आधुनिक अफ्रीकी साहित्य के जनक – चिनुआ अचेबे

आधुनिक अफ्रीकी साहित्य के जनक – चिनुआ अचेबे
Father of Modern African Literature – Chinua Achebe in Hindi

चिनुआ अचेबे (Chinua Achebe) वर्तमान काल के महानतम उपन्यासकारों में से एक हैं। उनकी कहानियों का विषय-वस्तु अफ्रीकी जनमानस था। उनकी पुस्तकों का रूपांतरण चालीस से भी अधिक भाषाओं में हुआ है जो कि दुनियाभर में बहुत लोकप्रिय हैं।

चिनुआ अचेबे का जन्म 15 नवम्बर, 1930 में पूर्वी नाइजीरिया के उजीडी शहर में हुआ था। उनका परिवार इगबो जनजाति से ताल्लुक रखता था जिसने बाद में ईसाई धर्म स्वीकार कर लिया। परिवरिश ईसाई संस्कारों मे होते हुए भी पारंपरिक संस्कार और रीति-रिवाजों के प्रति उनका बहुत अधिक लगाव था।

अचेबे पढाई में बहुत तेज थे। उन्हें मेडिशन की पढाई के लिए स्कोलरशिप मिल गयी। उन्होने काॅलेज में एडमीशन भी ले लिया। एक दिन उन्होंने जोसेफ कोनरेड और जाॅन बुचन की पुस्तकें पढ़ी। उन पुस्तकों में अफ्रीकी लोगों का चित्रण गलत और अपमानजनक ढंग से किया गया था। यह सब पढ़कर उनको बहुत बुरा लगा। उन्होने ठान लिया कि वे Africa की सही तस्वीर दुनिया के सामने रखेंगे।

उन्होंने मेडिशन पढ़ाई की छोड़कर English Literature में दाखिला ले लिया। इसलिए उन्हें अपनी स्कोलरशिप से भी हाथ धोना पड़ा।

वे अपनी पारंपरिक अफ्रीकी संस्कृति से बहुत प्रभावित थे। उन्होने इस विषय में छोटी-छोटी कहानियां काॅलेज काल से ही लिखनी शुरू कर दी। उनके द्वारा 1958 में लिखा गया पहला नाॅबल Things Fall Apart जिसमें Africa में उपनिवेशवाद के प्रभाव का बहुत ही मार्मिक चित्रण है। इस पुस्तक की अभी तक 1 करोड़ से भी ज्यादा प्रतियाँ बिक चुकी हैं।

1960 के मध्य में नाईजीरिया में राजनीतिक अस्थितरता का दौर आ गया। इगबो जनजाति जिन्होंने नाईजीरिया की आजादी में अहम भूमिका निभाई थी। उन्हें लग रहा था कि उनके साथ दोयम दर्जे का व्यवहार किया जा रहा है। वहां पर विद्रोह शुरू हो गया और बियाफ्रा क्षेत्र ने अपने-आप को अलग देश घोषित कर दिया। इस काल में Chinua Achebe ने नाईजीरिया की कुटिल राजनीति को केन्द्रबिन्दु में रख कर A Man of the People (1966) उपन्यास की रचना की।

1967-70 तक Chinua Achebe ने इस अलग राज्य के विशेष प्रतिनिधि के रूप में कार्य किया। उन्होंने दुनियाभर की यात्रायें की और ईग्बो लोगों का कल्लेआम, शोषण और संघर्ष को दुनिया के सामने रखा। उन्होंने बियाफ्रा के संघर्ष पर विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं और अखबारों में लेख लिखे।

1972 में अचेबे अमेरिका चले गये। वहां उन्होंने एमहर्स्ट (Amherst) के मैसाचुसेट्स विश्वविद्याल (University of Massachusetts) में अंग्रेजी के प्रोफेसर के पद पर कार्य किया। 1976 में वे नाईजीरिया वापिस आ गये। 1987 में उन्होंने Anthills of the Savanna उपन्यास लिखा। इस उपन्यास में बचपन के तीन दोस्तों की कहानी है जिनकी तीव्र इच्छा राष्ट्रपति बनने की है। इस उपन्यास के प्रकाशित होने के बाद वे फिर अमेरिका चले गये।

