जीवन में सफल होने के लिए क्या करें?

जीवन में सफल होने के लिए क्या करें?
How to be successful in life in Hindi?

हम सब जीवन के अपने-अपने क्षेत्र में सफल (successful) होना चाहते हैं। सब इसके लिए जी-तोड़ पर प्रयास भी करते हैं। हमारे सामने यह सवाल हर समय कौंधता है कि आखिर जीवन में सफल होने के क्या उपाय है तथा तेजी से सफलता के लिए क्या करें? सफलता के सूत्र क्या हैं? यह कैसे प्राप्त की जाए और कैसे आगे बढ़ें? 

मैंने नीचे लिखी चार बातों का विश्लेषण कर उदाहरण के साथ मोटिवेशनल स्टोरीज के रूप में दी हैं जिसमें बताया गया है कि जीवन में सफल होने के लिए इनको अपनी आदत में उतारना कितना आवश्यक है।

  • नया सोचते रहें – Think innovative
  • अपने आप पर भरोसा रखें – Believe in yourself 
  • अपनी गलतियों से भी कुछ प्राप्त करने का प्रयास करें – Learn from defeat
  • मिले हुये सहयोग पर आभार जताना न भूलें –  Don’t forget to express gratitude

नया सोचते रहें  – Think innovative

आइसक्रीम कोन का अविष्कार (Invention of Ice cream Cone): सेंट लुइस, मिसौरी (अमेरिका) में 1904 ई. मे एक बड़ा प्रदर्शनी मेला लगा था। इस मेले में पहली बार आइस्क्रीम कोन (icecream cone) बनाये और बेचे गये थे। यह करिश्मा करने वाले साहब का नाम था चाल्र्स मेन्शेस जो कि आइसक्रीम विक्रेता थे। यह अविष्कार उन्होने कोई सोची समझी योजना के अनुसार नहीं किया था। यह तो अनायास ही परिस्थिति की आवश्यकता के अनुसार नई सोच से घटित हुआ था।

उस समय आइसक्रीम प्यालियों (ice cream cone) में रखकर ग्राहकों को परोसा जाता था। उस दिन बहुत गर्मी पड़ रही थी और चाल्र्स के स्टाल पर काफी भीड़ जुटी हुई थी। ग्राहक इतने ज्यादा थे कि प्याले और कटोरे कम पड़ गये। चाल्र्स के सामने समस्या थी कि आइसक्रीम बहुत बची हुई थी उनको वह अब परोसे तो परोसे कैसे?

परेशान चाल्र्स का दिमान इस समस्या को सुलझा लेना चाहता था। उसने इधर-उधर नज़र दौड़ानी शुरू कर दी कि शायद कुछ उपाय ही दिख जाए। अचानक उसकी नजर सामने स्टाल पर पड़ी। उस स्टाल में उसका मित्रा अर्नेस्ट हेमवी जलाबिया नामक एक खाद्य पदार्थ बेच रहा था। यह एक कुरकुरी वेफर समान पेस्ट्री हुआ करती थी जिसे गाढ़े रस में डुबो का खाया जाता था। चाल्र्स ने हेमवी की सहायता से पेस्ट्री को कप के रूप में मोड़ा। जल्दी ही वह कोन ठण्डी हो कर ठोस हो गयी। चाल्र्स ने उस कोन मे आइसक्रीम भरकर अपने ग्राहकों को देने शुरू कर दिया। लोेगों को यह कोन-आइसक्रीम (cone icecream) बहुत पसंद आयी। इसका प्रचलन शुरू हुआ।

तो देखा आपने इस Hindi motivational story में कैसे परिस्थिति के अनुसार सोचने और निणर्य लेने की क्षमता ने एक अविष्कार को जन्म दिया।

सफलता का सूत्र है-हमेशा नया सोचें और अपने कार्य करने के तरीके को बेहतर करने का प्रयास करते रहें। जब आपके सामने कोई कठिन परिस्थिति आये, उसमे सिर्फ सफल होने की बात को सोचें। Always think about success. असफलता (failure) के बारे में चिन्तन करने से आपका दिमाग ऐसे विचार सोचता है जिनसे केवल आपको जीवन मे असफलता (failure in life) ही हाथ लगती है। अपने आपको सिखाने का जिम्मा सिर्फ आपका ही है। दूसरा आदमी आपको यह नहीं बतायेगा कि क्या और कैसे करना है।

