मतलब का प्यार Hindi Kahani

मतलब का प्यार Matlab Ka Pyar Hindi Kahani

Matlab Ka Pyar hindi kahani

शहर के एक परिवार ने गाय और उसका बछड़ा पाल रखा था। वह उनको रूखा-सूखा चारा खिलाता था तथा देर तक खुला भी नहीं छोड़ता था।

एक दिन उस गाय का बछड़ा बहुत उदास था। वह माँ का दूध भी नहीं पी रहा था। गाय को चिंता हुई। उसने प्यार से बछड़े को चाटते हुए पूछा-‘बेटा! क्या बात है? तुम आज दूध क्यों नहीं पी रहे हो? तुम इतने उदास क्यों हो?’

बछड़े ने सामने वाले घर की तरफ इशारा किया-‘माँ! तुम उस बकरे को तो देखो। वह मुझसे छोटा है। हमेशा सिंग मारने को तैयार रहता है किंतु उसका मालिक उसे बहुत प्यार करता है। वह उसे रोटी अपने हाथों से खिलाता है, हरी-हरी घास देता है। उस बकरे के मालिक ने कितनी प्यारी घंटियाँ उसके गले में बांधी है। देखो! वह बकरा कितना इठलाकर चल रहा है।

बछड़ा आगे बोलता है-‘माँ एक मैं हूँ जिसकी कोई पूछ नहीं। मुझे तुम्हारा दूध भी पेट भर नहीं मिल पाता है। हमारा मालिक तो रोज दुध दुह लेता है। मुझे सिर्फ सूखी घास ही मिलती है। समय पर कोई मुझे पानी तक नहीं पिलाता। मैंने ऐसी कौन-सी गलती की है जिसका यह परिणाम है।’

गाय बोली-‘बेटा! व्यर्थ दुःखी मत हो। यह संसार ऐसा है कि यहाँ जरूरत से ज्यादा सुख और सम्मान मिलना बड़े भय की बात है। यहाँ सिर्फ मतलब से सम्मान मिलता है। अत्यधिक मेहरबानी के पीछे कुछ न कुछ घोर स्वार्थ या कारण छिपा होता है। तुम लालच मत करो और बकरे का सुख-सम्मान देखकर आत्मग्लानी भी मत करो। वह तो बेचारा दया का पात्र है। इसे मारने के लिए ही तगड़ा किया जा रहा है। हमारे लिए तो यह सूखा चारा ही शुभ है।’

फिर एक दिन…

एक सुबह काफी चहलपहल थी। बहुत से लोग घरों से निकल कर पता नहीं कहाँ जा रहे थे। सबके चेहरे में उत्साह था। बकरे को भी खूब सजाया गया था तथा उसके सामने भरपूर बेहतरीन चारा था। बेचारे बछड़े को कोई नहीं पूछ रहा था। वह तो उदास और ललचाई नज़रों से बस बकरे के भोजन को देखे जा रहा था।

पर अचानक……

गाय जब चारा चर कर लौटी, तब उसने देखा कि बछड़ा दीवार से सटा दुबका खड़ा है और डर के मारे काँप रहा है। वह गाय के पास भी नहीं आया।

गाय ने उसे चाटते हुए पूछा-‘बेटा! आज तुझे क्या हो गया है। तू इतना दुखी क्यों है?’

बछड़ा बोला-‘माँ! आज बकरे का सिर काट दिया गया है। उस बेचारे की एक ही चीख निकल पायी। उसके शरीर के भी टुकड़े-टुकड़े कर दिये गये। मैं तो यह सब देखकर बहुत डर गया हूँ।’

गाय ने बछड़े को पुचकारा और बोली-‘मैंने तो तुमसे पहले ही कहा था कि बकरे के लिए यह मतलब का प्यार था। ऐसे प्यार के पीछे मुसीबतें दबे पांव आती हैं। हमारे लिए तो यह रूखा-सूखा भोजन ही अमृत-तुल्य है।’

अतः मित्रों इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि यदि कोई आप पर जरूरत से ज्यादा मेहरबानी दिखाता है तथा आपकी चापलूसी करता फिरता है, तो ऐसे लोगों से सावधानी रखने में ही हमारी भलाई है। न जाने उनके इस तरह के व्यपहार के लिए कौन सा स्वार्थ छिपा हुआ है।

यह हिंदी कहानी भी अवश्य पढ़ें : कछुआ और बंदर


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