जीवन एक प्रतिध्वनि है

जीवन एक प्रतिध्वनि है – A short moral story

दोस्तों, ईश्वर ने हमे प्रकृति का सबसे सुंदर उपहार अर्थात मनुष्य बनाकर भेजा है क्योंकि केवल एक मनुष्य ही है जो अपने विवेक से सही या गलत का निर्णय कर सकता है। इसलिए हमें वो कार्य करने चाहिए जिससे कोई आहत न हो।

एक बार की बात है एक शहर में एक बहुत धनवान सेठ की दुकान थी जो शहर में सबसे अधिक चलती थी। उसकी दुकान पर हर तरह का सामान मिलता था इसलिए उसकी दुकान पर हर समय ग्राहकों की भीड़ लगी रहती थी।

उस दुकान पर एक छोटा सा व्यापारी सेठ को मक्खन सप्लाई करता था जो कि एक गोल पेढ़े के आकार का आता था और प्रत्येक पेढ़े का वजन एक किलोग्राम था। वह जितने पेढ़े सेठ को देता था उसके मूल्य के बदले घर की जरूरत में आने वाले सामान जैसे चीनी, चावल, दालें इत्यादि ले जाता था। यह सिलसिला वर्षों से चलता आ रहा था और दोनो एक दूसरे पर पूर्ण विश्वास रखते थे।

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एक दिन वह व्यापारी उस सेठ को मक्खन के 50 पेढ़े अर्थात 50 कि.ग्रा. मक्खन देकर गया। सेठ उस पेढ़ो को एक बड़े फ्रिज में रखता जा रहा था। पेढ़े रखते-रखते सेठ के मन मे विचार आया कि क्यों न एक पेढ़े का वजन जांच कर लिया जाये। सेठ ने एक पेढ़ा तराजू पर रखा था उसका वजन 900 ग्राम निकला। सेठ ने दूसरे पेढ़े को तराजू पर रखा उसका वजन भी 900 ग्राम निकला। सेठ को क्रोध आ गया और उसने सभी पेढ़ो का वजन करवाया। उसके आश्चर्य की सीमा ही न रही जब सब पेढ़े 900 ग्राम के ही निकले।

अब सेठ आपे से बाहर हो गया। उसने तुरन्त उस व्यापारी को बुलावा भेजा। व्यापारी आया तो सेठ ने उसे पेढ़ो का वजन करके दिखाया और खूब भरा-बुला कला। तब उस व्यापारी को कहा गया कि वह सेठ को न जाने कब से धोखा देते हुए आ रहा था।

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छोटे व्यापारी ने हाथ जोड़कर बड़ी विनम्रता से उत्तर दिया कि ‘सेठ जी, मैं एक बहुत छोटा व्यापारी हूँ और मेरे पास बाट खरीदने के लिए भी पैसे नहीं थे इसलिए जब आपकी दुकान से मैं घर के लिए जरूरत का सामान खरीदता था तो सामान का एक पैकेट जो कि 1 किलोग्राम का होता था, उसे तराजू के एक तरफ बाट के स्थान पर रखकर दूसरे स्थान पर उतने ही भार के अनुसार मक्खन को रखकर तौल कर एक पेढ़ा बनाता था जो आपको सप्लाई करता था।’

सेठ को अपनी करनी समझ में आ गई कि –

ज्ञानी लोग सही कहते हैं कि जीवन एक प्रतिध्वनि है जो हम अच्छा या बुरा इस संसार को देते हैं कुछ समय बाद वही हमें प्रतिध्वनि के रूप में हमारे पास वापिस आ जाता है।  सत्य ही है कि हम दूसरों के लिए जो अच्छा या बुरा सोचते या करते हैं, हू-ब-हू वही हमें किसी न किसी तरह वापिस मिल ही जाता है।

प्रेषक: हरीश शर्मा, दिल्ली 


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2 thoughts on “जीवन एक प्रतिध्वनि है

  1. नये साल के शुभ अवसर पर आपको और सभी पाठको को नए साल की कोटि-कोटि शुभकामनायें और बधाईयां। Nice Post ….. Thank you so much!! 🙂 🙂

  2. धन्यवाद HindIndia, कदमताल की तरफ से आपको नये वर्ष की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ।

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