सच्ची दोस्ती । डेमन और पीथियस की मित्रता

सच्ची दोस्ती । डेमन और पीथियस की मित्रता
True Friendship | Damon and Pythias story in Hindi

दो घनीष्ठ मित्र थे-डेमन और पीथियस (Damon and Pythias)। उनकी दोस्ती की मिसाल पूरे क्षेत्र में दी जाती थी। एक दिन सिसली के सिरैक्यूज़ नगर के राजा डियोनिसविस ने राजशाही के विरूद्ध साजिश रचने के अपराध में डेमन को मृत्युदण्ड की आज्ञा दी।

डेमन ने राजा से प्रार्थना की-‘एक वर्ष का अवकाश मुझे दें। ग्रीस जाकर अपने परिवार तथा सम्पत्ति का प्रबन्ध करके आ सकूं।’

राजा ने यह कह कर इंकार कर दिया कि वह उसे मूर्ख न समझे तथा छूटने के बाद डेमन कभी भी वापिस नहीं आयेगा।

यह जानकार डेमन का मित्र पीथियस आये आया। उसने कहा कि मैं अपने मित्र की जमानत लेता हूँ। यदि वह वापिस नहीं आया तो उसके स्थान पर मुझे फाँसी पर चढ़ा दिया जाए।

राजा ने इनकी मित्रता को परखना चाहा। उसने पीथियस से कहा-‘यदि डेमन के वापिस ना आने की स्थिति में तुम फाँसी पर चढ़ने को तैयार हो, तो भला मुझे क्या एतराज हो सकता है।’

पीथियस को नजरबंद किया गया। डेमन स्वदेश चला गया। दिन बीतते गये, वर्ष पूरा होने को आया, किंतु डेमन नहीं लौटा।

लोग कहने लगे-‘डेमन कोई मूर्ख है जो अपने प्राण देने आयेगा। अब तो पीथियस के जीवन के कुछ दी दिन बाकी हैं।’

पीथियस भी यही चाहता था कि उसका मित्र वापिस न आये लेकिन उसे पूर्ण विश्वास था कि डेमन लौटने का हरसम्भव प्रयास करेगा। वह सोचता था कि-‘कुछ ऐसी परिस्थित बन जाने की वह वापिस ही न आ सके। मित्र के प्राण बच जायें और मेरे चले जाएं यह मेरे लिए सौभाग्य की बात होगी।’

डेमन अपने सभी दायित्वों को पूर्ण करके समय पर चला। रास्ते में समुद्री तूफान आ गया। उसमें फँसने के कारण वह समुद्र तट पर देरी पहुँचा। अब बस मृत्युदण्ड के कुछ ही दिन शेष रह गये थे। किनारे पहुँचकर उसे आगे जाने के लिए कोई सवारी का साधन नहीं मिला। कई दिनों तक भूखा-प्यासा बेहवास दौड़ता रहा। पैरों में छाले पड़ गये।

पीथियस को प्राणदण्ड की आज्ञा हो चुकी थी। उसे वधस्थल पर पहुंचाया जा चुका था।

दूर से चिल्लाकर कर डेमन ने अपने आने की सूचना देकर जल्लादों को दे दी।

राजा तक डेमन के आने की बात पहुंचा दी गयी। वे उन दोनों मित्रता देखकर दंग रह गये। इस तरह की मैत्री की कल्पना तो उन्होंने सपने में भी नहीं की थी।

राजा ने डेमन को क्षमा कर दिया और स्वयं दोनों का मित्र बन गया।

यह हिंदी कहानी भी पढ़ें: प्यार की डोर


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