ज्यादा टोका-टाकी बच्चों की बरबादी – parent mistake

क्या आप जानते हैं किसी बच्चे के उज्जवल भविष्य (future) के लिए सबसे बड़ी बाधा क्या होता है? जरा विचार कीजिए।

क्या वह माँ-बाप की गरीबी (parent poverty) होती है जिसके कारण बच्चे को अच्छी शिक्षा नहीं मिल पाती या बहुत अमीरी (parent prosperity) होती है जिससे कि बच्चे शुरू से ही भोग-विलास में डूब कर अपना भविष्य (future) बरबाद कर देते हैं। इनमें से कोई भी कारण नहीं है क्योंकि हम देखते हैं कि गरीब का बेटा आई.ए.एस. आॅफिसर बन जाता है तथा बड़े कारोबारी (businessman) के बच्चे भी अपने पिता के कार्य को चार-गुना बढ़ा कर उनको सम्मानित करते हैं।parent mistake

दोस्तों कई परिवारों में देखा जाता है कि माँ-बाप अपने बच्चों को बात-बात पर टोकते रहते हैं। वे नासमझ माँ-बाप यह नहीं जानते कि इस तरह टोकना वास्तव में बच्चे के आत्मविश्वास (self confidence) में चोट करना होता है। माँ-बाप (parent) की यह हरकत बच्चों के अछूते कोमल मन को भयभीत (afraid) कर मस्तिष्क में भय की जड़ें मजबूत कर देती है।

Biggest parent mistake which hamper child future drastically

बच्चे को बात-बात पर डांटना या टोकना नहीं चाहिए। मसलन, तुम ढंग से हंसा करो, ज्यादा न बोला करो, चिकड़-चिकड़ मत किया करो, चुप रहना सीखो, चलने की तमीज सीखो, बड़ों के बीच में न बोला करो, जहां चार आदमी खड़े हैं उनके बीच मे न बोला करो, आदि बहुत सारे ऐसे वाक्य हैं जो बच्चों के मन में हमेशा के लिए बहुत बुरा प्रभाव डालते हैं। बार-बार इन सब बातों को सुनकर उसका आत्मविश्वास (self confidence) कम हो जाता है और इसलिए वह अपने को अन्य लोगों से दूर रहकर एकान्त चित्त सा रहने लगता है। वह अपने परिजनों से आंखे चुराने लगता है और उसके हृदय में स्थायी भय व्यप्त होता जाता है, वह निरन्तर भयभीत होता बालक लोगों से सम्पर्क बनाने में कतराता है, डरता है।

बचपन का वही ‘हौआ’ उसके अछूते मन पर इस तरह पकड़ बना लेता है कि बड़े होकर भी वह इस विशाल हौवे से पीछा छुड़ा नहीं पाता है। यह बच्चा आगे चलकर क्रोधी या अभिमानी बन जाता है या फिर दब्बू बन जाता है। उसके मन की गहराईयों में व्यप्त भय उसे झूठ बोलना सिखाता है । अपने को निर्दोष बताकर दूसरों के ऊपर दोषारोपण करना उसकी आदत का हिस्सा बन जाता है। वह समाज-मित्रों में अच्छी तरह से घुल-मिल नहीं पाता और प्रगति की राह में बाकी समकक्षों से पिछड़ता चला जाता है।

वह बेचारा तो दुर्बल भावना लिये केवल असफलता (failure) की डगर पर भटकता हुआ ही दिखलाई देगा। फिर तो ऐसा व्यक्ति जीवन में कभी भी कोई बड़ा कार्य कर ही नहीं सकता-यह अटल सत्य है।

आपको क्या करना चाहिए? What you have to do?