1990 में वे अपने 60वें जन्मदिन मनाने के लिए देश वापिस आये। वहां उनके साथ एक भयंकर सड़क दुर्घटना हो गयी जिससे उनके कमर के नीचे की हिस्से में लकवाग्रस्त हो गया। ईलाज के लिए वे अमेरिका चले गये और स्थाई रूप से वहीं बस गये।

1999 में 9 साल के बाद वे अपने देश वापिस आये। वहां उनको अपने पैतृक गांव में उनको समाज के प्रति उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

2007 में अचेबे को उनके कार्य के लिए मेन बूकर अंतराष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। पुरस्कार देते समय जजों में से एक दक्षिण अफ्रीकी नाॅबल पुरस्कार विजेता नादिन गोरडिमर ने उन्हें आधुनिक अफ्रीकी साहित्य के जनक (Father of Modern African Literature) कह कर सम्मानित किया था।

अचेबे को दो बार 2004 और 2011 में नाईजीरिया का सर्वोत्तम पुरस्कार की घोषणा की गयी लेकिन उन्होंने पुरस्कार को यह कहकर ठुकरा दिया कि उनके क्षेत्र में लोगों की स्थिति में सुधार के लिए सरकार कोई प्रभावी कार्य नहीं कर सही है। वहां जनता की स्थिति बहुत खराब है। राष्ट्रपति ने उनके पुरस्कार ठुकराने पर निराश व्यक्त की थी लेकिन साथ ही कहा कि वे न सिर्फ नाईजीरिया के बल्कि पुरे Africa का सम्मान और गौरव हैं तथा वे अपने समय के Africa के सबसे महान व्यक्त्वि हैं।

अचेबे का देहान्त 21 मार्च 2013 को 81 वर्ष की आयु में बोस्टन, अमेरिका में हो गया।

चिनुआ अचेबे के अनमोल विचार
Motivational Quotes of Chinua Achebe in Hindi

गुस्सेल आदमी हमेशा बेवकूफ रहता है।
An angry man is always a stupid man.


यदि आप कहानी का एक ही पक्ष सुनते हैं, आपको कुछ भी समझ नहीं हो पायेगी।
If you only hear one side of the story, you have no understanding at all.


कायर अपनी बातों से ही भूमिका बांधते हैं जब लड़ाई का समय आता है तो वे भाग खड़े होते हैं।
A coward may cover the ground with his words but when the time comes to fight he runs away.


कभी-कभी एक साल के नुकसान की भरपाई के लिए दस-बीस साल लग जाते हैं।
The damage done in one year can sometimes take ten or twenty years to repair.


कोई यह नहीं बता सकता कि मैं कौन हूँ। आप मेरे कुछ हिस्सों का वर्णन तो कर सकते हैं, लेकिन मैं कौन हूँ और मेरी क्या जरूरत है, वह तो मुझे खुद ही खोजना होगा।
Nobody can teach me who I am. You can describe parts of me, but who I am – and what I need – is something I have to find out myself.


एक महान कहावत है-जब तक शेर के अपने इतिहासकार होंगे, तब तक शिकार के इतिहास में शिकारी का ही गुणगान होगा।
There is that great proverb — that until the lions have their own historians, the history of the hunt will always glorify the hunter.


यदि पानी आपके टखने तक आ जाये, तब ही आपको बचाव में कुछ करना होगा, तब नहीं जब पानी आपके गले तक आ जाये।
if you find water rising up to your ankle, that’s the time to do something about it, not when it’s around your neck.


जब पागल आदमी नंगा चलता है तो शर्म उसके सगे-सम्बन्धी को लगती है, उसे नहीं।
When a mad man walks naked, it is his kinsmen who feel shame, not himself.

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