सीता को रिझाने के लिए रावण द्वारा राम का रूपधारण

सीता को रिझाने के लिए रावण द्वारा राम का रूपधारण – short story of Ravan Kumbhkaran samvad in Hindi

राम जी इतने अधिक शुद्ध हैं कि जो राम का स्मरण भर करता है, वह भी शुद्ध हो जाता है। श्रीएकनाथ महाराज की भावार्थ-रामायण में पैंतालीस हजार मराठी पद हैं। उसमें रावण द्वारा राम का रूप धरने से होने वाली स्थिति की रावण-कुम्भकरण (Ravan Kumbhkaran Samvad) संवाद कथा इस प्रकार है –

लंका युद्ध चल रहा था। रावण के बड़े-बड़े महारथी युद्ध में मारे जा चुके थे। कुम्भकरण सोया हुआ था, तब युद्ध करने के लिए रावण ने उसे जगाया। कुम्भकरण को खूब शराब पिलायी गयी और मांसाहारी भोजन कराया गया।

ravan kumbhkaran

कुम्भकरण रावण से मिलने आया। उसने रावण से पूछा-‘मुझे क्यों जगाया है?’

रावण ने कहा-‘राम के साथ युद्ध करने के लिए तुम्हें जगाया है।’

कुम्भकरण ने पूछा-‘राम के साथ युद्ध क्यों हो रहा है?’

रावण-‘सीता के लिए युद्ध हो रहा है।’

कुम्भकरण ने रावण को समझाया कि ‘लंका में अनेकानेक देव-गन्धर्व-कन्याएं हैं। फिर भी सीता का अपहरण करने क्यों गये? तुमने घनघौर पाप किया है। तुम सीता को क्यों लाये हो?’

रावण ने कहा-‘लंका में बहुत-सी देव-गन्धर्व कन्याएं तो हैं, परन्तु सीता जैसी एक भी नहीं है। सीता का रूप अतुलनिय है। इसकी तुलना में आ सके, ऐसी कोई नहीं है। इस कारण मैं सीता को लेकर आया हूँ।’

तामसी आहार और मदिरा के कारण कुम्भकरण की बुद्धि में तमोगुण का प्रभाव होने लगा था।

कुम्भकरण ने पूछा-‘तुम सीता को लेकर आये हो तो तुम्हारी इच्छा पूरी हुई कि नहीं।’

रावण ने कहा-‘सीता महान पतिवत्रा है। वह आंख ऊँची करके किसी के सामने देखती तक नहीं।’

तुम तो अनेक रूप धारण करने मे सक्षम हो फिर तुमने राम का रूप धरकर सीता को वश में करने का प्रयास क्यों नहीं किया?-कुम्भकरण ने पूछा।

रावण ने जवाब दिया-‘कुम्भकरण मैने करके देखा है परन्तु मैं क्या कहूं। जब मैं रूप धारण करने के लिए राम के स्वरूप का ध्यान करने लगता हूँ, तब शनैः शनैः मेरे हृदय से सारे विचार ही पलट जाते हैं।’

मायावी रावण को कामरूप होने की शक्ति है, पर जब भी वह राम स्वरूप का ध्यान करता है, तब अन्य स्त्री के प्रति उसके मन में मातृ भाव हो जाता है। परस्त्री में कामभाव रखने वाले राक्षस चरित्र रावण का मन भी पवित्र हो जाता है।

यही है श्रीराम का आदर्श और प्रभाव। राम का नाम लेने और रूप के विचार मात्र से मन के भाव शुद्ध हो जाते हैं।

पूरी लिस्ट: पौराणिक कहानियाँ – Mythological stories


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