होमियोपैथी चिकित्सा-प्रणाली के तथ्य

होमियोपैथी चिकित्सा-प्रणाली के तथ्य Facts of Homeopathy Treatment in Hindi

होमियोपैथी (homeopathy) का अविष्कारक जर्मन निवासी डाॅ. हैनीमैन (1755-1843 ई. ) थे। वे उस समय के प्रचलित ईलाज विधि में एम.डी. उपाधी प्राप्त चिकित्सक थे। उन्होंने अपने दस वर्षों के चिकित्सा अनुभव से महसूस किया कि वर्तमान पद्धति में रोग को तेज दवावों से दबा दिया जाता है, जो कि आगे चलकर घातक दुष्परिणाम के रूप में उभरता है। एक बीमारी हटती है तो दूसरी खड़ी हो जाती है। फिर कोई जटिल बीमारी हो जाती है जो कि असाध्य रोग की श्रेणी में आ जाती है। अतः उन्होंने इस चिकित्सा प्राणीली को छोड़ने का निश्चिय किया और दिन-रात लगाकर एक नयी चिकित्सा प्रणाली की खोज की जिसको उन्होनें होमियोपैथी (homeopathy) का नाम दिया। उस समय की प्रचलित ईलाज विधि को उन्होंने एलोपैथी कहा। अतः एलोपैथी नाम भी उन्ही का दिया हुआ है।

होमियोपैथी चिकित्सा-प्रणाली के सिद्धान्त

रोग का प्रारम्भ स्थूल शरीर में नहीं, बल्कि उसके सूक्ष्म शरीर में आता है। यदि सूक्ष्म शरीर (जीवन शक्ति) स्वथ्य है, रोग प्रतिरोधक शक्ति मजबूत है तो रोग का आक्रमण सूक्ष्म शरीर पर नहीं हो सकता और स्थूल शरीर स्वस्थ बना रहता है। यदि उपचार से इस सूक्ष्म शरीर को रोगमुक्त कर दिया जाता है तो स्थूल शरीर अपने आप ही रोगमुक्त हो जाता है।

स्वस्थ शरीर में जो औषधि रोग के जिन लक्षणों को प्रकट करती है, यदि रोगी को वही दवाई बहुत कम मात्रा में दी जाए तो वह ठीक हो जाता है। एक उदाहरण से हम इस बात को और स्पष्ट रूप से समझ सकते हैं जैसे संखिया खाने से बेचैनी पैदा होती है, शरीर में जलन होती है, बार-बार प्यास लगती है। होमियोपैथी के सिद्धान्त के अनुसार यदि वैसे ही लक्षण किसी रोगी में पाये जाते हैं तो इन लक्षणों को आर्सेनिक (संखिया) नामक दवा सूक्ष्म मात्रा में दी जाती है। अतः स्पष्ट है कि होमियापैथी (homeopathy) में रोग का नहीं, रोगी का इलाज किया जाता है। रोगी को लक्षणों को प्राथमिकता दी जाती है, बीमारी के नाम को नहीं।

Also Read : आधुनिक चिकित्सा पद्धति (Allopathy) का विकासक्रम

जिस प्रकार आयुर्वेद में कफ-पित्त और वायु है, उसी प्रकार होमियोपैथी (homeopathy) में सोरा, सिफलिश और सायकोसिस है। नब्बे प्रतिशत रोगों का मूल कारण सोरा दोष का बढना है। इसी दोष की सक्रियता के कारण शरीर में खाज, खुजली, सोरायसिस, कुष्ठरोग तथा पेट के अन्य रोग होते हैं। सायकोसिस विष के कारण शरीर में अतिरिक्त वृद्धि जैसे रसौली, गांठ, मस्से, कैंसर आदि हो जाता है और सिफलिश के कारण यौन-रोग आदि होते हैं।

होमियोपैथी (homeopathy) के उपचार का आधार खासतौर पुराने तथा असाध्यय कहे जाने वाले रोगों के लिये रोगी की केस हिस्ट्री लेते समय उनके लक्षणो की प्राथमिकता का क्रम इस प्रकार रहता है।

  • मानसिक लक्षण
  • व्यापक लक्षण, जो पूरे शरीर में पीड़ा का बोध कराता है।
  • अंग विशेष के लक्षण
  • कोई असाधारण लक्षण
  • रोगी की प्रकृति

