सच्चाई हर जगह चलती है

सच्चाई हर जगह चलती है – Short Hindi stories

देशबन्धु चित्तरंजनदास जब छोटे थे, तब उनके चाचा ने उनसे पूछा-‘तुम बड़े होकर क्या बनना चाहते हो।’

‘मैं चाहे जो बनूं, किन्तु वकीन नहीं बनूंगा’-चित्तरंजन ने उत्तर दिया।

चाचा फिर बोले-‘ऐसा क्यों, भला।’

‘वकालत करने वालों को कदम-कदम पर झूठ बोलना पड़ता है। बेईमानों का साथ देना पड़ता है।’-चित्तरंजन ने कहा।

परन्तु भाग्य की विडम्बना देखिये कि चित्तरंजन दास बड़े होकर वकील हो गये। किन्तु उनकी वकालत दूसरों से भिन्न थी। वे झूठे मुकदमे कभी नहीं लेते थे। वे पारिश्रमिक भी जितनी मेहनत करते उतनी ही लेते। उनकी योग्यता का लाभ दीन-हीन, असहाय एवं देशभक्त ही उठाते। कभी-कभी वे गरीबो की पैरवी वे निःशुक्ल की कर दिया करते थे। जो भी मुकदमा लेते, उसमें पूरी रुचि दिखाते तथा सम्बन्धित व्यक्ति को जिताने का हरसंभव प्रयास करते।

इस प्रकार चित्तरंजनदास ने यह सिद्ध कर दिया कि वकालत जैसा व्यवसाय भी सत्य, न्याय तथा ईमानदारी के साथ सम्पन्न किया जा सकता है।

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