निराशा और अवसाद से बाहर कैसे निकलें?

निराशा और अवसाद से बाहर कैसे निकलें?
How to deal with depression and disappointment?

आलोचना depression

यदि आलोचना (criticism) आपको परेशान करती हैं तब क्या करें?

क्या करें जब आपको बात-बात पर टोका जाने लगता हो?

जैसे कि खुल कर हँसने पर कहा जाए कि कैसे मुंह फाड़-फाड़ कर हंस रहा है। चुप रहने पर कहा जाए कि कैसे लल्लू की तरह बैठा है। कुछ गलती होने पर कहा जाए कि कोई काम करने की तमीज ही नहीं है…. इत्यादि…. इत्यादि। इस तरह की टोका-टाकी जानबूझ कर अथवा आदतानुसार अनजाने से भी हो सकती है। अधिकतर लोगों को पता ही नहीं होता कि उनके इस तरह के आलोचनात्कता वाले व्यवहार से बहुत से लोगों को निराशा तथा अवसाद की तरफ धकेलने के लिए काफी होता है।

क्या करें जब कोई प्रभावशाली व्यक्ति जानबूझ कर आपके हर अच्छे बुरे काम की आलोचना करता हो तथा आपके आगे बढ़ने में रूकावट पैदा करता हो?

आप आलोचना (criticism) को सकारात्मकता के रूप में लें।

यह तो सिर्फ आपको परेशान करने का खेल लगता है। यदि वह व्यक्ति आपकी सहनशाीलता की परीक्षा ले रहा है तो आपको इस परीक्षा में कामयाब होना होगा। उस व्यक्ति की सही आलोचना को सकारात्मकता के साथ लें और जानबूझ कर की गई आलोचना को बस हँसी में टाल दें। विश्वास कीजिए आपके इस तरह के रवैये से वह परेशान हो जायेगा और आपके प्रति अपने नकरात्मक विचारों को वह बदलने के लिए मजबूर हो जायेगा। बस आपको रखना है-दृढ़ संकल्प। हर वह पत्थर जो आपकी तरफ फैंका जा रहा है उन्हें बस इकट्टा करते रहें तथा उससे एक बेहतरीन इमारत बनायें।

निराशा (disappointment and depression) से बाहर आने के लिए आप वह काम करें जिससे कि आपको आनंद आता हो। यह ध्यान दें कि अवसाद के समय कभी भी अपने ऊपर अकेलापन हावी न होने दें। लोगों से खूब घुले-मिलें। बातचीत करें। नई जगह घूमने जायें। खूब शारीरिक मेहनत करें जैसे कि कसरत, दोड़धूप आदि जिससे कि आपको आराम से नींद आ सके क्योंकि अवसाद के समय अक्सर होता यह है कि दिन तो कट जाता है लेकिन रातें करवटें बदलते-बदलते बीतती हैं। अनिद्रा के कारण आपकी परेशानी और अधिक बढ़ जाती हैं। आप चिड़चिड़े होने लगते हैं। बात-बात पर गुस्सा आना आम हो जाता है कभी-कभी यह भी होता है कि आपका किसी से बातें करने का मन ही नहीं करता, चुपचाप रहना ही मन को भाने लगता है।

ध्यान रखें आप बहुत महत्वपूर्ण इंसान हैं। जीवन में आपके द्वारा अभी बहुत कुछ होना बाकी है। आपने अभी नयी ऊँचाईयों को छूना है। किसी को अधिकार नहीं है कि आपके बारे में एक राय बनायें। राय उनकी है, विचार उनके हैं, आपके तो है नहीं। फिर आप उनके विचारों को अपने जीवन के लिए सत्य कैसे मान लेंगे।

याद रखें जीवन आपका, सपने आपके। अपने भविष्य के निर्माता आप स्वयं हैं। यह नकारत्मकता और विरोधी तो बस सड़क के स्पीड ब्रेकर हैं जो आपकी गति को कम करते हैं इस तरह आपको सुरक्षित मंजिल तक पहुंचाने में अप्रत्यक्ष रूप से मदद ही करते हैं।

कदमताल पर व्यक्तित्व विकास से सम्बन्धित लेख


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