सच की जीत – Sadhu ki kahani

सच की जीत – Sadhu ki kahani

यह Hindi story एक गांव में आश्रय लेने वाले self respected sadhu की है जिसके good moral character और habits के कारण पूरा गाँव उनका respect और सेवा करता था। अचानक एक दिन स्थिति बदल गयी। सारे गाँव के लोग उस sadhu पर टूट पड़े। उन्होंने कुटी में आग लगा दी, उसका सामान फेंक दिया। उसे गालियाँ (abusing) देते हुए उसके ऊपर पत्थर फेंकने लगे।

baba

साधु ने सहज भाव से पूछा-‘ऐसी क्या बात है, जो आप लोग मुझ पर इतना गुस्सा (angry) हो गये हो!’

लोगों ने उसके सामने एक नवजात शिशु को रखते हुए कहा-

‘यह है तुम्हारी करामात! गाँव की कमलावती नामक लड़की ने इसे जन्मा है। उसका कहना है कि यह तुम्हारा बेटा है।’

हम लोगों से बड़ी भूल हुई जो तुम्हें गाँव में ठहराया, सम्मान दिया तथा तुम्हारी सेवा की। हम नहीं जानते थे कि तुम ऐसे characterless हो।

‘जब आप लोग कहते हैं, तो मैं characterless ही हूँ।’ साधु ने रोते हए बच्चे को उठाकर छाती से लगाते हुए सहज भाव से उत्तर दिया।

लोग साधु का उत्तर सुनकर और भी उत्तेजित हुए। उसे और अधिक गालियाँ देने लगे और धिक्कारते हुए अपने-अपने घरों को लौट आये।

दोपहर को वह sadhu बच्चे को लेकर गाँव में भिक्षा के लिए निकला तो लड़कों ने उसे घेर लिया। कोई गाली देने लगा, कोई पत्थर फेंकने लगा। वह बच्चे को पत्थरों से बचाता हुआ तथा स्वंय पत्थर खाता हुआ घर-घर घूमने लगया। लोग उसे देखकर दरवाजे बंद कर लेते, भिक्षा के बदले गालियां देते। वह सारे गांव में भटका, परंतु भिक्षा के नाम पर किसी ने उसे एक टुकड़ा भी नहीं दिया।

अंत में वह उस घर के सामने पहुँचा जिस घर की लड़की का वह बच्चा था। उसने आवाज लगायी-

‘मेरा अपराध हो सकता है, इसलिए मुझे रोटी न दें, परंतु इस नवजात, निर्दोष शिशु का तो कोई दोष नहीं है, इसे दूध तो मिल जाए।’

Sadhu की यह बात सुनकर उस लड़की के अंदर सोयी माँ की ममता (motherhood) जाग पड़ी। उसका वात्सल्य उमड़ पड़ा। वह अपने पिता के सामने रोने लगी-

‘पिताजी! मुझसे भूल हो गयी। मैंने झूठे ही उस sadhu का नाम लिया था, बेटे का बाप तो दूसरा है। उसे बचाने के लिए ही मैंने साधु का नाम लिया था। मैं नहीं जानती थी कि बात यहां तक पहुंच जाएगी। मैं तो यही समझती रही कि आप साधु को गालियाँ देकर, बुरा-भला कहकर लौट आयेंगे। अब मुझे क्षमा करें, मेरा बच्चा मुझ दिला दें।’

बेटी की बातें सुनकर पिता स्तब्ध रह गया। वह साधु के पास आकर उसके पैरों पर गिर पड़ा। उसके हाथों से बालक को माँगते हुए वह कहने लगा-

‘क्षमा करें, महाराज! हमसे बड़ी भूल हो गयी है। इस बालक को कृपा करके मुझे दे दें और हमारे अपराधों के लिये हमें क्षमा करें।’

‘क्या बात है?’ मेरे बेटे को मुझसे क्यों छीनते हो? साधु ने कहा।

‘यह बेटा आपका नहीं, किसी अन्य का है।’

