अपने आपको जोकर न बनायें

आप सबको खुश नहीं रख सकते You cannot make everyone happy

मित्रों कभी न कभी तो आप सर्कस गये ही होंगे। वहां लोगों को हंसाने-गुदगुदाने के लिए एक पात्र आता है-जिसे जोकर (joker) कहते हैं। जो अपने चेहरे को अजीब से रंगो और मुखेटे से ढके रहता है। मुझे लगता है जोकर ही वह किरदार है जिसमें हर किसी को खुश (happy) करने की अपूर्व क्षमता होती है। वे खुद की मजाक उड़ाते हैं जिससे कि लोग खुश रहें। वे तरह-तरह के खतरे भी उठा लेते हैं। वे लोगो को अपने असली चेहरे से परिचय नही करवाते हैं। अतः वहां इनकी कोई स्वयं की पहचान ही नहीं हो पाती है।

हमारे आसपास के लोग हमारे बारे में क्या सोच रहे हैं, हम इस बात का काफी ध्यान रखते हैं। हम दूसरों के विचारों को लेकर अत्यंत संवेदनशील (emotional) रहते हैं। यह काफी हैरानीपूर्ण है, पर यह सत्य jokarहै कि हममें से अधिकतर का दैनिक क्रियाकलाप (daily activity) अन्य लोगों के विचारों से प्रभावित रहता है। अगर आप भी ऐसा ही कर रहे हैं तो आप अपने उसूलों के साथ समझौता कर रहे हैं, आप अपनी खुशियों और सपनों (dream and happiness) को कुर्बान (sacrifice) कर रहे हैं।

आप अपनी उच्च शिक्षा के विषय माता-पिता की इच्छाओं को ध्यान में रखकर चुनते हैं। शायद पढ़ाई के बाद भी आप में से अधिकतर लोग उस नौकरी या व्यवसाय को चुनते हैं जिसको कि आप पसन्द (like) नहीं करते सिर्फ इसलिए कि आपके-अपनों का यही सपना था। यहां तक कि शादी जैसे महत्वपूर्ण फैसले भी परिजनों की पसंद से ही होता है।

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बेशक, बड़े-बुर्जुगों, मित्रों बात मानना, दूसरों की मदद करना एक सराहनीय कार्य है। सोच कर कितना अच्छा लगता है कि सब एक दूसरे का ध्यान रखें और अपनी जरूरतों से पहले दूसरों की जरूरतों के बारे में सोचें। यह मानवता और भाईचारे का अनुपन उदाहरण होता है।

लेकिन क्या हो यदि आपकी निस्वार्थता आपका चरित्र बन जाये? क्या हो यदि आप दूसरों को खुश करने के लिए अपनी इच्छाओं और भावनाओं का त्याग दें? क्या हो यदि आपकी पूरी जिन्दगी दूसरों के सपनों और इच्छाओं का कूड़ाघर बन जाये?

आपको यह सीखना होगा कि कोई आपके स्वभाव का फायदा न उठा सके। आपको ना (No) बोलना आना चाहिए। आपको यह निश्चय करना होगा कि जो आपको पसंद नहीं है उस पर आप अपना विरोध (objection) व्यक्त कर सकें।

बेशक, स्वार्थी होना अच्छा नहीं है। मैं यह नहीं कह रहा हूँ कि आप पूरी तरह दूसरों की उपेक्षा करें और केवल अपना ही ख्याल रखें। इतने स्वार्थी होने पर आप अपने मित्र खोयेंगे और साथ-ही-साथ परिवार के साथ विश्वासघात करेंगे जिनका सपना आपको सफल (successful) होना देखना है।

पर मैं यह भी कहता हूँ कि किसी को भी अपनी निस्वार्थ प्रकृति और दयालुता का फायदा न उठाने दें। यह हो सकता है कि आपके मित्र या परिवार वाले आपके इस स्वाभाव से जानबूझ कर लाभ (benefit) न उठा रहे हों, उन्हें यह अनुभूति ही न हो रही हो कि अनजाने में उनसे क्या हो रहा है।

आखिर हम बार-बार हारते क्यों है? Why we defeat? 

आपको यह जानना सीखना होगा कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए कई बार कठोर निर्णय (hard decision) लेने पड़ते हैं उसके लिए आपको हमेशा तैयार रहना चाहिए। यह विचार मत करिए कि लोग आपके बारे में क्या सोचते हैं बल्कि यह विचारें कि आप अपने लिए क्या करते हैं। आप कितना समय लोगों के बारे मे सोच कर बिताते हैं और कितना आप अपने लिए सोचते हैं?

