मैं ब्लॉगर कैसे बना!

दोस्तों मेरा ब्लॉगर (blogger) बनने की कहानी अजीब है। शायद नियति ही मुझे इस क्षेत्र में लेकर आयी है जिसने मुझमें लेखन के प्रति रूचि जागृत की।

2013 तक मैंने कभी भी लिखने का प्रयास नहीं किया या कहें कि रूचि ही नहीं थी। प्रोफेशनल ब्लागिंक (professional blogging) को बहुत दूर की बात थी।

घटना उस समय की हैं जब मैं नोएडा (उ.प्र.) के एक स्किल डिप्लपमेंट ट्रेनिंग क्षेत्र की मल्टीनेशनल कम्पनी ‘श्रीराम न्यू होरिजन लिमिडेड’ में कार्यरत था। हमारी टीम ऑफ लाइन कन्टेंट डिप्लपमेंट का कार्य करती थी। कम्पनी वित्तीय संकट के दौर से गुजर रही थी, इसलिए कर्मचारियों को अपने डोमेन से हटकर भी कार्य करना होता था।

हमारे टीम लीडर और साथी कप्यूटर ट्रेनिंग देने के लिए अलग-अलग राज्यों में गये हुए थे। इसी बीच कम्पनी का एक टेंडर पास हुआ था जिसमें कि असम सरकार के अंतर्गत आने वाले एक विभाग के लगभग 1000 कर्मचारियों को कप्यूटर ट्रेनिंग देनी थी। शर्तों के अनुसार हमारी कम्पनी को निश्चित समय-सीमा तक एक इन्सिप्सन रिपोर्ट (Project Inception Report) सौंपनी थी ।

अब समस्या सिर पर खड़ी थी क्या किया जाए। कम्पनी के वाईस प्रेसिडेंट (V.P.) को न जाने क्या सूझी, उन्होंने मुझे अपने पास कक्ष में बुलाया और रिपोर्ट बनाने का कार्य सौंप दिया।

मैंने इस कार्य को एक चैलेंज की तरह लिया और अपनी क्षमता के अनुसार पूरा प्रयास करने का बाॅस को आश्वासन दिया। इस विषय में कुछ अधिक जानकारी न होने के कारण मैंने टेंडर डाक्यूमेंट की कापी मंगायी और इंटरनेट पर इस विषय में जितनी संभव हो सकती था, जानकारी प्राप्त की ।

कुछ कर दिखाने की तीव्र इच्छाशक्ति के कारण 15 दिनों की कड़ी मेहनत के बाद मैंने किसी तरह 110 पन्नों की एक रिपोर्ट तैयार कर ली। कोई अन्य विकल्प न होने के कारण कम्पनी ने एक बड़ा रिस्क लेते हुए इस रिपोर्ट को डिपार्टमेंट में जमा कर दिया। कुछ दिनों में रिपोर्ट पर सहमति भी आ गयी।

मैं ब्लॉगर कैसे बना!

इस घटना के बाद कम्पनी का मेरे ऊपर विश्वास बढ़ा और उसी प्रोजेक्ट की कम्पलीशन रिपोर्ट (Project Completion Report) का कार्य भी मुझे ही सोंपा गया।

दोस्तों सच कहूं तो इन हाई रिस्क प्रोजेक्टस् को करने के बाद भी दुर्भाग्य से न तो कोई वित्तीय लाभ हुआ और न ही पद में कोई प्रमोशन ही हुआ। मुझे इस बात का गर्व है कि इन क्षणिक फायदों से भी कहीं बढ़ कर वह सच्चा लाभ था, लेखन के प्रति मेरी रूचि जागना, जिसके कारण आज मैं आप सबके के बीच अपनी बात रख पा रहा हूँ।

कुछ समय बाद ही मैंने कम्पनी छोड़ दी और दिल्ली में मेडिकल इंट्रेंस की तैयारी करवाने वाली एक एजूकेशन इंस्ट्यिशन ज्वाईन कर लिया। ईश्वर की लीला ही कह सकते हैं कि एक साल बाद कम्पनी ने मुझे वेवसाइट मेंटेन करने और अन्य ऑनलाइन का कार्य सौंपा दिया। यह सब कार्य मेरे लिए नवीन होते हुए भी रूचिकर था।

इस प्रकार के डिजीटल कार्य करते हुए मेरे मन में एक हिन्दी ब्लॉग kadamtaal.com बनाने का विचार आया जिससे की मैं आज आप सबके बीच में अपनी भावनाओं, विचारों को आसानी से साझा कर पा रहा हूँ।

दोस्तों यह थी मेरी ब्लाॅगर बनने की कहानी ‘मैं ब्लॉगर कैसे बना!’। यदि आप मेरे बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो यहाँ क्लिक करें।

 

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