चाय और हमारा स्वास्थ्य

चाय और हमारा स्वास्थ्य Impact of Tea in our Health

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क्या आप जानते हैं कि 200 वर्ष पहले भारतीय घरों में चाय नहीं होती थी। परन्तु आज यह हमारे देश की सभ्यता का आवश्यक अंग बन गई है। घर आये मेहमान का स्वागत बिना चाय के अधूरा सा लगता है। इससे अधिकांश लोगों को इतना अधिक लगाव है, वे सम्भवतः यह नहीं जानते कि चाय स्फूर्तिदायक तथा लाभप्रद पेय न होकर अनेक दुर्गुणों से युक्त है। वैज्ञानिकों द्वारा खोज करने पर पता चला है कि चाय में तीन प्रकार के प्रमुख विष पाये जाते हैं।

  1. थीनेन Theanine – इसको पीने से जो एक हलका सा आनन्द प्रतीत होता है वह इसी ‘थीन’ नामक विष का प्रभाव है। दिमाग पर इसका बहुत ही बुरा प्रभाव पड़ता है।
  2. टनीन Tannins- क्या आप जानते हैं टनीन का उपयोग चमड़ा उद्योग में लेदर को मुलायम और चमकदार बनाने के लिए किया जाता है। यह भोजन के पचाने वाले छोटे-छोटे कोशिकाओं को नष्ट कर देता है। जिसके कारण कब्ज की शिकायत होने लगती है तथा लीवर प्रभावित होने लगता है। यह पाचन-शक्ति को बिल्कुल नष्ट कर देता है। इसमें नींद को नष्ट करने की भी शक्ति होती है। शरीर में इस विष का प्रभाव शराब से मिलता-जुलता है। इसकी वजह से पीने के बाद प्रारम्भ में तो ताजगी अनुभव होती है, परंतु थोड़ी देर में नशा उतर जाने पर खुश्की तथा थकान उत्पन्न होती है, जिसके कारण और अधिक चाय पीने की इच्छा होती है।
  3. केफेन Caffeine – केफेन का प्रभाव शराब या तबाकू में पाये जाने वाले विष ‘निकोटीन’ के समान होता है। यह शरीर को बहुत जल्दी निर्बल करता है। शरीर खोखला हो जाता है। ‘केफेन’ विष ही चाय का वह अंश होता है जिसके नशे के वशीभूत होकर व्यक्ति चाय का आदी बन जाता है। ‘केफेन’ के विष के कारण पैसाब में तीन गुना तक वृृद्धि होती है, परन्तु शरीर का दूषित पदार्थ जिसका मूत्रद्वारा निकल जाना आवश्यक है, शरीर के अंदर बना रह जाता है, जिसके फलस्वरूप गठिया का दर्द, गुर्दों तथा हृदय सम्बन्धी रोगों का शिकार बनना पड़ता है।
  4. उपयुक्त तीनों अवयवों के साथ ही साथ चाय में सायनोजन ;(Cynogen), इस्ट्रीनिन (Stricknein), सेनाइड (Cyanide) और अरोमिक आॅयल (Aeromic Oil) भी प्रचुर मात्रा में होता है, जिनके कारण इसका अधिक मात्रा में सेेवन करने से चक्कर आना, गला सूखना, खून मे खराबी, अनिद्रा और यहां तक पक्षाघात की भी शिकायत हो सकती है।

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चाय में उपर्युक्त विषों के होने से अत्यधिक उत्तेजना होती है। इनका शरीर व मस्तिष्क में बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। आज हो हृदय तथा रक्तवाहिनियों के रोगियों की संख्या में बढ़ोत्तरी हो रही है, उसका कारण चाय की बढ़ती लोकप्रियता है। विशेषज्ञों का मत है कि चाय का नशा अंदर-ही-अंदर अपना कार्य करता है और धीरे-धीरे कुछ ही दिनों में शरीर को घुन की भांति चाट जाता है।

जब चाय का खूब सेवन किया जाता है तो उसमेें नशीले प्रभाव की अपेक्षा टेनिन एसिड के कारण पेट में गड़बड़ी बहुत होती है। बादी, पेट फूलना, कब्ज, बदहजमी, हृदय-गति का अनियिमित होना और नींद न आना आदि चाय पीने वालों के मुख्य लक्षण हैं।

आज स्थिति यह है कि भोजन मिले न मिले चाय अवश्य मिलनी चाहिए। परन्तु अवगुणों के अवलोकन के पश्चात इसका सेवन अविलम्ब कम से कम कर देने में ही सबका हित है।

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