फ़्लोरेन्स नाइटिंगेल | सेवा की प्रतिमूर्ति

फ़्लोरेन्स नाइटिंगेल | सेवा की प्रतिमूर्ति

फ़्लोरेन्स नाइटिंगेल (Florence Nightingale) का जन्म 12 मई सन् 1820 ई. में इटली के शहर फ्लाॅरेन्स में एक ब्रिटिश परिवार में हुआ था। वह उच्च घराने की लड़की थी। परिवार में पैसों की कोई कमी नहीं थी पर फ्लाॅरेन्स का जन्म ही दीन दुखियों की सेवा के लिए ही हुआ था। अतः उनका मन कभी भी एशो-आराम तथा भोगविलास की तरफ नहीं था।

पच्चीस वर्ष की अवस्था में माता-पिता से नर्स का काम सीखने की इच्छा जाहिर की। उस काल में नर्स के काम को हीन नज़रों से देखा जाता था। इस कार्य को अति निम्न वर्ग के लोगों का पेशा कहा जाता था। इस कारण परिवार ने उनकी इस इच्छा को स्वीकृति नहीं दी।

वह नर्सों के सम्बन्धित पुस्तकें पढ़ने लगी तथा गुप्त रूप से रोगियों की दशा का अध्ययन करने के लिए अस्पताल में भी पहुँच जाया करती थी।

बहुत ही आवश्यक परिस्थित में एक दिन उनके परिवार को कुछ माह के लिए दूसरे शहर में जाना पड़ा। इस मौके का फायदा उठाकर वे लगभग तीन माह तक नर्स का काम सीखती रही।

जब वह तैंतीस साल की थी तो परिवार ने उनकी जिद्द के आगे हार मान ली और उसे काम सीखने की अनुमति दे दी। वह हारले स्ट्रीट के एक अस्पताल ‘केयर आॅफ द सिक्’ में निरीक्षिक का काम करने लगी।

उसी समय सन् 1854 में क्रीमिया का युद्ध छिड़ गया। फ्लाॅरेन्स ने सरकार से उनके स्वयंसेवकों के दल को स्कूतरी भेजने की प्रार्थना की। सरकार से अनुमति-पत्र मिलने पर वह आवश्यक सामान लेकर अड़तीस नर्सों के साथ, जिन्हें कि उन्होंने ही ट्रेनिंग दी थी, स्कूतरी चली गयी।

अस्पताल घायल सैनिकों से भरा पड़ा था। दवा और अन्य सामानों का अभाव उन्हें बहुत खटकता था, फिर भी उनके द्वारा काफी साहस का परिचय दिया गया। उन्होने लोगों को घायलों के लिए खुले हृदय से वस्तुएं दान देने के लिए प्रोत्साहित किया। फ्लाॅरेन्स की प्रेरणा लोग सहायता के लिए आगे आने लगे। आत्मीयता से रात-दिन की सेवा-सुश्रुत, साफ-सफाई आदि की उचित व्यवस्था से घायल जल्दी ठीक होने लगे। वे रात के अंधेरे में लेम्प लेकर रोगियों के पास उनका हालचाल पूछने जाया करती थी। अतः वे रोगियों के बीच ‘लेडी विद दी लैम्प’ (Lady with the Lamp) के नाम से महसूर हो गयी। उस समय जहाँ पहले सौ मे से बयालीस मरीजों सैनिक मृत्यु होती थी, अब उनकी गिनती हजार में बाईस तक पहुंच गयी थी।

फ़्लोरेन्स नाइटिंगेल की प्रसिद्धी दूर-दूर तक फैल गयी। जब 1856 ई. में क्रीमिया की लड़ाई समाप्त होने के बाद वे लंदन पहुंची तो उनके स्वागत में बड़े-बड़े जुलूस निकाले गये।

अत्यधिक काम करने से वे बेहद कमजोर हो गयी थी। डाक्टरों ने आराम करने की सलाह दी, वे डरते थे कि कहीं ज्यादा कमजोरी से फ्लाॅरेन्स मृत्यु न हो जाये। इस पर तो वह कहती थी कि एक दिन तो मुझे मरना ही है, इसलिए काम अधुरा छोड़ना किसी भी तरह उचित नहीं है। वे अस्पतालों में सुधार को अत्यन्त आवश्यक मानती थी, जिसके लिए वह हमेशा से प्रयासरत रही।

