हमारे वैज्ञानिक: हरीश चंद्र (Harish Chandra)

डा. हरीश चंद्र (Dr. Harish Chandra) समकालीन पीढ़ी के अद्वितीय गणितज्ञों में से एक थे। उन्होने अनंत आयामी समूह प्रतिनिधित्व  के सिद्धान्त (Representation Theory) को अपने शोध के द्वारा गणित और फिजिक्स के महत्वपूर्ण शाखा में विकसित किया।

उनका जन्म 11 अक्टूबर 1923 में कानपुर में हुआ था। माता जी का नाम सत्यगति सेठ व पिता जी का नाम चन्द्रकिशोर था जो कि पेशे से एक सिविल इंजीनियर थे। हरीश चंद्र (Harish Chandra) का बचपन अपने नाना जी के पास कानपुर में बीता। उनकी प्रारंभिक शिक्षा घर में ही हुई। नृत्य और गायन में रूचि के कारण उनको घर में वकायदा ट्यूशन के द्वारा इसकी भी शिक्षा दी गयी। वे अक्सर बीमार रहते थे पर बचपन से ही पढ़ाई में काफी तेज थे। उनकी हाईस्कूल की शिक्षा कानपुर के क्राइस्ट चर्च हाईस्कूल से हुई। सोलह वर्ष की उम्र में उन्होंने इंटरमीडिएट की परीक्षा पास कर ली थी। बीस साल की उम्र तक उन्होनें एम.एस.सी. की डिग्री इलाहाबाद विश्वविद्यालय से प्राप्त की। उनके लिए यह बहुत गौरव की बात थी कि एम.एस.सी. की परीक्षा के समय महान वैज्ञानिक श्री सी.वी. रमण (C.V. Raman) उनके परीक्षक थे। वे इलाहबाद विश्वविद्यालय के पहले छात्र थे जिसने लिखित परीक्षा में 100 प्रतिशत अंक प्राप्त किये थे।

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आगे की शिक्षा के लिए वे बैंगलोर के इंडियन इंस्टीट्यूट आॅफ साइंस चले गये जहां उन्होंने वैज्ञानिक होमी जहांगीर भाभा (Homi Jehangir Bhabha)  के मार्गदर्शन में शोध कार्य किया। श्री भाभा ने चंद्रा की प्रतिभा को पहचाना और उन्हें पाॅल डेरिक (Paul Dirac) के साथ काम करने के लिए केम्ब्रिज यूनिवर्सिटी भेजा जिनके संदिग्ध में भाभा ने खुद भी शोध कार्य किया था। लंदन मे बाद के दिनों में उनकी रूचि फिजिक्स से हटकर गणित की तरफ हो गयी थी। केम्ब्रिज मे उन्होंने वाॅल्फगैन्ग पाॅली (Wolfgang Pauli) (जिनको नोबल पुरस्कार से भी नवाजा गया) के लैक्चर सुने और पाॅली की एक गलती पर अपनी टिप्पणी और सुझाव दिया। इस घटना के बाद तो पाॅली और चंद्रा के बीच जीवन भर के लिए मित्रता हो गई। 1947 ई. में चन्द्रा ने अपनी पी.एच.डी. डिग्री प्राप्त की।

उसी साल 1947 ई में डेरिक (Paul Dirac) इंस्टीट्यूट आॅफ एडवांस्ड स्टडीज, प्रिंसटन (अमेरिका) गये तो वे चंद्रा को भी अपने साथ असिस्टेंट के रूप में ले गये। यहां चंद्रा (Harish Chandra) की मुलाकात कुछ जाने-माने गणितिज्ञों से हुई जिनका उनके जीवन पर काफी गहरा प्रभाव पड़ा। यही वह समय था जब चंद्रा (Harish Chandra) ने फिजिक्स के स्थान पर गणित में ध्यान केंद्रित करना शुरू कर दिय। डेरिक एक साल बाद केंब्रिज वापिस आ गये लेकिन चंद्रा वहीं रूक गये।

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1950 से 1963 तक के तेरह वर्ष उन्होने गम्भीर तर्क के सहारे गणित में शोध कार्य किया। इस काल में उन्होनें कोलबिंया यूनिर्वसिटी में फेकेल्टी के रूप में कार्य किया लेकिन बीच-बीच में उन्होंने अन्य संस्थानों में भी कार्य किया। 1952-53 में वे टाटा इंस्टीट्यूट, मुम्बई में थे यह वही समय था जब वे ललीता काले के साथ विवाह बंधन में बधें थे। उनकी दो पुत्रियाँ हुई। 1955-56 के बीच वे इंस्टीट्यूट आॅफ एडवान्सड स्टडीज, प्रिंस्टन में रहे। वे 1957-58 में गुगेनहीम और 1961-63 के बीच स्लोन फेलो रहे।

वे 1968 से अपने जीवन के अंतिम दिनों तक इंस्ट्यिूट आॅफ एडवांस्ड स्टडीज, प्रिंसटन के गणित विभाग में आईबीएम के वाॅन नौयमैन प्रोफेसर रहे।

सम्मान व पुरस्कार

  • 1954 में हुए अंतराष्ट्रीय मेथमेटिशय कांग्रेस के प्रवक्ता रहे।
  • 1954 में अमरीकन मैथमैटिकल सोसाइटी का कोल पुरस्कार प्रदान हुआ।
  • 1973 में उन्हें राॅयल सोसाइटी की फेलोशिप से सम्मानित किया गया।
  • 1973 में उन्हें दिल्ली यूनिर्वसिर्टी ने डाॅक्टरेट डिग्री प्रदान की।
  • 1974 में इंडियन नैशनल साइंस एकेडमी का श्रीनिवास रामानुजम पुरस्कार।
  • 1975 में उन्हें इंडियन एकेडमी आॅफ साइंसिस और नेशनल साइंस एकेडमी की फैलोशिप प्रदान की गई।
  • 1977 में उनको पदमभूषण से सम्मानित किया गया।
  • 1981 में उन्हें अमेरिकी नेशनल एकेडमी आॅफ साइंस की सदस्ता प्रदान की गई।
  • 1981 में येल यूनिर्वसिटी ने डाॅक्टरेट की डिग्री प्रदान की।
  • वे टाटा इंस्टीट्यूट आॅफ फंडामेन्टल रिसर्च के सम्मानित सदस्य भी थे।
  • भारत सरकार ने उनके सम्मान में इलाहाबाद में गणित और भौतिकी के क्षेत्र में बुनियादी शोध करने वाली संस्था का नाम हरीश चंद्र रिसर्च इंस्टीट्यूट रखा।

श्री हरीशचंद्र (Harish Chandra) दिल की बीमारी से काफी समय से पीड़ित थे। उनको पहला दिल का दौरा 1969 में पड़ा था। 1983 में जब प्रिंसटन में गणितज्ञ अरमांड बौरेल (Armand Borel) की साठवीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में एक समारोह चल रहा था, उसी समय उनको चोथा दिल का दौरा पड़ा और उन्होनें इस भौतिक संसार से हमेशा-हमेशा के लिए विदा ले लिया।

पूरी लिस्टः Indian Scientist – भारत के महान वैज्ञानिक


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4 thoughts on “हमारे वैज्ञानिक: हरीश चंद्र (Harish Chandra)

  1. गागर में सागर भरने का काम किया है आपने, बड़े ही कम शब्दों में अच्छी व्याख्या। … Thanks for sharing this!! 🙂

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