अपने आप पर भरोसा रखें – Believe in yourself

थामस एडिशन की सफलता का सच (Success of Thomas Edition): संवेदनशीलता होने के कारण एक या दो बार सफल न होने पर अधिकतकर लोगों के मन में असफलता का संदेह बैठ जाता है और अपनी क्षमताओं पर संदेह करने लगते हैं। किन्तु ध्यान रखिये, जो साहसी व्यक्ति इसके विपरीत सोच रखते हैं और अपनी क्षमताओं पर भरोसा बनाये रखते हैं वे कठिन से कठिन लक्ष्य को मनोबल के सहारे अवश्य निबटाकर ही दम लेते हैं। दृढ़ निश्चयी व्यक्ति विश्वासपूर्वक जिस भी कार्य में जुटते हैं वे उसे पूरा करे बगैर शांत नही बैठते चाहे उनके मार्ग में कठिनाईयों का पहाड़ ही क्यों न आ जाये।

सफलता प्राप्त न हो पाने के भय का भूत चिन्ता से भी अधिक विनाशकारी होता है। इसका परिणाम यह होता है कि व्यक्ति मनोवांछिक कार्य को सही ढंग से कर ही नहीं पाता है, वह स्तरहीन लक्ष्य के निकट यदि पहुंचा भी तो घटिया ढंग का कार्य उसे असफलता (failure) के गर्त में धकेले बिना नहीं रहता।

थामस एडिसन की हिन्दी मोटिवेशनल कहानी हम सबके सामने हैं। उनके दस हजार से भी ज्यादा बार के प्रयास पर ही बल्ब का आविष्कार संभव हुआ। उन्होने कहा था कि मैं बार-बार असफल नहीं हुआ बल्कि मैंने यह जाना कि ये वे दस हजार वे तरीके थे जिससे कि बल्ब बनाना संभव नहीं हो सकता। अब आप समझ गये होंगे की उनका success formula था-जल्दी सफलता पाने की हड़बड़ी में न रहना और  उम्मीद न छोड़ना।

अपनी गलतियों से भी कुछ प्राप्त करने का प्रयास करें – Learn from your defeat

Blotting Paper की खोज (Invention of Blotting Paper): काफी समय पहले स्याही सुखाने के लिए ब्लाॅटिंग पेपर नहीं हुआ करता था। उस समय स्याही बारीक रेत से ही सुखाई जाती थी। उस समय कागज मिल मे कागज को चिकना और लिखने योग्य बनाने के लिए सरेस का इस्तेमाल किया जाता था।

एक बार मिल में कर्मचारी कागज बनाते समय सरेस का इस्तेमाल करना भूल गये। तैयार कागज को मैनेजर ने देखा तो उसके होश उड़ गये। भारी नुकसान हो चुका था। उसने उस पर लिखने का प्रयास किया पर उस पर लिखना संभव ही नहीं हो पा रहा था। उसने गुस्से से पास रखी दवात पेपर पर उड़ेल दी। पर यह क्या वह पेपर सारी स्याही पी गया। यह देखकर एकाएक मैनेजर के दिमाग में एक विचार कौंधा। उसने उस बंडल को छोटे-छोटे टुकड़ो में पैक करवा कर ब्लाॅटिंग पेपर का नाम देकर बाजार में भिजवा दिया। उस समय तक स्याही सुखाने के लिए कोई सुविधाजनक साधन उपलब्ध नहीं था। अतः सारा का सारा कागज धड़ल्ले से बिक गया और इस प्रकार एक छोटी सी भूल ने एक महत्वपूर्ण अविष्कार का जन्म दिया।

इस Hindi motivational story से हमें यह सीख मिलती है कि अगर हमसे कोई गलती हो भी जाती है और हम किसी कार्य में असफल होते हैं तो हमें निराश या हतोत्साहित नहीं होना है अपितु अपने से हुई गलतियों का विश्लेषण करके भविष्य की तरफ देखना है और सफल (successful) होना है।

