इण्डोनेशिया में रामायण (Ramayana in Indonesia)

इण्डोनेशिया में रामायण (Ramayana in Indonesia) in Hindi

इण्डोनेशिया में भारतीय शासक ‘अजी कका’ (78 ई.) के समय में संस्कृृत भाषा तथा ‘पल्लव’ एवं ‘देवनागरी’ लिपि के प्रयोग के प्रणाम मिलते हैं। बाद में यह ‘कवि-भाषा’ के रूप में विकसित हुई। राम-कथा के आगमन की तिथि पर विवाद हो सकता है, किंतु सातवीं शताब्दी के प्रम्बनान के शिव-मन्दिर पर शिलोत्कीर्ण राम-कथा मिलती है, जिस पर शैव-मन्दिर पर शिलोत्कीर्ण राम-कथा मिलती है, जिस पर शैव एवं बौध शिल्प-शैलियों का प्रभाव है।

इसके उपरान्त 14वीं शताब्दी में जावा के पनातरान नामक स्थान पर निर्मित शिव-मन्दिर में भी राम-कथा मिलती है। यह राम-कथा भित्ति पर लम्ब रेखाओं में उत्कीर्ण फूल-पत्तियों की बेल से सज्जित बेड शैली में 106 दृश्यों में सम्पन्न हुई है। इन दोनों के अलावा पूर्व जावा में जलतुण्डों के अवशेषों में 10वीं शतब्दी के उत्तरार्द्ध के भित्ति-चित्र उपलब्ध हैं।

बालि में भी भित्ति-चित्रों तथा आधुनिक वास्तुकला में सीता की अग्नि-परीक्षा आदि महत्वपूर्ण दृश्यों
का अंकन होता रहा है। Indonesia में अभिलेख एवं साहित्य के रूप में राम-कथा प्राप्त होRamayana Indonesiaती है। 8वीं शताब्दी के राजा संजय के अभिलेख में राम-कथा का उल्लेख हुआ है। 9वीं शताब्दी तक मध्य जावा में रावण, लंका, पवन, अयुद्धा, भरत, राम, लाघव, सीता, बालि, लक्ष्मण इत्यादि नाम प्रचलित हो चुके थे, जिसका विस्तृृत विवेचन एच.बी. सरकार ने ‘इण्डियन इन्फ्तुएन्सेज आन दि लिटिरेचर आॅफ जावा एण्ड बालि’ में किया है। छठी शताब्दी में मध्य जावा का एक भाग ‘लंग्गा’ कहलाता है। इसी प्रकार राजा बलितुंड के एक अभिलेख में किसी प्राचीन जावा राम-कथा के पाठ की चर्चा आयी है।

प्राचीन जावा-रामायण (Java Ramayana) या प्राचीन ककविन-रामायण Indonesia की सर्वाधिक प्राचीन एवं विशालकाय रचना है, जिसके रचनाकार के रूप में योगश्वर कवि का प्रमाण मिलता है। इस रामायण में 26 सर्ग हैं, जिसमें 2771 श्लोक हैं। इसकी तुलना संस्कृत के भट्टिकाव्य से की जाती हैं, क्योंकि दोनों के कुछ सर्गों में साम्य मिलता है। इसके अतिरिक्त बालि के संस्कृत-साहित्य में भी कई ग्रन्थ हैं, जिसमें राम-कथा मिलती है।

इण्डोनेशिया में आज भी नृृत्य एवं अभिनय के माध्यम से राम-कथा प्रस्तुत की जाती है। राष्ट्रपति सुकर्णो के समय में पाकिस्तान का एक प्रतिनिधिमंडल इंडोनेशिया की यात्रा पर था। उस दौरान प्रतिनिधिमंडल को वहाँ रामलीला देखने का मौका मिला और वह इस बात से हैरान था कि एक मुस्लिम देश में रामलीला का मंचन क्यों किया जाता है। इस बारे में जब उन्होंने राष्ट्रपति से सवाल किया तो उन्होंने तपाक से जवाब दिया,

हमने अपना धर्म बदला है, अपनी संस्कृति नहीं।

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