सड़कछाप से सफलता का सफर

सड़कछाप से सफलता का सफर
Street Life to High Life – Inspirational Hindi story of Frank O’Dea

हम सबके लिए प्रेरणा के स्रोत Frank O’Dea कनाडा की सबसे बड़ी काॅफी श्रृंखला ‘सेकेंड कप’ के सह-संस्थापक आज एक सफल उद्यमी, मानवतावादी और लेखक हैं। पर वे हमेशा से ऐसे नहीं थे। वे शराब पीने के आदी, गुजारे के लिए राहगीरों से पैसे मांगते तथा आश्रयस्थल में रात गुजारा करते थे। यही उनकी नियमित दिनचर्या थी।

Frank O’Dea मोन्ट्रल वेस्ट, कनाडा में पले बढ़े थे। 13 वर्ष की आयु में उन्होंने पहली बार शराब पी। धीरे-धीरे उनको शराब की लत लगती चली गई। 18 वर्ष की आयु होते-होते तो वे परिवार के लिए बहुत अधिक परेशानी का कारण बन गये। स्कूल न जाना, शराब पी कर घर आना, सड़क पर शराब पीकर उधम मचाना उनका रोज का काम बन गया।

जब Frank O’Dea 21 वर्ष के हुए तो एक दिन पिता जी ने उनको अपने पास बैठाया और कहा कि परिवार के सम्मान के खातिर तुम कहीं और चले जाओ। पर वहां एक उम्मीद की किरण भी थी। पिता जी ने अपने जानपहचान के किसी व्यक्ति को कहकर उनके लिए एक पेन्ट की दुकान में सेल्समेन की नौकरी की व्यवस्था करवा दी।

कुछ महीनों तक सब-कुछ ठीक-ठाक चल रहा था। लेकिन शराब की लत तो जैसे छूट ही नहीं रही थी इसी कारण दुकानदार ने उन्हें नौकरी से निकाल दिया। अब तो उनके लिए खर्चे पानी के भी लाले पड़ गये। घर से तो पहले ही निकाल दिये गये थे। अतः शराब की लत पूरी करने के लिए राहगीरों से पैसे मांगते और रात आश्रयघर में बिताते।

यह सिलसिला काफी समय तक चलता रहा। एक दिन एक स्टोर आनर ने उन्हें हल्के-फुल्के काम के लिए रख लिया। स्टोर में एक रेडिया था जिसमें सिर्फ एक ही स्टेशन आता था। एक दिन रेडियो सुनते समय शराब की लत छु़ड़ाने वाला एक मैसेज आ रहा था। वह मैसेज उनके दिमाग में बैठ गया। उन्होने महसूस किया कि एैसा कब तक चलेगा। उन्हें अपनी इस लत को किसी भी तरह छोड़नी है और अपने आत्मनिर्भर बनाना है।

अब वे बहुत ही गंभीरता से नौकरी ढूंढने लगे। पहले छः माह वे लगभग बैरोजगार ही रहे क्योंकि उनके बायोडाटा में दिखाने के लिए तर्जुबे के नाम पर इधर-उधर से पैसे मांग कर गुजार करने के अलावा तो कुछ था ही नहीं।

किसी ने उन पर दया करके नौकरी दे दी। उन्होने दिन-रात कड़ी मेहनत की। अतः अब स्थिति में धीरे-धीरे सुधार होने लगा। 1974 तक वे अच्छे सेल्समेन बन गये। अब वे कंस्ट्रक्शन का सामान बेच रहे थे।

एक दिन चुनाव के समय किसी राजनीतिक पार्टी के प्रचार करते समय हमउम्र साथी प्रचारक के साथ उनकी मित्रता हो गयी। उन्होंने मिलकर एक सेकेंड कप (Second Cup) नाम से काॅफी शाप खोलने का फैसला किया। उनकी कड़ी मेहनत से बहुत जल्दी ही यह छोटी दुकान बढकर कनाडा की सबसे बड़ी काॅफी शाॅप श्रृंखला बन गयी।

कुछ समय बाद अक्सर जैसे होता है, दोनो पार्टनरो के बीच मतभेद होने लगे जिसके कारण Frank O’Dea ने अपने आप को व्यवसाय से अलग कर दिया।

लेकिन, इस बार वे दुबारा शराब की तरफ नहीं गये। उन्होंने शांत मन से चिन्तन किया और महसूस किया कि उन्होंने कुछ खोया नहीं बल्कि बहुत कुछ पाया है उन्होने आत्मसम्मान, कारोबार, परिवार और मित्र पाये हैं … और सबसे आगे उन्होंने अपने आप को पहचाना है।

आज वे कई अंतराष्ट्रीय कम्पनी जैसे प्रोर्सड सिक्यूरिटी, वार चाइल्ड कनाडा, स्ट्रीट किड्स इंटरनेशनल और कनेडियन लेंडमाइन फाउंडेशन जैसी नामी गिरामी समाज कल्याण और बड़ी प्राइवेट संस्थाओं के सहसंस्थापक और चेयरमेन हैं साथ ही साथ वे जानेमान मोटिवेशनल स्पीकर (Motivational Speaker) और कई मोटिवेशनल पुस्तकों (Inspirational Books) के लेखक भी हैं। वे हम सबके लिए निश्चित रूप से महान प्रेरणा के स्रोत हैं और उनकी जीवन कथा हम सबको जीवन में आगे प्रगति के मार्ग में बढ़ने के लिए प्रोत्सहित करती रहेगी।

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One thought on “सड़कछाप से सफलता का सफर

  1. सुबह का भूला शाम को घर लौट आये तो उसे भूला नहीं कहते
    बढ़िया प्रेरक कहानी !

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