आज से दस साल बाद बच्चा क्या बनेगा यह भी पूरी तरह उसके वर्तमान माहौल पर निर्भर करता है। यह उसके उस दिमागी भोजन पर निर्भर करता है जो आप उसको खिलाएंगे।

बच्चे को सम्मान दें – Give respect to child

आपको चाहिए कि छोटी-छोटी बात पर गुस्सा न करें, हर बात पर टोका-टाकी न करें। बच्चे को साथ बैठा कर बातचीत किया करें। घर में मेहमान आयें तो बच्चों को दूसरे कमरे में एकदम से न भेजें। मेहमानों से बच्चों का परिचय करायें तथा कुछ देर बच्चों को साथ भी बैठा सकते हैं।

आप बच्चे से मित्रवत बातचीत करें। उसकी रूचियों और दोस्तों के बारे में जानें और उनके बारे में चर्चा करें। उसके दोस्त घर आये तो उनके साथ प्रेमपूर्वक व्यवहार करें, उनके साथ कुछ देर बैठ कर बातचीत करें। हर वक्त उस पर निगाह न रखें न उसके बारे में बार-बार आस पड़ोस में पूछताछ करते फिरा करें। अगर बच्चे से कोई गलती हो जाती है या उसकी झूठ पकड़ी जाती है तो उसे सबसे सामने न डांटें। उससे एकान्त में बात करें और समझायें।

दूसरों के साथ अपने बच्चे की तुलना कदापी न करें – Don’t compare your child with others

बहुत से माता-पिता की यह आदत होती है कि वे हमेशा अपने बच्चों की तुलना रिश्तेदारो या मित्रों के बच्चों के साथ करते हैं। इस प्रकार की तुलना आपको बिल्कुल बंद कर देनी चाहिए। इसमें कोई शक नहीं कि आप अपने बच्चों के हितेषी हैं पर यह भी सच है कि हर बच्चे में विशेष गुण होते हैं आपका बच्चा भी दूसरे बच्चों को कई बातों में श्रेष्ठ होगा। इसलिए अपने बच्चों की नाकारात्मक तुलना उसे पीड़ित करेगी तथा उसके मन में प्रतिकुल प्रभाव (negative effect) पड़ेगा और उसमें हीनभावना (inferiority) आयेगी।

बच्चे को उसकी रूचि के हिसाब से प्रोत्साहित करें – Motivate your child with their interest

जिस चीज में बच्चे की रूचि (interest) हो उसमें उसको प्रोत्साहित (motivate) करें। उदाहरण के लिए यदि उसकी रूचि (interest) डाक्टरी में है तो उसको उस क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए क्या किया जाना चाहिए, समझायें। इसी प्रकार यदि आपका बच्चा खिलाड़ी बनाना चाहता है तो उसे प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित (motivate) करें।

उसके काम की प्रशंसा करें – Appreciate your child’s work

बच्चे को प्यार के साथ आपके प्रशंसा की भी ललक रहती है। अच्छी राईटिंग बनाये, जिस दिन लगन से देर तक पढ़ाई करें, स्कूल में कोई विशेष कार्य करे तो उसकी प्रशंसा में बिल्कुल कंजूसी न बरतें और उस दिन उसको कुछ अच्छी चीज दें। जैसे कि चोकलेट खरीदकर दे दो या कहीं घुमाने का वायदा करो, आदि आदि।

कभी बच्चों में भेदभाव न करें – Don’t discriminate 

अगर आपके दो या दो से ज्यादा बच्चे हैं तो सभी को सामान प्यार दें, एक समान देखभाल करें और सभी के लिए एक जैसा व्यवहार करें। बच्चों की आपस में तुलना (compare) तो गलती से भी न करें।

देखिए हर बच्चा अपने आसपास के माहौल से सीखता है और उसके मन में वही व्यवहार (behviour) रहता है जो उसके साथ किया जाता है तो आप भी अपने बच्चे के साथ ऐसा व्यवहार करें और माहौल दें जहाँ सभी एक दुसरे को सम्मान देते हो, इससे बच्चा भी अच्छे व्यवहार के लिए प्रेरित होगा, उसका आत्मविश्वास (self confidence) बढ़ेगा और वह भविष्य (future) में अच्छी तरक्की करके माता-पिता का गौरव बनेगा तथा उनका सिर हमेशा ऊँचा रखेगा।

कदमताल पर व्यक्तित्व विकास से सम्बन्धित लेख


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8 thoughts on “ज्यादा टोका-टाकी बच्चों की बरबादी – parent mistake

  1. बेहतरीन post . बिल्कुल सही बात आपने कही है । बच्चे को बच्चा समझकर सभी टोकते रहते है लेकिन हमे यह नही भूलना चाहिए कि बच्चों मे ego भी बहुत होता है । आप के post से बच्चों को समझने मे मदद मिलेगी । धन्यवाद ।

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