अनिल कुमार गयेन | Bharat Ke Mahan Vaigyanik

अनिल कुमार गयेन | Bharat Ke Mahan Vaigyanik

Our Scientist अनिल कुमार गयेन (Anil Kumar Gain) का जन्म 1 फरवरी 1919 में हुआ था। उनके माता-पिता लक्खी गांव, पूर्वी मिदनापुर के निवासी थे। उनके पिता जी का नाम जिबनकृष्ण और माताजी का नाम पंचमी देवी था। जब वे काफी छोटे थे तभी उनके पिताजी का निधन हो गया। परिवार का सारा बोझ उनकी माताजी के कंधों पर आ गया था जिसके कारण काफी गरीबी में उनका बचपन बीता।

उनकी अनौपचारिक शुरूआती शिक्षा गांव में ही हुई। आठ साल की उम्र में वे स्कूल गये। वे काफी होनहार विद्यार्थी थे। उनकी अंग्रेजी और गणित में विशेष रूचि थी। अपनी उच्च शिक्षा के लिए वे कलकत्ता गये जहां उन्होंने 1943 में कलकत्ता विश्वविद्यालय से गणित में गोल्ड मेडल के साथ मास्टर डिग्री प्राप्त की।

उन्होंने कुछ समय तक प्रेसिडेंसी काॅलेज (Presidency College) और बंगाल काॅलेज आॅफ इंजीनियरिंग एण्ड टेक्टनालाजी (Bengal College of Engineering & Technology) में अध्यापन कार्य किया। गयेन का विवाह एक प्रसिद्ध और अमीर व्यवसायी की बेटी कृष्णा से हुआ। 1947 में वे मेथमेटिकल स्टेटिस्टीक (Mathematical Statistics) में पी.एच.डी करने के लिए इंग्लैण्ड चले गये। वहां उन्होंने सुप्रसिद्ध हेनरी एलिस डेनियल (Henry Ellis Daniels) की देखरेेख में अपनी पी.एच.डी. के रिसर्च पेपर तैयार किए। वहां उनकी दोस्ती सर रोलेल्ड फिसर (Sir Ronald Fisher) से हुई, उन्होंने व्यवहारिक सांख्यिकी के क्षेत्र में मिलकर काफी कार्य किया। 1950 में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से सांख्यिकी में पीएचडी पूरी करके वे भारत लौट आये।

भारत लौटने के बाद श्री गयेन ने भारतीय सांख्यिकी संस्थान (Indian Statistical Institute) में अध्यापन कार्य शुरू किया। कुछ समय कार्य करने के बाद आई.आई.टी. खड़गपुर (IIT Kharagpur) ज्वाइन कर लिया, जहां उनके केरियर का बाकी समय गुजारा। खड़गपुर मे अध्यापन काल के दौरान उन्होंने एन.सी.ई.आर.टी. (NCERT) के प्रोजेक्ट ‘बंगाल में शिक्षा के क्षेत्र में सुधार’ पर अपना उल्लेखनीय योगदान दिया।

अनिल कुमार गयेन (Our Scientist Anil Kumar Gain) गणित और सांख्यिकी के प्रसिद्ध विद्वान थे। उनका गणित और सांख्यिकी के क्षेत्र में योगदान अतुलनीय है। वे रायल सांख्यकी सोसाईटी (RSS), लंदन और केम्ब्रिज फिलासाॅफिकल सोसाइटी (CPS) के फेलो रहे। 1971 में वे भारतीय विज्ञान कांग्रेस के सांख्याकीय विभाग के अध्यक्ष भी रहे।

शिक्षा के क्षेत्र में क्रातिकारी बदलाव के लिए अपने प्रयासों के कारण, वह बंगाल पुनर्जागरण के उत्तरार्ध में एक महत्वपूर्ण हस्ती बन गये। उन्होंने पश्चिम बंगाल के पूर्वी मिदनापुर जिले में उच्च शिक्षा के लिए एक गैर पांरपरिक संस्था के रूप में विद्यासागर विश्वविद्यालय की स्थापना की दिशा में अपने जीवन के अंतिम वर्षोंं को समर्पित किया।

प्रोफेसर अनिक कुमार गयेन (Scientist Anil Kumar Gain) के नेतृत्व में नागरिकों के फोरम, क्षेत्रीय एजुकेशन सोसाइटी के सिफारिशों के आधार पर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने तत्कालीन मिदनापुर जिले में विद्यासागर विश्वविद्यालय की स्थापना को मंजूरी दे दी। अंततः गयेन की मृत्यु के तीन साल बाद 1981 में पश्चिम बंगाल विधानसभा में विद्यासागर विश्वविद्यालय एक्ट पास हो गया। यह विश्वविद्यालय उन्नीसवीं सदी के समाज सुधार और शिक्षाविद् पंडित ईश्वरचंद्र विद्यासागर के नाम पर रखा गया।

सन् 2012 में विद्यासागर विश्वविद्यालय द्वारा अनिल कुमार गयेन के विश्वविद्यालय ओर साथ-साथ सम्पूर्ण बंगाल के लिए उनके अतुलनीय योगदान को सम्मान देते हुए अनिल कुमार गयेन मेमोरियल लेच्चर की घोषणा की गई।

अभी कुछ समय पहले उनका नाम मेथमेटिकस् जिनालाॅजी प्रोजेक्ट (Mathematics Genealogy Project) की वेवसाईट में जोड़ा गया, जिसको कि संयुक्त रूप से नार्थ डकोटा स्टेट यूनिवर्सिटी, यूएसए और अमेरिकन मेथमेटिकल सोसाईटी द्वारा शुरू किया गया है।

श्री अनील कुमार गयेन का निधन 59 वर्ष की आयु में अपने जन्मदिन के ठीक एक हफ्ते बाद 7 फरवरी 1978 में हुआ।

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