• समय

    क्या आप अपने समय का बेहतरीन उपयोग कर रहे हैं?

    क्या आप अपने समय का बेहतरीन उपयोग कर रहे हैं? How you are spending your time ? यदि आपको पता नहीं है कि आप अपना समय कैसे निवेश (spending your time) करते हैं, तो संभवतः आपको अपनी सर्वोच्च प्राथमिकताओं के बारे में पता ही नहीं है। जीवन के आने वाले दौर में आपको यह महसूस होगा कि आपने जीवन को […]

  • आलोचना depression

    निराशा और अवसाद से बाहर कैसे निकलें?

    निराशा और अवसाद से बाहर कैसे निकलें? How to deal with depression and disappointment? यदि आलोचना (criticism) आपको परेशान करती हैं तब क्या करें? क्या करें जब आपको बात-बात पर टोका जाने लगता हो? जैसे कि खुल कर हँसने पर कहा जाए कि कैसे मुंह फाड़-फाड़ कर हंस रहा है। चुप रहने पर कहा जाए कि कैसे लल्लू की तरह […]

  • अब्दुल कावी देसनवी

    उर्दू साहित्य के गौरव । अब्दुल कावी देसनवी

    उर्दू साहित्य के गौरव । अब्दुल कावी देसनवी अब्दुल कावी देसनवी (Abdul Qavi Desnavi عبدالقوى دسنوى) का जन्म 1 नवम्बर 1930 को गाँव देसना, नालंदा, बिहार में हुआ था। उनके पिता जी का नाम सैयद मौहम्मद सईद रजा था। वे उर्दू, अरबी तथा फारसी भाषा के प्रोफेसर थे जो कि मुंबई के सेंट जेवियर्स काॅलेज में पढ़ाते थे। देसनवी ने […]

  • लालच imandar balak

    ईमानदारी का फल

    ईमानदारी का फल किसी अमीर के घर में एक दिन सोफासेट ठीक करने के लिए एक कारपेन्टर को बुलाया गया। उसकी उम्र 16 साल के करीब रही होगी। वह कार्य करने लगा। उस समय वह अकेला ही था। उसने सोफा के किनारे पर एक सोने की चेन फंसी हुई देखी। वह चेन को हाथ में उठाकर देखने लगा। चेन को […]

  • फ़्लोरेन्स नाइटिंगेल

    फ़्लोरेन्स नाइटिंगेल | सेवा की प्रतिमूर्ति

    फ़्लोरेन्स नाइटिंगेल | सेवा की प्रतिमूर्ति फ़्लोरेन्स नाइटिंगेल (Florence Nightingale) का जन्म 12 मई सन् 1820 ई. में इटली के शहर फ्लाॅरेन्स में एक ब्रिटिश परिवार में हुआ था। वह उच्च घराने की लड़की थी। परिवार में पैसों की कोई कमी नहीं थी पर फ्लाॅरेन्स का जन्म ही दीन दुखियों की सेवा के लिए ही हुआ था। अतः उनका मन […]

  • भ्रामरी देवी

    माँ भ्रामरी देवी की अवतार कथा

    माँ भ्रामरी देवी की अवतार कथा Maa Bhramari Devi avatar katha अरूण नाम का एक पराक्रमी दैत्य ब्रह्मा जी को प्रसन्न करने के लिए कठोर तप कर रहा था। उसकी तपस्या इतनी प्रचण्ड थी कि उसके शरीर अग्नि की ज्वालाएँ निकलने लगी। उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्माजी गायत्री देवी को साथ लेकर अरूण के समक्ष प्रकट हुए। अरूण ब्रह्मा जी के […]