मजबूरी की ईमानदारी – Force to Honest

मजबूरी की ईमानदारी Force to Honest

majboori ki imandari

एक हमारे मित्र हैं। सूट-बूट जैंटलमैन। पूरी तरह ईमानदारी से लबालब। गुटके के शौकीन है। मैट्रो में यात्रा करते समय थूकना तथा गंदगी फैलाने से परहेज करते हैं। कई बार सहयात्रियों को अच्छी-अच्छी नसीहतें भी देते है। लाईन में लग कर टिकट लेते हैं तथा लाईन में लगकर ही सिक्यूरटी चैक करवाते हैं। आप कह सकते हैं पूरी तरह से सभ्य नागरिक।

मजबूरी की ईमानदारी

लेकिन वे जब लोकल ट्रेन में होते हैं तो उनका बिल्कुल बदला हुआ सा रूप होता है। ट्रेन आते ही सीट के लिए मारामारी, कोई लाईन नहीं बस एक ही मकसद सीट का संघर्ष। इसके लिए चाहे किसी को भी चोटें आये कोई परवाह नहीं। गुटका मुंह से निकलता ही नहीं। साफ-सफाई का ध्यान नहीं, तेज-तेज आवाज में बोलना, मित्रों के लिए सीट रोकना आदि बुरी आदते अचानक प्रकट हो जाती है। इस समय उनकी मैट्रो वाली ईमानदारी न जाने कहाँ छू-मन्तर हो जाती है।

एक महात्मा जी कहीं रास्ते में मुझे मिले। वे ब्रह्मचर्य के पालन पर बेहतरीन व्याख्यान दे रहे थे। सारे श्रोता मुग्ध होकर उनको सुन रहे थे। व्याख्यान के बाद मैं उनसे चुपचाप पूछ बैठा-बाबा जी जवानी में आपके पास विवाह के कितने प्रस्ताव आये थे। उन्होंने कहा एक भी नहीं। अब बताइए साहब, जब रिश्ता ही नहीं आया तो बन गये ना पक्के ब्रह्मचारी। यहाँ भी बाबा जी की स्वइच्छा नहीं बल्कि मजबूरी थी।

अधिकतर आफिस/कार्यालय में ही यही हाल है। काम तभी तक जब तक की कोई उच्च अधिकारी देख रहा है। जैसे ही वे इधर-उधर हुए नहीं, काम बंद और बाते चालू। काम पूरा न कर पाने के सौ बहाने हमेशा रटे-रटाये तैयार रहते हैं। किस तरह उस कार्य को जल्द-से-जल्दी पूरा किया जाए उसके लिए कोई फार्मूला इजाद ही नहीं हो पाता है।

आपने देखा और सुना होगा कि फलां व्यक्ति किसी के पास 20 साल से कार्य करता था। बहुत ही ईमानदार था। एक भी पैसा इधर-उधर नहीं हुआ। पता नहीं अचानक क्या हुआ कि वह बेइमानी कर बैठा। अब उन साहब को क्या बताया जाए कि वह व्यक्ति मौका न मिल पाने के कारण ही ईमानदार था। उसमे चारित्रिक ईमानदारी रही ही नहीं होगी। उसने तो जैसे ही मौका मिला बस अपना सही रूप दिखा दिया।

अब हम अपने घर को ही देख लें। साफ-सफाई का पूरा ख्याल। मौहल्ले में सबके लिए एक चरित्रवान और ईमानदार व्यक्ति की छवि। पर अधिकतर करते क्या हैं? घर का कूड़ा मौका लगते ही गली में कहीं भी छोड़ देते हैं, चूहेदानी में फंसे चूहे को किसी के घर में सरका देते हैं। इस तरह और भी औछा कार्य करने से नहीं चूकते जो समाज और लोगों के सामने नहीं कर सकते। हममें से अधिकतर मौका मिलते ही अपने छद्म रूप से बाहर आ जाते हैं और ईमानदारी वाला चौला उतार फैंकने में जरा भी देर नहीं करते।

इन सब घटनाओं को पढ़ कर आप समझ गये होंगे कि इंसान का सच्चा रूप तो तभी प्रकट होता है जब मौका हाथ लगता है। उससे पहले जो उसने ईमानदारी का चौला पहना हुआ था वह तो बस मजबूरी की ईमानदारी थी जो वह ढो रहा था तथा जहां भी मौका मिला असली रूप की छटपटाहट बाहर निकल ही जाती है।

हमें अपने जीवन के इस दोहरे चरित्र पर विचार करना चाहिए। हमे विचार करना होगा कि इस तरह के मजबूरी वाली ईमानदारी को हम कब तक ढोयेंगे। हम जो भी कार्य करें, उसे पूरी ईमानदारी और दिल से करें तथा किसी भी कार्य को अपनी मजबूरी न समझें। इस दोहरे चरित्र से निजाद पाकर हम जिस भी क्षेत्र में कदम रखेंगे वहाँ सफलता अवश्य मिलेगी भले ही देर-सवेरे क्यों न हो जाए। यह मेरा पक्का विश्वास है। हमारी तरक्की, देश का सम्मान इसी में निहीत है।

Also Read : अपने आपको जोकर न बनायें


आपको यह article मजबूरी की ईमानदारी Force to Honest in Hindi  कैसा लगी, कृप्या कमेंट बाक्स पर साझा करें। इस विषय में आपके अनुभव और विचारों का स्वागत है।

Random Posts

  • Prerak Bal Kahani बालक का संकल्प – Prerak Bal Kahani

    बालक का संकल्प – Prerak Bal Kahani वह अत्यन्त वैभवशाली घर, कहिए कि पूरा राजमहल ही था। सुख-सुविधाओं के जितने साधन हो सकते हैं, सब थे। उस भवन का स्वामी […]

  • सफलतम सीईओ दुनिया के कुछ सफलतम सीईओ की व्यापारिक सोच

    दुनिया के कुछ सफलतम सीईओ की व्यापारिक सोच Business thinking of successful top CEO / Businessman in Hindi वॉल्ट डिजनी, द वॉल्ट डिजनी कंपनी Walt Disney संस्थापक और सीईओ (1923-66) The Walt […]

  • water is medicine पानी भी एक दवा है – इसके चमत्कार देखें

    पानी भी एक दवा है – इसके चमत्कार देखें Water is also a medicine – see its miracles in Hindi 1979 में जब अयातुल्लाह ने शाह से ईरान में सत्ता हथिया […]

  • anna mani अन्ना मणि | Mahan Mahila Scientist in Hindi

    अन्ना मणि | Mahan Mahila Scientist in Hindi महान भारतीय वैज्ञानिक अन्ना मणि (ANNA MANI) की सफलता की कहानी पुरुषों और महिलाओं (ladies) को बराबर प्रेरित करती है। उनके समय […]

One thought on “मजबूरी की ईमानदारी – Force to Honest

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*
*