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    वाल्मीकि । डाकू से महर्षि तक का सफर

    वाल्मीकि । डाकू से महर्षि तक का सफर महर्षि वाल्मीकि का पूर्व नाम रत्नाकर था। रत्नाकर का काम राहगीरों को लूट कर धन कमाना था। रत्नाकर जिस किसी को भी लूटता, वह व्यक्ति उसे रोता, गिड़गिड़ाता, भयभीत होता ही दिखता। आज उसने एक अजीब साधु देखा था, जो बिल्कुल भी नहीं डरा। इस साधु ने तो एक शब्द भी अपनी प्राणरक्षा […]

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    सीता को रिझाने के लिए रावण द्वारा राम का रूपधारण

    सीता को रिझाने के लिए रावण द्वारा राम का रूपधारण – short story of Ravan Kumbhkaran samvad in Hindi राम जी इतने अधिक शुद्ध हैं कि जो राम का स्मरण भर करता है, वह भी शुद्ध हो जाता है। श्रीएकनाथ महाराज की भावार्थ-रामायण में पैंतालीस हजार मराठी पद हैं। उसमें रावण द्वारा राम का रूप धरने से होने वाली स्थिति की […]

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    दूसरों की अमंगल-कामना न करें

    भगवान भोलेनाथ द्वारा महर्षि दधिचि पुत्र पिप्लाद को सीख : महर्षि दधिचि (Dadhichi) ने देवताओं की रक्षा के उद्देश्य ने अपना शरीर बलिदान कर दिया था। उनकी हड्डियों को लेकर विश्वकर्मा ने वज्र बनाया जिसकी सहायता से इंद्र ने अजेय वृत्रासुर को मारा और स्वर्ग पर पुनः अपना अधिकार प्राप्त किया। दधिचि (Dadhichi) के पुत्र का नाम पिप्लाद था। वे […]

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    महर्षि दधीचि का त्याग

    महर्षि दधीचि का त्याग Story of Maharishi Dadhichi in Hindi आजकल आये दिन हमारे कोई-न-कोई सैनिक सीमा पर दुश्मन की गोली से शहीद हो रहे हैं। वे राष्ट्र की रक्षा के लिए बिना कोई खौफ खाये अपना शरीर तक देश के लिए न्योछावर कर रहे हैं। ये सभी सैनिक महर्षि दधीचि के त्याग और समर्पण की परंपरा के वर्तमान रूप […]

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    राजा शिवि का परोपकार

    राजा शिवि का परोपकार Raja Shibi Ka Paropkar in Hindi पुरुवंशी नरेश शिवि उशीनगर देश के राजा थे। वे बड़े दयालु-परोपकारी शरण में आने वालो की रक्षा करने वाले एक धर्मात्मा राजा थे। इसके यहाँ से कोई पीड़ित, निराश नहीं लौटता था। इनकी सम्पत्ति परोपकार के लिए थी। इनकी भगवान से एकमात्र कामना थी कि मैं दुःख से पीड़ित प्राणियों […]

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    गौभक्त राजा दिलीप

    गौभक्त राजा दिलीप Gau Bhakt Raja Dalip in Hindi प्राचीन हिन्दी कहानी है, अयोध्या के राजा दिलीप बड़े त्यागी, धर्मात्मा, प्रजा का ध्यान रखने वाले थे। उनके राज्य में प्रजा संतुष्ट और सुखी थी। राजा को प्रौढावस्था तक भी कोई संतान नहीं हुई। अतः एक दिन वे रानी सुदक्षिणा सहित गुरु वसिष्ठ के आश्रम में पहुंचे और उनसे निवेदन किया […]

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    राजा रघु और कौत्स

    राजा रघु और कौत्स Story of Raja Raghu and Kautsya अयोध्या नरेश रघु (Raja Raghu) के पिता का दिलीप और माता का  नाम सुदक्षिणा था। इनके प्रताप एवं न्याय के कारण ही इनके पश्चात इक्ष्वाकुवंश रघुवंश के नाम से प्रख्यात हुआ। महाराज रघु ने समस्त भूखण्ड पर एकछत्र राज्य स्थापित कर विश्वजीत यज्ञ किया। उस यज्ञ में उन्होंने अपनी सम्पूर्ण […]

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    राजकुमार सुधन्वा और अर्जुन (Sudhanva and Arjun War)

    राजकुमार सुधन्वा और अर्जुन Story of war between Rajkumar Sudhanva and Arjun in Hindi राजकुमार सुधन्वा (Sudhanva) चम्पकपुर के नरेश हंसध्वज का छोटा पुत्र था। वह जितना महान शूरवीर था, उतना ही महान ईश्वर भक्त भी था। महाभारत युद्ध के पश्चात धर्मराज युधिष्ठिर ने अश्वमेघ यज्ञ किया। घोड़े के पीछे अर्जुन के नेतृत्व में सेना विजय-यात्रा कर रही थी। किसी भी राजा का […]

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    सती सावित्री (Sati Savitri)

    सती सावित्री Story Sati Savitri and Satyavan in Hindi मद्रदेश के राजा अश्वपति धर्मात्मा एवं प्रजापालक थे। उनकी पुत्री का नाम सावित्री था। सावित्री जब सयानी और विवाह योग्य हो गयी तब राजा ने उससे कहा-पुत्री! तू अपने योग्य व स्वयं ढूंढ ले। तेरी सहायता के लिए मेरे वृद्ध मंत्री साथ जायेंगे। सवित्री ने संकोच के साथ पिता की बात […]