मिले हुये सहयोग पर आभार जताना न भूलें – Don’t forget to express gratitude

रामचन्द्र जी और गिलहरी की कहानी (Story of Ramchandra Ji and Gilhari) : यह उस समय की बात है जब रामचन्द्र जी 14 वर्ष का वनवास काट रहे थे। एक दिन छल से रावण सीता जी को जबरदस्ती उठा कर ले गया। रामचन्द्र जी और लक्ष्मण जी ने सीता जी को वन में बहुत ढूंढा मगर वह कहीं नहीं मिली। तब उनकी मदद बन्दरों के राजा सुग्रीव ने की । सुग्रीव ने हनुमान जी की मदद से सीता जी का पता लगवाया। जिनको रावण ने सोने की लंका में बंदी बना रखा था।

लंका विशाल समुद्र के पार बसा एक राज्य था जिस पर खुद रावण का राज्य था और इस समुद्र को पार करना कोई आसान कार्य नहीं था। पर सीता जी को वापिस तो लाना ही था। सब सोच में पड़ गये कि आखिर लंका तक कैसे पहुंचा जाए, तब सर्वसम्मति से यह तय हुआ कि एक पुल बनाया जाए और उस पुल को पार कर लंका पहुंचा जाए। फिर क्या था एक ही रात में रामचन्द्र जी की मदद करने और पुल बनाने के लिए सब के सब जमा हो गये। कार्य आरम्भ हो गया। हर कोई निष्ठा और आस्था के साथ श्रीराम की मदद किये जा रहा था। बस एक गिलहरी ही थी जो चाहते हुए भी श्रीराम की मदद नहीं कर पा रही थी। क्योंकि जब भी वह मदद करने के लिए आगे बढ़ती तो अन्य जानवर उसकी हंसी उड़ाते कि तुम बहुत छोटी हो रहने दो। पर उसने मन-ही-मन सोच लिया था कि वह श्रीराम की मदद कर के रहेगी। वह अपनी गोल-मोल आंखों को घुमाती रहती और इधर-उधर दौड़ती रहती यह देखने के लिए कि वह कैसे श्रीराम की मदद कर सकती है। उसके मन में विचार आया कि क्यों न शरीर में रेत लगा कर उसे पुल के पास झटका जाए जिससे कि वह अपनी क्षमता के अनुसार अधिक से अधिक सहयोग कर पाने में सफल होती। अब वह रेत पर अच्छी तरह से उलट-पुलट होने लगी जिससे ज्यादा से ज्यादा रेत उसके बदन से चिपट जाये। फिर वह पुल के पास जाकर उसे झटक देती। यह सिलसिला चलता रहा। श्रीराम यह सब देख रहे थे। वे गिलहरी के पास आये। श्रीराम ने उसकी तरफ अपना हाथ बढ़ाया और प्यार से उसकी पीठ पर हाथ फैराया और उसे आर्शीवाद दिया। सभी छोटे-बड़े जानवरों के सहयोग से पुल का निर्माण कार्य अतिशीघ्र सम्पन्न (successful) हो गया।

अब इस Hindi story को आज के परिपेक्ष में देखते हैं – हम जीवन मे अकेले अपने दम पर सफलता (success) नहीं पा सकते। हमारे आसपास बहुत से लोग हमें किसी न किसी तरह से सहयोग करते हैं। चाहे वह आलोचना के रूप में ही क्यों न हो। हमें हर सहयोग का आभार मानना चाहिए और लोगों को उनकी सहायता के लिए धन्यवाद देने में संकोच नहीं करना चाहिए।

यह भी पढ़ें: उम्मीद न छोड़ें! सफलता अवश्य मिलेगी।


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16 thoughts on “जीवन में सफल होने के लिए क्या करें?

  1. धन्यवाद इस बेहतरीन post के लिए । परिस्थिति कैसी भी क्यों न हो खुद पर विश्वास होना बहुत जरुरी होता है ।

    1. धन्यवाद बबीता जी, कदमताल की तरफ से आपको नये साल की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ।

    1. धन्यवाद निशा जी, कदमताल की तरफ से आपको नये वर्ष की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ।

  2. नये साल के शुभ अवसर पर आपको और सभी पाठको को नए साल की कोटि-कोटि शुभकामनायें और बधाईयां। Nice Post ….. Thank you so much!! 🙂 🙂

  3. जीवन को सफल बनाने के लिए बहुत कुछ करना पड़ता है। आपने अपनी पोस्‍ट में उन बिंदुओं की ओर हमारा ध्‍यान आकृष्‍ट किया इसके लिए आपका धन्‍यवाद।

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