माँ भ्रामरी देवी की अवतार कथा

माँ भ्रामरी देवी की अवतार कथा
Maa Bhramari Devi avatar katha

भ्रामरी देवी

अरूण नाम का एक पराक्रमी दैत्य ब्रह्मा जी को प्रसन्न करने के लिए कठोर तप कर रहा था। उसकी तपस्या इतनी प्रचण्ड थी कि उसके शरीर अग्नि की ज्वालाएँ निकलने लगी। उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्माजी गायत्री देवी को साथ लेकर अरूण के समक्ष प्रकट हुए।

अरूण ब्रह्मा जी के चरणों में गिर गया और उनकी स्तुति करने लगा। ब्रह्मा जी ने उसे वर मांगने के लिए कहा।

दैत्य अरूण ने अमरता का वर माँगा।

ब्रह्मा जी ने उसे समझाया कि जो जन्म लेता है उसकी मृत्यु अवश्य होती है। अतः कोई दूसरा वर माँग लो।

तब चतुर अरूण दैत्य ने विचार करने के बाद वर माँगा कि उसे न कोई युद्ध में मार सके, न किसी अस्त्र-शस्त्र से उसकी मृत्यु हो, न ही कोई स्त्री या पुरुष उसे मार सके साथ ही साथ दो या चार हाथ पैरों वाला कोई प्राणी ही उसको कोई हानि पहुँचा सके तथा वह देवताओं पर आसानी से विजय प्राप्त कर

ब्रह्मा जी ने उसकी यह मनोकामना पूर्ण करने का वर दिया।

अब अरूण इतना शक्तिशाली हो गया था कि उसे किसी का डर न रहा। उसने चारों दिशाओं में उत्पात मचाना शुरू कर दिया। दानवों की सेना के साथ उसने स्वर्गलोग पर चढ़ाई कर दी और देवताओं को आसानी से हरा कर भगा दिया। अब देवलोक पर दानव अरूण का अधिकार हो गया था।

देवता बचते-बचाते भगवान शंकर की शरण में गये। शंकर जी भी ब्रह्मा जी के वर को लेकर विचार-मग्न हो गये कि किस तरह दानवों पर विजय प्राप्त की जा सकती है। यह दानव तो चालाकी से ऐसा वर माँग बैठा था कि उसकी मृत्यु लगभग असम्भव हो गयी थी।

उसी समय आकाशवाणी हुई-‘देवताओं! तुम लोग माँ भगवती की उपासना करो, वे ही तुम्हारा कष्ट दूर करने में समर्थ हैं। यदि दानवराज अरूण नित्य की गायत्री उपासना करना बंद कर दे तो शीघ्र ही उसकी शक्ति कमजोर हो जायेगी।’

देवगुरू बृहस्पति जी अरूण के पास गये ताकि उसकी बुद्धि को भ्रमित किया जा सके। बृहस्पति जी के जाने के बाद देवता भगवती की आराधना करने लगे।

बृहस्पति के प्रयत्न से अरूण ने गायत्री-मंत्र का जाप करना छोड़ दिया।

उधर देवताओं की प्रार्थना से माँ प्रसन्न हो गयी और विलक्षण रूप धारण कर देवताओं के समझ प्रकट हुई। वे चारों ओर से असंख्य भ्रमरों से घिरी हुई थी।

माँ ने कहा-‘अरूण को मिले वरदान के अनुरूप मेरा यह भ्रमर रूप उससे युद्ध नहीं करेगा। मेरा यह रूप न तो मनुष्य है और न देवता ही।’

ऐसा कहकर भ्रामरी देवी के आदेशानुसार उनके चारों ओर मंडराते असंख्या भ्रमर उस दिशा में चल पड़े जहाँ अरूण का निवास था।

बड़े वेग से उड़ने वाले उन भ्रमरों ने दैत्यों के शरीर को छेद डाला। थोडे ही समय में जो देत्य जहाँ था, भ्रमरों द्वारा दी गयी पीड़ा से वहीं मर गया। अरूण दानव भी अपने बचाव में कुछ न कर पाया। उसके सभी अस्त्र-शस्त्र विफल हो गये। भ्रामरी देवी के रूप में माता ने ऐसी लीला दिखायी कि ब्रह्मा जी के वरदान की भी लाज रह गयी और अरूण दैत्य से भी छुटकरा मिल गया।

कदमताल पर प्रकाशित पौराणिक कहानियों की सूची


आपको Hindi story माँ भ्रामरी देवी की अवतार कथा  Maa Bhramari Devi avatar katha कैसी लगी, कृप्या कमेंट बाक्स पर साझा करें।

आपके पास यदि Hindi में कोई article, story, essay है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ kadamtaal@gmail.com पर E-mail करें. हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ प्रकाशित करेंगे|

Random Posts

  • kachua aur bandar कछुआ और बंदर

    कछुआ और बंदर – Moral Story in Hindi Tortoise and Monkey  बंदर (Monkey) और कछुए (Tortoise) की यह मोरल स्टोरी (moral story) अफ्रीका के जनमानस के बीच में बहुत प्रचलित है। कहानी इस प्रकार है कि बंदर चालबाज और शैतान है जिसे जानवरों को तंग करने में मजा आता है। एक शाम उसने देखा कि एक कछुआ धीरे-धीरे अपने घर की […]

  • यात्रा यात्रा (Tour)

    Essay on यात्रा (Tour and Travelling) in Hindi यात्रा (Tour and travelling) विषय पर चोैकिए मत, मैने तो ऐसे ही बात छेड़ दी। मुझे लगा आप लोग सफर की तैयारी कर रहे हैं, कहीं आपको कुछ लाभ ही मिल जाए। यात्रा (Tour and travelling), कितना छोटा सा शब्द है जिसमें छिपा है एक परिवर्ततन, जिज्ञासा, इच्छा, जानकारी, आत्मिक संतुष्टि, मिलन […]

  • क्रोध क्रोध पर विजय। Motivational Story

    क्रोध पर विजय । Motivational Story बहुत प्राचीन बात है। किसी गाँव में एक बुर्जुग महात्मा रहते थे। दूर-दूर से लोग शिक्षा गृहण करने के उद्देश्य से अपने बच्चों को उनके आश्रम में भेजते थे। एक दिन महात्मा जी के पास कमल नाम का एक अधेड़ उम्र का व्यक्ति आया। ‘गुरु जी मुझे अपने श्रीचरणों में जगह दे दीजिए। अब मेरी […]

  • hope in hindi उम्मीद न छोड़ें! सफलता अवश्य मिलेगी।

    उम्मीद न छोड़ें! सफलता अवश्य मिलेगी। Dont Loose Hope in Hindi हम सभी अपने प्रोफेशन जीवन की यात्रा बहुत से सपनों, लक्ष्यों, उम्मीदों और प्रेरणाओं के साथ आरम्भ करते हैं। उस समय सफलता के लिए हमारा मूल मंत्र और सूत्र होता है-मैं जीतूंगा (I will win)। हम अपने जीवन में समाज को कुछ कर दिखाने और बनने की योजना बनाते […]

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*
*