आखिर हम बार-बार हारते क्यों है?

आखिर हम बार-बार हारते क्यों है? Why we defeat in Hindi? 

defeat

हमारे जीवन में असफलता (defeat) का मुख्य कारण क्या है? कड़ी मेहनत के बावजूद हम अक्सर हार क्यों जाते हैं अर्थात् कड़ी मेहनत के बावजूद भी असफलता का क्या कारण है? सफलता के लिए क्या जरूरी है? हम अक्सर अपने रोजगार के विकास को सही दिशा क्यों नहीं दे पाते हैं? इस निराशाजनक स्थिति से कैसे निजाद पायें तथा नकारात्मकता की स्थिति से कैसे बचें?

हम इन प्रश्नों के उत्तर दो आम घटनाओं का विश्लेषण करने पर निकालने का प्रयास करते हैं।

अपने साथ घटित एक घटना को आपके साथ साझी कर रहा हूँ, जिसने मुझे सोचने को मजबूर कर दिया कि hardworking, motivation, aim, target, honesty होने पर भी हम अक्सर असफल क्यों हो जाते हैं और अपने भाग्य को कोसते हैं।

मैं अपने बेग की चेन को ठीक कराना चाह रहा था जो कि कुछ-ही दिन पहले खराब हो गयी थी। एक चेन ठीक करने वाला अक्सर हमारे घर के सामने से आवाज देता हुआ निकलता है। आवाज आयी ‘चेन ठीक करवा लो-’ मैं तेजी से दरवाजे पर गया तो देखता हूँ कि वह चेन वाला अभी भी आवाज देते-देते तेजी से काफी आगे निकल रहा था। मैं बस उसे जाते हुए देख रहा था। मैंने शाम को बाजार जाकर चेन ठीक करा ली।

हम इस विषय पर विचार करें तो पता चलता है कि:-

  • चेन वाला अपने काम के प्रति बहुत उत्साही (Motivated) है।
  • वह बहुत ही मेहनती (Hardworking) है, तभी तो वह तेजी दिखा रहा है।
  • चेन वाले के सामने सम्भवतः एक target है कि उसे आज ज्यादा क्षेत्र कवर करना है।
  • उसका एक aim भी होगा कि आज ज्यादा पैसे कमाऊँगा।
  • खैर ईमानदारी Honesty तो उसमे है कि तभी मैं उससे चेन ठीक करवाने का इंतजार कर रहा था।

अब आप देखें कि उस व्यक्ति में motivation, hardworking target, aim, honesty सब गुण हैं पर फिर भी वह अपने ग्राहकों को पीछे छोड़ता जा रहा है अर्थात उसकी आय income में कोई सुधार नहीं दिख रहा होगा। शाम को जब वह घर जाता होगा तो उसके निराश मन में यह विचार जरूर उठता होता कि ‘आज तो मेरी किस्मत खराब है। इतनी कड़ी मेहनत के बाद भी कुछ खास प्राप्त नहीं हुआ।’

एक दूसरी घटना जो मेरे साथ काफी समय पहले घटित हुई थी, आपके साथ साझी करता हूँ, सम्भवतः ऐसा कभी न कभी आपके साथ भी हुआ होगा।

मैं वैसे तो घर में बाहर का खाना कम खाता हूँ। पर उस दिन ड्यूटी पर काफी देर होने के कारण एक छोटे से ढाबे में चला गया। मुझसे पहले सामने वाली कुर्सी में कोई दूसरे साहब बैठे थे। पर्सनेलिटी personality से वह पुलिस कर्मचारी लग रहे थे। मेरे खाना खाने के बाद उठे। मैं भुगतान के लिए खड़ा हुआ। ढाबा मालिक ने पैसे बताये तो मुझे ज्यादा लगे। मैंने उनसे detail पूछी। बताया गया कि सब्जी इतने की और आपने आठ रोटियां ली हैं जबकि वास्तव में मैंने सिर्फ चार ही ली थी। मेरे विरोध करने पर वह बोला कि आप खाते समय फोन पर बात कर रहे थे, इसलिए आपको पता नहीं चला कि आपने कितनी रोटियां ली हैं। मन ही मन गुस्से के साथ हंसी भी फूट पड़ी कि भला बोलते-बोलते कोई कैसे खा सकता है। खैर मैंने भुगतान किया और वहां चला गया। मुझे यह नहीं लगता कि उसने जानबूझ कर ऐसा किया है बल्कि वह रोटियां देते समय दोनो ग्राहकों को कितनी दी इसका सही हिसाब ही नहीं लगा पाया। आज इस घटना को लगभग 6 साल हो गयें हैं परन्तु मैं दुबारा उस ढाबे में नहीं गया चाहे मुझे भूखा ही क्यों न सोना पड़ा हो। आज जब भी मैं उसकी दुकान के सामने से निकलता हूँ तो दुकान को देखकर मुझे उसकी आय में कोई विशेष परिवर्तन महसूस नहीं होता है।

