उर्दू साहित्य के गौरव । अब्दुल कावी देसनवी

उर्दू साहित्य के गौरव । अब्दुल कावी देसनवी

अब्दुल कावी देसनवी

अब्दुल कावी देसनवी (Abdul Qavi Desnavi عبدالقوى دسنوى) का जन्म 1 नवम्बर 1930 को गाँव देसना, नालंदा, बिहार में हुआ था। उनके पिता जी का नाम सैयद मौहम्मद सईद रजा था। वे उर्दू, अरबी तथा फारसी भाषा के प्रोफेसर थे जो कि मुंबई के सेंट जेवियर्स काॅलेज में पढ़ाते थे।

देसनवी ने अराह, बिहार से अपनी प्राथमिक शिक्षा पूरी की। फिर वे मुंबई चले गये। वहां उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज में स्नातकोत्तर तक की शिक्षा ग्रहण की।

देसनवी को बचपन से ही उर्दू साहित्य के प्रति गहरी रूचि थी। सन् 1961 में वे सैफिया पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज के उर्दू विभाग में शामिल हुए। आगे चल कर वे इसी काॅलेज में विभाग के प्रमुख बने तथा यहीं से 1990 में वे सेवानिवृत्त हुए। सेवानिवृत्ति के बाद भी उनका उर्दू साहित्य के प्रति जुनून कम नहीं हुआ।

उनकी साहित्य में गजब की पकड़ थी। उन्होंने कई प्रसिद्ध किताबें लिखी। उनकी बेहतरीन कृतियों में मौलाना अबुल कलाम आज़ाद, मिर्जा गालिब और अल्लामा इकबाल पर लिखे गये लेख माने जाते हैं।

अब्दुल कावी देसनवी को अपने जीवनकाल में विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित किया गया जिसमें 1957 में मिला शिब्ली पुरस्कार तथा 1998 में प्राप्त हुआ शाहिदी पुरस्कार शामिल है।

सेवानिवृति के बाद उन्होंने भोपाल, मध्यप्रदेश में अपना स्थायी निवास बना दिया। वे आजीवन विभिन्न मानक पदों पर कार्य करते रहे जिसमे कि मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी के सचिव और बरकतुल्ला विश्वविद्यालय, भोपाल के डीन, फैकल्टी आॅफ आर्टस शामिल है।

सन् 2000 में उनकी एक पुस्तक ‘हयात ए अबुल कलाम आज़ाद’ (Hayat-e-Abdul Kalam Azad) का माॅर्डन पब्लिशिंग हाउस, दिल्ली द्वारा प्रकाशन हुआ। इस पुस्तक को देसनावी के बेहतरीन कार्यों में से एक माना जाता है जिसने उन्हें साहित्य जगत में प्रसिद्धी की बुलंदी तक पहुंचा दिया।

हयात ए अबुल कलाम आज़ाद

7 जुलाई, 2011 को 80 वर्ष की आयु में श्री अब्दुल कावी देसनवी (Abdul Qavi Desnavi) का भोपाल में निधन हो गया। वे कई दिनों से बीमार चल रहे थे। भले ही आज वे नहीं है परन्तु उनकी लिखी गयी अनमोल कृत्तियाँ हमेशा उन्हें हमारे बीच होने का आभास प्रदान करती रहेगी। इन महान हस्ती हो हमारा सत्-सत् नमन।

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