सुपात्र को ही दान दें । शिक्षाप्रद पौराणिक कहानी

सुपात्र को ही दान करें । शिक्षाप्रद पौराणिक कहानी

sunhara newla

यह महाभारत काल की पौराणिक कहानी है। युद्ध समाप्त हो गया था। महाराज युधिष्ठिर ने दो अश्वमेघ यज्ञ किये। उन यज्ञों के बाद उन्होने इतना दान किया कि उनकी ख्याती चारो दिशाओं मे फैल गयी। तीसरे यज्ञ के पूर्ण होने पर यज्ञशाला में एक अजीब सा नेवला आ गया जिसका कि आधा शरीर सुनहरा था।

यज्ञभूमि में पहुँच कर नेवला यहाँ-वहाँ लोट-पोट होने लगा। कुछ देर वहाँ इस प्रकार लोट-पोट होने के बाद वह बड़े कर्कश आवाज़ में बोल पड़ा- ‘पाण्डवों! तुम्हारे यज्ञ का पुण्यफल तो कुरुक्षेत्र के एक ब्राह्मण के थोड़े से सत्तू के दान के समान भी नहीं है।’

लोगों को बहुत आश्चर्य हुआ। सब एक-दूसरे की तरफ देखने लगे। एक स्वर में पूछा गया कि तुम कौन हो, कहाँ से आये हो? यज्ञ के अतुलनीय दान की तुलना किसी सामान्य ब्राह्मण के थोड़े से सत्तु के साथ क्यों कर रहे हो ?’

नेवले ने कहा-‘यदि आपको विश्वास न हो तो मैं उस महादानी ब्राह्मण की कथा सुनाता हूँ। आप खुद ही फैसला कर लीजिए।

कुरुक्षेत्र के एक गाँव में धर्मात्मा ब्राह्मण रहते थे। उनके परिवार में उनकी पत्नी, पुत्र और पुत्रवधु थी। वे पूजा-पाठ और कथा करते थे और उसी से अपनी तथा परिवार की जीविका चलाते थे।

एक बार उस क्षेत्र में भयंकर अकाल पड गया। ब्राह्मण के पास जमा किया हुआ अन्न तो था नहीं और उन्हें कहीं से कुछ प्राप्त भी नहीं हो रहा था। कई दिनों भूखे रहने के बाद उन्होंने बड़े परिश्रम से खेतों में गिरे जौ के दानों को एकत्रित किया और उसका सत्तू बना लिया।

बनाये गए सत्तू के चार भाग करके परिवार के सभी सदस्यों में बराबर बाँट दिया गया। पूरा परिवार भोजन करने के लिए बैठा ही था कि कहीं से एक भूखा व्यक्ति उनके द्वार पर भोजन की याचना करते हुए आ गया।

ब्राह्मण भोजन छोड़ कर उठ खड़े हुए। उन्होंने बड़े आदर के साथ आतिथि को प्रणाम किया और अपनी कुटी में ले आये। आदर-सत्कार के बाद ब्राह्मण ने अपने भाग का सत्तू नम्रतापूर्वक उन्हें परोसा।

अतिथि ने सत्तू खा लिया, किन्तु उस थोड़े से सत्तू से उसका पेट नहीं भरा। ब्राह्मण चिन्तित हो गये कि अतिथि तो भूखे रह जायेंगे। ब्राह्मण की पत्नी ने पति के भाव जानकर अपने भाग का सत्तू अतिथि को प्रदान कर दिया। लेकिन उस सत्तू को खाकर भी अतिथि तृप्त नहीं हुए। बाद में ब्राह्मण के पुत्र- पुत्रवधू ने भी अपने भाग का सत्तू आग्रह करके अतिथि को प्रदान किया।

उन ब्राह्मण परिवार द्वारा आदर-सत्कार देखकर अतिथि बहुत प्रसन्न हुए। वे उनकी उदारता तथा अतिथ्य की प्रशंसा करते हुए बोले-‘ब्राह्मण! आप धन्य हैं। आपका सदैव कल्याण हो।’

