होनी को कोई नहीं टाल सकता | Real-life incidence

होनी को कोई नहीं टाल सकता | Real-life incidence

hone ko koi nahi taal sakta

काफी पुरानी  बात है। अप्रैल 89 का समय था , मैं अपने मित्र से मिलने रतलाम गया था। उनके यहाँ उस समय मकान के रिनोवेशन का कार्य चल रहा था। वे स्वयं ही अपनी देख-रेख में मजदूरों को लेकर मकान बनवा रहे थे। निर्माण स्थल पर हमने एक लड़के दीपू को देखा। दीपू जब मिट्टी उठाने आता तो पत्थरों के बीच से एक साँप फन उठाकर उसकी ओर देखता। आश्चर्य तब हुआ जब अन्य मजदूरों के आने पर साँप पत्थरों के बीच छिप जाता था।

ऐसे कई बार देखकर तथा भावी आशंका से काँप कर हमने उस लड़के को घर जाने के लिए कह दिया। वह लड़का घर जाना ही नहीं चाहता था कि कहीं उसकी उस दिन की मजदूरी न मारी जाये। हमने उसे पूरा पैसा देकर वापिस लौटा दिया।

उस लड़के के जाने के बाद मजदूरों को वह साँप फिर दिखाई दिया। उन्होने अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बेलचे से उस सांप के दो टुकड़े कर दिये।

उसी समय आकाश में उड़ती चील ने साँप को देख लिया और वह मुँह वाला हिस्सा उठाकर उड़ गयी। लेकिन होनी बलवान होती है। दैवयोग से घर लौटते हुए उस लड़के के ऊपर साँप का मुँह वाला वह भाग चील से छूट गया। साँप ने उस लड़के को काट लिया। लड़के को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया। बड़ी मुश्किल से उसकी जान बच पायी।

जब इस घटना का वहाँ खड़े सभी मजदूरों को पता चला तो सभी आश्चर्यचकित रह गये तथा एक-सुर में कहने लगे कि ‘होनी होकर ही रहती है।’

सच ही है-होनी को कोई नहीं टाल सकता।

प्रेषक: सुभम पिप्रोत्तर, जामनगर, गुजरात

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