हमारे वैज्ञानिकः के.आर. रामनाथन (K.R. Ramanathan)

हमारे वैज्ञानिकः के.आर. रामनाथन Our Scientist K.R. Ramanathan in Hindi

प्रोफेसर कलपथी रामकृृष्ण रामनाथन (Kalpathi Ramakrishna Ramanathan) का जन्म कलपथी गांव, जिला पालघाट, केरल में 28 फरवरी 1893 में हुआ था। उनके पिताजी संस्कृत व वेदों के ज्ञाता थे जिनकी की खगोल विज्ञान में भी गहरी रूचि थी।

जब वे सिर्फ 13 वर्ष के थे तो उनकी माताजी का निधन हो गया था। तब उनके ऊपर अपनी चार जवान बहनों के साथ-साथ लगभग नेत्रहीन दादाजी की जिम्मेवारी भी आ गयी। उन्होंने अपनी प्राथमिक और सैकेन्ड्री शिक्षा गांव में ही प्राप्त की। वह एक होनहार बालक थे। वे अपनी कक्षा में हमेशा प्रथम आया करते थे। उन्होंने विक्टोरिया कालेज, पलघट से इंटरमीडिएट और आगे की पढ़ाई प्रेसिडेंसी कालेज, मद्रास से की। उन्होंने 1917 में पोस्टग्रेजुएशन कर लिया था।

पढ़ाई के बाद रामनाथन (K.R. Ramanathan) ने तिरुवनंतपुरम में महाराजा काॅलेज के भौतिकी विभाग में प्रदर्शक (Demonstrator) के रूप में कार्य करना आरंभ कर दिया। इस काॅलेज में उन्होंने लगभग 7 वर्षों तक कार्य किया। काॅलेज परिसर में राज्य मौसम विभाग का एक छोटा सा दफ्तर हुआ करता था। उन्हें डिपार्टमेंट में देखरेख की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गयी। इस तरह मौसमविज्ञान में उनकी रूचि को प्रोत्साहन मिला और इस कार्य में अनुभव भी हो गया। वहां के अपने अनुभव पर उन्होंने एक रिसर्च पेपर तैयार किया जो कि एक मैगजिन में प्रकाशित भी हुआ।

उस समय प्रोफेसर सी.वी. रमन (Prof C.V. Raman) अपने कार्यों के लिए देश में काफी लोकप्रिय थे। रामनाथन (K.R. Ramanathan) भी उनसे काफी प्रभावित थे। वे पत्रों के द्वारा रमन के सम्पर्क में रहते थे। रमन ने उन्हें कलकत्ता में अपने दिशानिर्देश में रिसर्च कार्य करने के लिए आमंत्रित किया। रामनाथन (K.R. Ramanathan) ने इस मौके को अपने हाथों ने नहीं निकलने दिया और तिरुवनंतपुरम से छुट्टी लेकर कलकत्ता चले गये। इस बीच उन्हें मद्रास विश्वविद्यालय से एक साल का रिसर्च स्कालरशिप मिला। जिससे कि उनकी वित्तीय आवश्यकताओं की पूर्ति हो पायी।

वे रमन के पहले रिसर्च विद्यार्थी थे। रमन प्रकाश के फैलाव (Scattering of light) पर रिसर्च कर रहे थे। रामनाथन भी इस रिसर्च कार्य में उनका सहयोग करने लगे। उस समय वे दोनो रिसर्च पर कोई ठोस नतीजे में नहीं पहुंच पाये थे। बाद में इस कार्य को आगे बढा कर रमन ने ‘रमन अफेक्ट’ Raman Effect को दुनिया के सामने रखा। इस कार्य के लिए रमन को नोबल पुरस्कार भी मिला। रमन ने इस सफलता के लिए अपने पहले रिसर्च विद्यार्थी रामनाथन को याद किया। रामनाथन के जन्मदिन 28 फरवरी 1928 को रमन अफेक्ट के अविष्कार की घोषणा हुई। आगे चल कर यही दिन राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।

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अपने एक साल के कलकत्ता प्रवास में रामनाथन (K.R. Ramanathan) के 10 विज्ञान रिसर्च पैपर दुनिया के जानीमानी विज्ञान मैगजीन में प्रकाशित हुई। उनके शोधों पर मद्रास विश्वविद्यालय ने अपनी पहली डाक्टर आॅफ साइंस की उपधी रामनाथन को प्रदान की।