नेवले ने आगे कहा-‘अतिथि के जाने के बाद मैं बिल से निकला और ब्राह्मण के बर्तन धोने के स्थान पर लोटने लगा। सत्तू के कुछ कण भी वहीं पड़े थे। उन कणों के लगने से मेरा आधा शरीर सुनहरा हो गया। उसी समय से शेष आधा शरीर भी एक समान बनाने के लिए मैं तपोवनों, यज्ञस्थलों में घूमता रहता हूँ, किंतु कहीं भी मेरी इच्छा पूरी नहीं हुई। आपकी यज्ञभूमि से भी कोई परिणाम हासिल नही हुआ।’

उसने आगे कहा-युधिष्ठिर तुम्हारे यज्ञ असंख्य लोगों ने भोजन किया और उस गरीब ब्राह्मण परिवार ने केवल एक ही भूखे को भोजन दिया था लेकिन उसमे त्याग था। भूखे को भोजन की आवश्यकता थी। परिवार ने खुद भूखे रहकर अपने से अधिक जरूरतमंद समझ कर उस गरीब को भोजन दिया था। अतः युधष्ठिर! दान की महत्ता तो एक सुपात्र को देने से है।

इतना कहकर वह नेवला वहाँ से किसी सच्चे दानी की खोज में आगे बढ़ गया।

अब हम इस शिक्षाप्रद पौराणिक कहानी को वर्तमान सन्दर्भ में लेते हैं। लोग दान का सार्वजनिक प्रर्दशन करते हैं। धार्मिक पूजा स्थलों में दान का अम्बार लग जाता है। आजकल विभिन्न उत्सवों और कार्यक्रमों में बड़े-बड़े भंडारें करने का चलन है जिसमें आडम्बर कीअधिक मात्रा होती है, मूल उद्देश्य कहीं खो सा जाता है। कभी एक भी सुपात्र तक वह दान पहुंच पता होगा इसमें सन्देह है। इस तरह के भाण्डारों के स्थान पर यदि उस धन को सरकारी अस्पतालों के बाहर रात्री गुजारते रोगी के शुभचिन्तकों को सहायतार्थ दिया जाए अथवा रात के अंधेरे में फुटपाथों के किनारे रात गुजर करने वाले तथा ठण्ड से सिकुड़ते लोगों को कुछ कपड़े-लत्ते तथा भोजन प्रदान किया जाए तो इस महादान से ईश्वर अति कृपा बनेगी तथा दानी के मन को भी असीम आनन्द प्राप्त होगा क्योंकि सुपात्र को दिया गया दान ही वास्तविक दान है।

Also Read : साधु और वेश्या। दूसरों का दोष मत देखो


आपको यह कहानी सुपात्र को ही दान दें । शिक्षाप्रद पौराणिक कहानी seek dete pauranik kahani  कैसी लगी, कृप्या कमेंट बाक्स पर साझा करें।

आपके पास यदि Hindi में कोई पौराणिक कहानी, article है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ kadamtaal@gmail.com पर E-mail करें. हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ प्रकाशित करेंगे|

Random Posts

  • valentine day वेलेंटाइन डे का सच

    वेलेंटाइन डे का सच – True Story of Valentine Day in Hindi प्रेम की अभिव्यक्ति का इस दिवस का इतिहास वास्तव में romantic तो बिल्कुल भी नहीं है। यह कहानी है […]

  • जीवक जीवक कौमारभृत्य – Real Father of Medical Science

    जीवक कौमारभृत्य – Real Father of Medical Science बहुत प्राचीन समय की बात है। मगध में उस समय सम्राट बिंबिसार राज करते थे। मगध की राजधानी राजगृह थी। उनके राज्य […]

  • Matlab Ka Pyar hindi kahani मतलब का प्यार Hindi Kahani

    मतलब का प्यार Matlab Ka Pyar Hindi Kahani शहर के एक परिवार ने गाय और उसका बछड़ा पाल रखा था। वह उनको रूखा-सूखा चारा खिलाता था तथा देर तक खुला […]

  • muslim youth save cow मुस्लिम युवक की युक्ति से गाय की प्राण-रक्षा

    मुस्लिम युवक की युक्ति से गाय की प्राण-रक्षा Muslim youth save cow in Hindi मुसलमान युवक (muslim youth) और गाय (cow) के प्रति उसकी दया की यह सच्ची घटना जुलाई सन् […]

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*
*