तो मित्रों वह ढाबे वाला hardworking होने के वावजूद यदि अपने ग्राहकों का ख्याल ही नहीं रख पा रहा है तो क्या वह अच्छा व्यवसायी बन सकता है। कदापी नहीं। व्यापार में नाकामयाब होने पर उसे लगेगा कि मैंने काफी मेहनत की पर कामयाबी नहीं मिली। सब यह भाग्य का खेल है।

तो मित्रों इन दोनों घटनाओं को देखते हुए हम विचार करें कि हम ज्यादातर लोग hardworking, motivation, target, aim, honesty के होते हुए भी जीवन में असफल क्यों हो जाते हैं।

हम इसलिए असफल होते हैं कि काम को सही तरीके से कर ही नहीं पाते हैं। हमारे लिए proper way of working को जानना बहुत ही आवश्यक होता है अन्यथा सारी खूबियां एक तरफ ही रह जाती हैं। आखिर में क्या लगेगा कि मेरा भाग्य ही खराब है। अतः हम समझ गये कि सही तरीके से काम करना ही वास्तव में हमारा भाग्य है।

कवि प्रेम भाटिया जी की यह पंक्तियाँ अनायास ही याद आ गयी हैः-

देखने में बस यह आया सोचता है हर कोई,
सोचता पहले नहीं जो, सोचता है बाद में।

अब लाख रुपये सवाल उठता है कि कोई भी काम करने का सही तरीका क्या है?

अपना उद्देश्य (motive) तय करने के साथ यह भी तय कर लें कि आप क्या, किस तरह, किस क्रम में और किस कारण आपको कार्य करना है। यह सब आप लिखित में भी रख सकते हैं क्योंकि आप लिख हुआ जितनी भी बार और जब भी पढ़ेंगे वह आपको उद्देश्य का याद दिलाता रहेगा, आपमें उत्साह बना रहेगा।

समय-समय के अंतराल में तय किए हुए उद्देश्य की तरफ अपने बढ़ते हुए कदमों का विश्लेषण कीजिए। देखिए कि जो आपकी सोच है और जिस तरह कार्य हो रहा है, क्या वह दोनो एक ही दिशा में चल रहे हैं? क्या कार्य के तरीके में बदलाव लाने की आवश्यकता है?

इन सब चीजों का ईमानदारी से स्वयं विश्लेषण कीजिए और लिख लीजिए। इससे आपको कार्य में ज्यादा नियंत्रण महसूस होगा। आप स्वभाविक रूप से और ज्यादा काम करने के लिए प्रेरित होंगे। आपका काम ज्यादा उद्देश्यपूर्ण होगा जिसकी बदोलत आप तरक्की की राह में तेजी से चलेंगे।

कवि भाटिया जी ने कितना सही लिखा हैः

मेरा फ़कत नज़रिया बदलने की देर थी,
ताकती बैठी थी दुनिया साथ देने के लिए।

Also Read : उम्मीद न छोड़ें! सफलता अवश्य मिलेगी।

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43 thoughts on “आखिर हम बार-बार हारते क्यों है?

  1. बहुत ही सुन्दर लेख । …… अति सुन्दर प्रस्तुति प्रमोद जी, जितनी तारीफ की जाए कम है।

    1. धन्यवाद। आपके कमेन्टस् हमें प्रोत्साहित करते हैं।

    1. लाइक करने लिए धन्यवाद अपेक्षा जी,
      आप सबके विचारों का कदमताल पर तहेदिल से स्वागत है।

  2. चेन बनाने वाले को जल्दबाजी में नहीं जाना चाहिये ।
    बार बार आवाज़ देने पर ही बात लोगों तक पहुँचती है।
    जैसे टीवी में किसी भी product बेचने के लिये वो एक एक function बार बार बताते है और बार बार वो प्रोडक्ट दिखाते है aapko us restaurent me dubara jana chahiye ho सकता ये गलती उनसे पहली बार हुई हो

    1. विशाल जी, आपके कहे अनुसार मैं उस ढाबे में दुबारा जाऊंगा। आपकी सलाह और कमेन्टस् के लिए अति धन्यवाद और आभार।

    1. धन्यवाद राकेश जी हर हार हमे जीत की प्रेरणा और नयी सीख देती है।

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