इन्द्राणी शची और नहुष का घमण्ड

इन्द्राणी शची और नहुष का घमण्ड

इन्द्राणी शची और नहुष का घमण्ड

इन्द्र की पत्नी शची का जन्म दानवकुल में हुआ था। उनके पिता का नाम पुलोमा था। बचपन में शची ने भगवान शंकर को प्रसन्न करने के लिए भारी तपस्या की थी और उन्हीं के वरदान से वे देवराज की प्रियतम पत्नी तथा स्वर्ग लोक की रानी हुई।

वृत्रासुर त्वष्टा ऋषि का यज्ञ-पुत्र था। देवराज इन्द्र ने वृत्रासुर का वध कर दिया। इन्द्र पर ब्रह्महत्या का दोष लगा। वह जान बचाने के लिए मानसरोवर के जल में जा छिप गये जिससे कि वे इस बीच दोष से छुटकारा पाने का कुछ उपाय कर सकें। उनको इसी स्थिति में बहुत समय हो गया।

इन्द्र से विहीन स्वर्ग में अराजकता फैल गयी। अनेक प्रकार के संकट उत्पन्न होने लगे। देवताओं को बड़ी चिन्ता हुई। उस समय भूतल में परम पराक्रमी और धर्मात्मा राजा नहुष राज करते थे। हर प्रकार से विचार करने के बाद राजा नहुप को बुलाया गया और वास्तविक इन्द्र न मिलने तक अस्थायी रूप से इन्द्र के पद पर बैठा दिया गया।

इन्द्र पद क्या मिला, नहुष पर तो जैसे राजमद ही हावी हो गया। वे विषय भोगों से आसक्त हो गये तथा उनमें अनेकानेक अवगुण भी समाहित हो गये।

नहुष ने इन्द्र की पत्नी शची के रूप-सौंर्दय की चर्चा सुन रखी थी। वे शची को प्राप्त करने के इच्छुक हो गये।
शची को जैसे ही इसका पता चला तो वह गुरू बृहस्पति जी की शरण में चली गयी। यह जानकर की शची बृहस्पति जी की शरण में है, नहुष को अत्यन्त क्रोध आया।

देवताओं ने नहुष को शांत करने का पुरजोर प्रयास किया। ‘महाराज! आप क्रोधित न हों। आप तीनों लोक के स्वामी हैं आप जैसे राजा भी यदि अधर्म का आचरण करेगा तो निश्चित ही प्रजा का नाश हो जायेगा। इसलिए आप पाप विचार छोड़ दीजिए।’

कामान्ध नाहुष पर इस उपदेश का कोई प्रभाव नहीं पड़ते देख देवता विपत्ति का हल निकालने के लिए गुरु बृहस्पति के आवास गये।

बृहस्पति ने देवताओं के साथ परामर्श किया तथा एक उपाय के साथ शची को लेकर सब-के-सब नहुष के पास गये।

शची ने नहुष से कहा-‘देवश्वर! आप कुछ काल तक प्रतिक्षा करें। तबतक मैं इस बात का निर्णय कर लेती हूँ कि इन्द्र जीवित हैं या नहीं। मेरे मन में संशय बना हुआ है। अतः इसका निर्णय करते ही मैं आपके समक्ष उपस्थित हो जाऊँगी। तब तक के लिए आप मुझे क्षमा करें।’

इन्द्राणी के मुख से ऐसा वचन सुनते ही नहुष अत्यन्त प्रसन्न हुआ। उसने शची को कुछ समय का वक्त दे दिया।

तत्पश्चात सारे देवता भगवना विष्णु की शरण में गये। भगवान ने इन्द्र की दुदर्शा से छूटने का उपाय बताया। उन्होंने इन्द्र के छुपे होने के स्थान का भी देवताओं को संकेत दिए।

बृहस्पति और देवता उस स्थान पर गये, जहाँ इन्द्र छिपे थे और पाप से मुक्ति के विधिपूर्वक उपाय किये गये। इधर इन्द्राणी ने भी बृहस्पति जी से भुवनेश्वरी देवी के मन्त्र की दीक्षा लेकर उनकी अराधना आरम्भ कर दी।

देवी माँ ने इन्द्राणी को दर्शन दिये और वर मांगने के लिए कहा।

शची ने वर मांगा-‘माता मैं पतिदेव का दर्शन करना चाहती हूँ तथा नहुष की ओर से भी भय से मुक्त होना चाहती हूँ।’

देवी ने कामनायें पूर्ण होने का आशिर्वाद दिया और शची को इन्द्र के पास पहुंचा दिया।

पति को पाकर शची अत्यन्त प्रसन्न हुई। पति के दर्शन पाने के लिए वह कितने ही वर्षों से तरस रही थी।

शची ने पति के गैर मौजूदगी में हुआ सारा वृत्तान्त सिलसिलेवार सुना दिया।

इन्द्र ने शची को उसकी बुद्धि और सामथ्र्य की याद दिलायी तथा एक युक्ति सुझा कर इन्द्रलोक वापिस भेज दिया।

नहुष शची को देखकर अतिप्रसन्न हुआ। उसने कहा-‘इन्द्राणी! तुम्हारा स्वागत है। तुमने अपने वचन का पालन किया है। अब तुम मुझे स्वीकार करो।’

शची बोली-‘राजन्! मेरे मन में एक अभिलाषा है, आप उसे पूर्ण करें। मैं चाहती हूँ आप सप्तर्षियों की सवारी करके मुझे लेने मेरे भवन तक आयें।’

नहुष ने कहा-‘इन्द्राणी! तुम्हारी इच्छा तो अतिउत्तम है। ऐसी सवारी तो आज किसी ने भी नहीं की होगी। मैं यह इच्छा अवश्य पूर्ण करूंगा। अब सप्तर्षि मेरे वाहन होंगे।’

यों कह कर नहुष ने सप्तर्षियों को बुलाया और उनकी पालकी पर बैठ कर इन्द्राणी के भवन की ओर प्रस्थान किया। बेचारे ऋिषियों ने ऐसे तो कभी किया नहीं था अतः उनकी चाल बेहद धीमी थी। उस समय नहुष इतनी जल्दीबाजी में था कि तेज चलाने के लिए वह महर्षि अगस्त्य को कोड़े से पीटने लगा। नहुष के अत्यन्त अमर्यादित होने पर क्षमाशील महर्षि भी क्रोधित हो गये। उन्होंने ने नहुष सर्प योनी में चले जाने का शाप दे दिया।’

महर्षि द्वारा शाप मिलते ही नहुष सर्प बन गया और सीधे स्वर्ग से धरती पर आ गिरा।

इस तरह शची ने अपने धैर्य और साहसपूर्णता से अत्यन्त विकट परिस्थिति सामना करके सतीत्व की रक्षा की तथा पति को भी पुनः स्वर्ग के सिंहासन पर प्रतिष्ठित किया।

पूरी लिस्ट: पौराणिक कहानियाँ – Mythological stories


आपको mythological story इन्द्राणी शची और नहुष का घमण्ड – Indrani shachi aur nahusha ka ghamand  कैसी लगी, कृप्या कमेंट बाक्स पर साझा करें।

Random Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*
*