होमियोपैथिक दवायें

सभी पैथियों में दवाइयां मूलतः सब वही होती हैं, भेद केवल इनके निर्माण एवं प्रयोग में होती है। इस विधि में औषधि के स्थूल रूप को इतने सूक्ष्मतम रूप में परिवतर्ति कर दिया जाता है कि दवा का स्थूल अंश तो क्या उसके सूक्ष्म अंश का भी पता नहीं चलता। होमियोपैथी की शक्तिकृत दवा 6 शक्ति के बाद30, 200, 1000, 10000, 50000 तथा 1 लाख पोटेन्सी वाली होती है।

होमियोपैथिक दवाओं का परिक्षण

कौन सी दवा स्वस्थ व्यक्ति में क्या लक्षण पैदा करती है, डाॅ. हैनीमैन ने इसका भी अविष्कार किया। उन्होंने स्वंय और अपने सहयोगियों पर परीक्षण करने के बाद जो-जो लक्षण पैदा हुए, उनका सम्पूर्ण रिकार्ड बनाया। चूंकि होमियोपैथिक दवा परिक्षण का आधार स्वस्थ मानव शरीर रहा है, अतः जब तक इंसान पृथ्वी पर है, हौमियोपैथी की वे ही दवाइयाँ चलती रहेंगी।

होमियोपैथी चिकित्सा-प्रणाली के कुछ रोचक तथ्य

  • होमियोपैथिक (homeopathy) दवा की कोई एक्सपायरी डेट नहीं होती है। यदि इन दवाइयों को धूप, धूल, धुंआ, तेज गन्ध व केमिकल्स से बचाकर रखा जाए तो यह दवा कई वर्षों तक चलती रहेगी।
  • इन दवाओं का कोई साइड अफैक्ट नहीं होता है।
  • इन दवाओं से कोई विशेष परहेज नहीं होता है।
  • दवा को लेने के आधा घंटा पहले और आधा घंटा बाद तक कुछ खाना-पीना नहीं चाहिए।
  • कोई अन्य दवा के साथ होमियोपैथी दवा नहीं लेनी चाहिए।

होमियोपैथी चिकित्सा के बारे में भ्रांतियाँ

  • होमियोपैथी दवा देर से असर करती है।
  • होमियोपैथिक चिकित्सा में पहले रोग को बढाया जाता है।
  • होमियोपैथिक दवा काफी देर बाद असर करती है।
  • होमियोपैथिक दवा बार-बार दिन में कई बार लेनी होती है।

ऐसी कई भ्रान्तियाँ एवं गलत धारणाओं के कारण लोग कई बार तात्कालिक लाभ के लिए इधर-उधर भटकने के बाद अन्त में लाभ के लिए होमियापैथी चिकित्सा के लिये आते हैं जब वे इस चिकित्सा विधि से लाभान्वित होते हैं तो फिर इसे छोड़कर दूसरी पद्धति नहीं अपनाते हैं।


आपको यह लेख होमियोपैथी चिकित्सा-प्रणाली के तथ्य Facts of Homeopathy Treatment in Hindi  कैसा लगा, कृप्या कमेंट बाक्स पर साझा करें। अगर आपके पास विषय से जुडी और कोई जानकारी है तो हमे kadamtaal@gmail.com पर मेल कर सकते है |

Random Posts

  • ऋषि दुर्वासा क्रोधस्वरूप ऋषि दुर्वासा

    क्रोधस्वरूप ऋषि दुर्वासा – ऋषि दुर्वासा के जन्म से जुड़ी एक कहानी इस प्रकार है। ब्रह्मज्ञानी अत्रि ब्रह्माजी के मानस पुत्र थे। इनकी पत्नी का नाम अनसूया था। इनका कोई […]

  • ravan kumbharan सीता को रिझाने के लिए रावण द्वारा राम का रूपधारण

    सीता को रिझाने के लिए रावण द्वारा राम का रूपधारण – short story of Ravan Kumbhkaran samvad in Hindi राम जी इतने अधिक शुद्ध हैं कि जो राम का स्मरण भर […]

  • kids story in hindi मौलवी साहब की जूतियाँ – Kids story in Hindi

    मौलवी साहब की जूतियाँ – Kids story in Hindi ‘बच्चों, मेरी जूतियाँ उठा लाओ।’ मौलवी साहब ने कहा। मौलवी साहब काफी देर से बच्चों को पढ़ा रहे थे। बच्चे भी […]

  • raja shibi राजा शिवि का परोपकार

    राजा शिवि का परोपकार Raja Shibi Ka Paropkar in Hindi पुरुवंशी नरेश शिवि उशीनगर देश के राजा थे। वे बड़े दयालु-परोपकारी शरण में आने वालो की रक्षा करने वाले एक […]

5 thoughts on “होमियोपैथी चिकित्सा-प्रणाली के तथ्य

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*
*