उनका रिसर्च स्कोलरशिप समाप्त हो चुका था, अब घर की जिम्मेवारी उठाने के लिए उनको नौकरी की आवश्कता थी। उन्हें रंगून यूनिवर्सिटी, वर्मा से असिस्टेंट प्रोफसर फिजिक्स पद के लिए न्योता मिला। रमन से सलाह लेकर रामनाथन अपनी पत्नी पार्वती के साथ 1922 में रंगून चले गये। वे रंगून में चार साल तक रहे। इसी बीच उन्हें भारतीय मौसम विभाग में प्रथम ग्रेड विज्ञानी की नौकरी का अवसर मिला। प्रोफेसर रमन की सलाह से उन्होने शिमला में विभाग ज्वाइन कर लिया। अपनी रिटायरमेंट तक वे इसी विभाग में रहे।

अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने देश के विभिन्न स्थानों में कार्य किया। उन्हें कोलाबा (मुंबई) और अलीबाग (रायगढ) में जियोमेग्निट लेबोरेटरी स्थापित करने की जिम्मेदारी दी गयी। आगरा में उन्होंने रबड़ के गुब्बारों की सहायता से तापमान, आद्रता, हवा के दाब पर विस्तृत अध्ययन किया।

द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान जापानी फौज वर्मा तक पहुंच गयी थी। उस समय यह आवश्यक था कि मौसम की सटीक जानकारी का पता लगा जाए जिससे कि हवाई जहाज सुरक्षित उड़ सकें। इस कार्य के लिए रामनाथन को मौसम विभाग के अधीक्षक के पद पर नियुक्त किया गया और इस जिम्मेदारी वाले कार्य को करने के लिए सम्पूर्ण अधिकार उनको दिये गये। अपनी विशिष्ठ सेवा के लिए ब्रिटिश सरकार ने उन्हें दीवान बहादुर की उपाधी से नवाजा। रामनाथन ने इस उपाधी का कभी भी अपने हित के लिए इस्तेमाल नही किया।

मौसम विज्ञान के क्षेत्र में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा था। विभाग में अपने कार्यकाल के दौरान ओजोन परत पर अपने शोध से उन्हें अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त हुई। वे विभाग में डायरेक्टर जनरल के पद पर पहुंचे। फरवरी 1948 में उन्होनें अपने पद से रिटायरमेंट ले लिया, उस समय वे 55 वर्ष के थे।

अपनी रिटायमेंट से पहले वे डाक्टर विक्रम शाराभाई के सम्पर्क में आये। शाराभाई अहमदाबाद में एक आधुनिक लेबोरेटरी स्थापित करना चाहते थे। उन्होंने रामनाथन को यहां डायरेक्टर के पद पर कार्य करने का आमंत्रण दिया जिसे कि रामनाथन से स्वीकार कर लिया। 1966 में रामनाथन ने डायरेक्टर का पद छोड़ दिया और माननीय प्रोफेसर के रूप में अपनी सेवायें देते रहे।

प्रोफेसर रामनाथन (K.R. Ramanathan) अपने विद्य़़ार्थियों के बीच पिता तुल्य थे। उन्होने अपनी जिन्दगी के 35 साल अहमदाबाद में गुजारे। गुजरात में उनका योगदान खासकर अहमदाबाद में शिक्षा और फिजिक्स के क्षेत्र में अतुलनिय है।

श्री रामानाथन (K.R. Ramanathan) को 1965 में पद्मभूषण और 1976 में पद्मविभूषण की उपाधी से सम्मानित किया गया। राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी ने उन्हें आर्यभट्ट पुरस्कार से सम्मानित किया।

वे अंत तक विभिन्न वैज्ञानिक गतिविथियों से जुड़े रहे। लम्बी बीमारी में बाद सन् 1985 में 92 साल की उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली।

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6 thoughts on “हमारे वैज्ञानिकः के.आर. रामनाथन (K.R. Ramanathan)

  1. the one of the unnoticed scientists who did a lot of things in the field of science. Thanks for sharing it in hindi as it has made easy for many people to read and understand.

  2. प्रेणात्मक कहानी है। हमारी वैज्ञानिक परम्परा सदियों से रही है पर अफसोस है कि बहुत सारे वैज्ञानिकों को बारे में हमें कुछ भी नहीं पता होता है। कदमताल को प्रयास के लिए धन्यवाद व शुभकानाएं।

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