फ़्लोरेन्स नाइटिंगेल रोगियों की सेवा में अत्यन्त व्यस्थ थी इसलिए कभी विवाह नहीं किया। उन्होंनेअस्पतालों के सुधार के लिए अपना संघर्ष जारी रखा। वह रात-दिन अस्पतालों को किस तरह और सुधारा जाए जिससे कि घायलों और बीमारों की अच्छी तरह सेवा हो सके और वे जल्दी स्वस्थ लाभ प्राप्त कर सकें, उस विषय पर गहन अध्ययन करती थी। वह अस्पताल व्यवस्था सुधार के लिए विभिन्न सरकारी अधिकारियों से मिलती थी और उनके सामने अपनी संवेदना रखती थी। उसके काम में कैबिनेट मीनिस्टर सिडनी हरबर्ट और प्रसिद्ध कवि आर्थरहड क्लाड ने बहुत सहयोग दिया। सरकार का अस्पतालों में सुधार किये जाने में कोई रुचि न थी परन्तु कड़ी मेहनत के बाद फ्लाॅरेन्स को सफलता मिली और धीरे-धीरे सुधार होने लगा।

फ़्लोरेन्स नाइटिंगेल की सेवाएं केवल सैनिकों तक ही नहीं सीमित थी। उन्होंने नर्सों के लिए एक शिक्षा-संस्था भी खोला और उनके लिए एक कोड-आफ-कन्डक्ट भी बनाया। वह सचमुच आधुनिक नर्स-व्यवस्था की वह जननी थी इसलिए उनके जन्मदिवस को अंतर्राष्ट्रीय नर्सिंग दिवस के रूप में भी मनाया जाता है।

13 अगस्त 1910 को 90 साल की उम्र में दया व सेवा की प्रतिमूर्ति सरल हृदया फ़्लोरेन्स नाइटिंगेल का निधन लंदन में हो गया। आज भले ही वह हमारे बीच नहीं है परन्तु नर्सिंग कार्य को व्यस्थित करने और उसे अत्यन्त सम्मानित कार्य की श्रेणी मे लाने के लिए किया गया उनके योगदान को हमेशा याद किया जाता रहेगा।

Great Personalities  – महान हस्तियाँ


आपको यह Hindi Essay फ़्लोरेन्स नाइटिंगेल | सेवा की प्रतिमूर्ति  Inspirational story of Florence Nightingale in Hindi कैसी लगी, कृप्या कमेंट बाक्स पर साझा करें।

Random Posts

  • raja raghu राजा रघु और कौत्स

    राजा रघु और कौत्स Story of Raja Raghu and Kautsya अयोध्या नरेश रघु (Raja Raghu) के पिता का दिलीप और माता का  नाम सुदक्षिणा था। इनके प्रताप एवं न्याय के […]

  • लौरा वार्ड ओंगले लौरा वार्ड ओंगले success story

    लौरा वार्ड ओंगले College Dropout student success motivational story Success उन्हें मिलती है जो कुछ बड़ा करने का जज्बा रखते हैं तथा अपनी गलतियों से सबक सीखते हैं। यह story है एक […]

  • जैक मा जैक मा (Jack Ma) के 15 सफलता के सूत्र

    जैक मा चीन का सबसे अमीर आदमी है और आधुनिक युग के तकनीकी विशेषज्ञों में से एक है। वे अलीबाबा के संस्थापक हैं, जो दुनिया की सबसे बड़ी ई-कामर्स वेबसाइटों […]

  • sudha chandran सुधा चन्द्रन – यह मेरे सपने हैं

    सुधा चन्द्रन – यह मेरे सपने हैं Inspirational Story of Sudha Chandran (Classical Dancer and Actor) who win the race of success without a leg in Hindi बहुत कम ऐसे लोग […]

One thought on “फ़्लोरेन्स नाइटिंगेल | सेवा की प्रतिमूर्ति

  1. This is really a great article Florence Nightingale and a great read for me. Its my first visit to your blog and i have found it so useful and informative specially this article. This one is great. keep doing awesome!..

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*
*