‘बालक मेरा नहीं है! क्या कहते हो? सुबह तो तुम सभी कहते थे कि यह मेरा ही है।’

‘महाराज! मेरी लड़की ने झूठ कहा था। अब वह सच कह रही है। यह आपका नहीं, दूसरे का है।’

तब तक गाँव के बहुत से लोग एकत्र हो चुके थे। वे साधु से कहने लगे- ‘महाराज जी! आपको तो उसी समय कह देना चाहिए था कि यह मेरा लड़का नहीं है।’

‘बच्चा मेरा है या दूसरे का, इससे क्या फर्क पड़ता है। किसी न किसी का तो है ही। फिर आप लोग मेरी झोपड़ी जला चुके थे, मेरा सामान फेंक चुके थे, अगर मैं कहता कि यह लड़का मेरा नहीं है, तो आप दूसरी झोपड़ी जलाते, दूसरे आदमी का सामान फेंकते, दूसरे आदमी को गालियाँ देते। मैंने सोचा कि जब आप सब कहते हैं तो मैं क्यों इन्कार करूं? क्यों दूसरे को मुसीबत में डालू? फिर वह भी तो उतना अपराधी (culprit) नहीं है, जितना आप समझते हैं। यदि वह पूर्ण अपराधी (culprit) होता तो आपकी लड़की (girl) उसके बचाने के लिए मेरा नाम न लेती। वह उतना ही अपराधी (culprit) है जितनी आपकी बेटी।’

‘महाराज! आपको अपने सम्मान (respect) की तो चिन्ता करनी थी।’ किसी ने कहा।

साधु ने शान्तभाव से उत्तर दिया।-

‘जिस दिन मुझे यह ज्ञात हुआ कि संसार की सभी घटनाएँ बस सिर्फ सपना है-अस्थायी है, तबसे मेरे लिये respect और disrespect बराबर हो गये हैं। दूसरे लोग हमें क्या कहते हैं, इसका कोई मूल्य नहीं; मूल्य इस बात का है कि हम क्या हैं? हीरे को यदि कोई पत्थर कह दे तो वह पत्थर नहीं हो जाएगा।

अतः आवश्यकता गुणों (character) को बढ़ाने की है, लोगों को रिझाने की नहीं।

यह सुनकर लोग साधु के self respect की इस सीख के सामने नतमस्तक हो गये।

Also Read : भारतीय चरित्र Indian’s Character in Hindi


आपको यह real life inspirational story सच की जीत – Hindi Story  कैसी लगी, कृप्या कमेंट बाक्स पर साझा करें।

आपके पास यदि Hindi में कोई story article है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ kadamtaal@gmail.com पर E-mail करें. हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ प्रकाशित करेंगे|

Random Posts

  • motivational stories in hindi सभ्यता की कसौटी

    सभ्यता की कसौटी criteria of civilization, motivational sort story of Swami Vivekananda in Hindi स्वामी विवेकानन्द जब अमेरिका गये थे तो एक दिन वे गेरुए वस्त्र में एक सड़क से गुजर […]

  • business क्या आप कोई व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं?

    क्या आप कोई व्यवसाय (business) शुरू करना चाहते हैं? Business शुरू करना आसान है लेकिन हर कोई customers का मजबूत बेस तैयार नहीं कर पाता। व्यवसाय की सफलता का राज marketing में […]

  • लालच imandar balak ईमानदारी का फल

    ईमानदारी का फल किसी अमीर के घर में एक दिन सोफासेट ठीक करने के लिए एक कारपेन्टर को बुलाया गया। उसकी उम्र 16 साल के करीब रही होगी। वह कार्य […]

  • hone ko koi nahi taal sakta होनी को कोई नहीं टाल सकता | Real-life incidence

    होनी को कोई नहीं टाल सकता | Real-life incidence काफी पुरानी  बात है। अप्रैल 89 का समय था , मैं अपने मित्र से मिलने रतलाम गया था। उनके यहाँ उस […]

One thought on “सच की जीत – Sadhu ki kahani

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*
*