शौ (Flop Show) देखा ही होगा, ऐसे में मेरी कल्पना में राजेश की […]

  • short stories in hindi बिस्कुट चोर Short stories in Hindi

    बिस्कुट चोर Short stories in Hindi एक महिला रात को बस अड्डे में अपने गाड़ी का इंतजार कर रही थी। उसकी गाड़ी आने में अभी घंटे से भी ज्यादा समय बाकी था। […]

  • effort मेहनत का फल | Effort Motivational Story

    मेहनत का फल | Effort Motivational Story एक दिन विंध्याचल प्रदेश के राजा के दरबार में तीन व्यापारी आए और राजा से बाले, महाराज! हम रत्नों के व्यापारी हैं, व्यापार […]

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*
*