निबन्ध

कदमताल पर प्रकाशित निबन्धों की सूची

  • सूने पहाड़-मेरा संस्मरण

    अभी कुछ दिनों पहले ही मैं अपने ननिहाल गया। लगभग 14 साल बाद। नानी की मृत्यु के बाद बस जाना ही नहीं हुआ। मेरी माताजी सिर्फ दो बहने हैं। मामा न होने के कारण किसके यहां ठहरने की उधेड़बुन में बस समय बीतता ही चला गया। बचपन की यादों का दौर जैसे चलचित्र की भांति आंखों के […]

  • आधुनिक/वर्तमान शिक्षा पद्धति में भाषा और आचरण

    आधुनिक / वर्तमान शिक्षा (modern education system) का उद्देश्य तो केवल ऐसी शिक्षा से है जिसमें अधिक से अधिक धन की प्राप्ति हो और उसी के इर्दगिर्द सारी शिक्षा प्रणाली घूमती है। पर आप आज की दशा पर विचार कीजिए। जिस शिक्षा […]

  • महापुरुषों के पत्रों का महत्व

    महापुरुषों के पत्र (letters of great personalities) बड़े ही मनोरंजक एवं प्रेरणा (inspirational) देने वाले होते हैं। विश्व में अनेक महान लेखक हुए हैं, जिनके पत्र उनके साहित्य से कम रोचक या महत्वपूर्ण नहीं हैं। जब हम महापुरुषों के तिथिक्रम से संकलित पत्रों को पढ़ने बैठते […]

  • डर (Fear)

    एक ऐसी प्रक्रिया है जो कि मनुष्य के मस्तिष्क में बचपन से हावी रहती है। बचपन में शिशुकाल से ही, किसी आहट से, शोर से बच्चे डर जाते हैं। किसी अनजान व्यक्ति को देखने पर भी डर (afraid) जाते हैं। जैसे-जैसे बच्चा स्कूल जाने लगता है तो वहाँ भी डर उसका पीछा […]

  • यात्रा (Tour)

    विषय पर चोैकिए मत, मैने तो ऐसे ही बात छेड़ दी। मुझे लगा आप लोग सफर की तैयारी कर रहे हैं, कहीं आपको कुछ लाभ ही मिल जाए। यात्रा (Tour and travelling), कितना छोटा सा शब्द है जिसमें छिपा है एक परिवर्ततन, जिज्ञासा, इच्छा, जानकारी, आत्मिक संतुष्टि, मिलन […]

  • फ्लोप लाइफ (Flop Life)

    आपने दूरदर्शन (Television) पर स्व. जसपाल भट्टी (Jaspal Bhatti) का फ्लोप शौ (Flop Show) देखा ही होगा, ऐसे में मेरी कल्पना में राजेश की फ्लोप लाइफ (Flop Life) है जो कहानी का नायक है। जैसा कि हमारी ज्यादातर हिन्दी फिल्मों का नायक बड़ी जटिल परिस्थितियों में बाल अवस्था बिताता है और बड़ा होकर एक […]

  • संस्कार

    हमारे जीवन में हजारों पुराने व नये संस्कार (Traditional Ethics) होते हैं। जो बनते और समाप्त होते हैं। हर व्यक्ति के अपने-अपने संस्कार होते हैं। कुछ संस्कार अन्तिम समय तक हमारे साथ ही चलते हैं और कुछ अगले जन्म तक साथ आत्मा के साथ जाते हैं। संस्कारों की जीवन में भूमिका संस्कारों (Traditional ethics) की […]

  • गलत मान्यतायों का तिरस्कार हो

    पुरानी मान्यतायें हमें जीवन से, मूल सिद्वांत से भ्रमित कर देती हैं या हमारे भाग्य में पाप अनजाने में बढा़ देती हैं। दहेज भी ऐसी एक मान्यता रही जो कि अब काफी हद तक कम हो गई है। इस मान्यता की वजह से गरीब घर की कई लड़कियां तो पूरी जिन्दगी कुंवारी ही रह […]

  • भूल सुधार एवं क्षमा करना

    यदि हमें यह आभास हो गया कि संस्कार ही इस जीवन धारा के मूल में विराजमान हैं तो हम अपनी जीवन शैली को बदलने का प्रयास कर सकते हैं। जैसे हमारी पुरानी मान्यताओं/अनुभवों/संस्कारों के कारण जिस किसी से भी हमारे संबन्धों में दरार पड़ गई है। उस दरार को भरने […]