आप हर किसी को खुश नहीं रख सकते

एक दिन कोई आदमी अपने बेटे और गधे के साथ बाजार जा रहा था। रास्ते में एक जोड़े ने उन पर ध्यान दिया। उन्हें आश्चर्य हुआ कि बाप-बेटे पैदल चल रहे हैं।

‘आप अपने बेटे को गधे के ऊपर क्यों नहीं बैठाते?’ पति ने पूछा।

बेटा चहक उठा‘-‘पापा मुझे बैठाओ’। बेटा गधे के ऊपर बैठ गया। बाप-बेटे आगे अपने रास्ते में चल पड़े

कुछ दूरी पर उन्हें एक अन्य जोड़ा मिला।

‘तुझे शर्म आनी चाहिए’ महिला चिल्लाई। ‘बेचारा बर्जुग आदमी पैदल चल रहा है और तुम आराम से सवारी कर रहे हो। अपने पिताजी को बैठने दो, क्या वे थक नहीं गये होंगे’

बच्चा गधे पर से उतर गया और पिताजी बैठ गये। वे आगे अपने रास्ते चल पड़े।

‘बेचारा बच्चा’-रास्ते में एक व्यक्ति ने कहा, ‘सुस्त बाप तो सवारी कर रहा है और बेटा पैदल चले जा रहा है।’

अतः अब लड़का भी गधे पर बैठ गया।

आगे बढ़ने पर उन्हें कुछ यात्री दिखे।

‘कितने निदर्यी हैं ये। ये लोग तो गधे को मार ही डालेंगे’– उनमें से एक यात्री चीखा।

यह सुनकर पिता और बेटा उतर गये। अब उन्होंनें फैसला किया कि गधे को कंधों पर ले जाया जायेगा। उन्होंने ऐसा किया भी।

यह देखकर यात्रियों की हंसी छूट पड़ी। इससे गधा एकदम बिचलित हो गया और पिता-पुत्र के बाजुओं से अपने को छुड़ा कर भाग निकला।

इस कहानी से हम यह जान पाते हैं कि आप हर किसी को खुश नहीं रख सकते हैं। सभी को खुश रखने के चक्कर में तो कहीं आप अपने साथ ही अन्याय तो नहीं कर रहे हैं। आप लोगो को महत्व दें, उनकी बात सुनें, उनकी इज्जत (respect) करें, लेकिन उनकी इच्छा पर मत चलो, नहीं तो आप उनकी इच्छा पूरी करते-करते ही अपना जीवन चक्र पूरा कर डालेंगे और अंत में आपका अपना कोई अस्तित्व ही नहीं रहेगा।

छोटी-छोटी घटनाओं को लोग मन से नहीं लगाते

दोस्तों हमें हर किसी को खुश (please) रखने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। हमें अपना ध्यान अपने लक्ष्य की तरफ होना चाहिए, न की लोगो को खुश रखने के लिए।

आपका दोस्त सिर्फ इसलिए आपसे दोस्ती (friendship) नहीं तोड़ेगा कि आप उसे बस-अड्डे तक छोड़ने नही जा पाये। यदि आप वास्तव में व्यस्त (busy) नहीं हैं तो अपने दोस्त को छोड़ने अवश्य जायें। यदि आप नहीं जा पाते हैं तो इससे खास फर्क नहीं पड़ता। इस छोटी सी बात को दोस्त अपने मन में अधिक समय तक नहीं रखने वाला, आखिर वो भी तो इंसान ही तो है उसकी भी कई मजबूरियाँ होती हैं।

समय कड़वी यादों को भुला देता है

हर इंसान अपने जीवन में पीछे की बात भूलकर आगे की तरफ बढ़ता हैं। जब आप अपने माता पिता को अपनी इच्छा के बारे में बताते हैं कि आप इस फिल्ड कार्य करना चाहतेे हैं। तो उनको निराशा तो जरूर होगी। वे आपसे नाराज हो सकते हैं। शायद कुछ समय तक बात न करें। लेकिन समय के साथ-साथ वे यह सब भूल कर आपका साथ देने लगेंगे।

आपको पता होना चाहिए कि आपके लिए सबसे अच्छा क्या है

आप ही अपनी जरूरतों के बारे में जानते हैं और यह भी जानते हैं कि आप कैसे खुश (happy) रह सकते हैं। कैसे दूसरों की बातों को सुनकर, उनकी इच्छाओं और सपनों को पूरा करने से आपको लाभ होगा? आपकी आकांक्षायें और इच्छायें सबसे अलग हैं। इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि आपने जो सपने देखें है उसकी रक्षा करें और उसे मंजिल तक पहुंचायें।

अपने सपनो के लिए जीयें

आप यह याद रखें कि आप अपने जीवन के खुद ही हीरो हैं, न कि कोई सहायक कलाकार। यह आपका जीवन है, आपके अपने भी सपने हैं जिसको पूर्ण करने की जिम्मेदारी सिर्फ और सिर्फ आपकी है।

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6 thoughts on “अपने आपको जोकर न बनायें

  1. सही कहा आपने. हमें ना और हाँ के बीच सही तालमेल बनाकर रखना चाहिए. न ही हमेशा ना कहने की आदत होनी चाहिए और न ही हाँ कहने की उत्सुकता.

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