वर्तमान शिक्षा पद्धति में भाषा और आचरण

वर्तमान शिक्षा पद्धति में भाषा और आचरण Language and behavior in the modern education system in Hindi

वर्तमान शिक्षा (modern education system) का उद्देश्य तो केवल ऐसी शिक्षा से है जिसमें अधिक से अधिक धन की प्राप्ति हो और उसी के इर्दगिर्द सारी शिक्षा प्रणाली घूमती है। पर आप आज की दशा पर विचार कीजिए। जिस शिक्षा की आज भारत में प्रधानता है, उसमें न अपनी भाषा का स्थान है, न अपना वेष रहता है, न अपने भाव ही।

शिक्षा की भाषा

संसार भर के शिक्षित मनुष्य इस बात पर एकमत हैं कि अपनी भाषा द्वारा दी हुई शिक्षा हीbook शिक्षा का सच्चा फल दे सकती है। जैसे बालक के शरीर-पोषण के लिये माता की दूध ही प्राकृतिक आहार है, अन्य आहार विकृति ही उत्पन्न करते हैं, ऐसे ही मनुष्य भावों के पोषण के लिए मातृभाषा का विज्ञानरूपी दूध ही प्राकृतिक सामग्री है। अन्य भाषा द्वारा दी हुई शिक्षा-भावों के पोषण के स्थान पर उन्हें विकृत ही करती हैं। इसीलिए से तो अधिकतर देशों में शिक्षा का प्रबन्ध अपनी भाषा में ही किया जाता है। आप आज के तेजी से विकास करते देशों को देखिये, वे चाहे अमेरिका हो, यूरोप हो, रूस हो या चीन-जापान, सब जगह अपनी भाषा में हीं शिक्षा दी जाती है। किंतु हमारी शिक्षा ही निराली है। यहाँ उच्च शिक्षित कहलाने वाले भी जो अपने ज्ञान के डींग के आगे संसार की बुद्धि को तुच्छ समझते हैं, अपनी मातृभाषा में नाम तक नहीं लिखना चाहते।

अपने धर्मग्रन्थ वेद की भाषा की बात कौन करे, देव-वाणी संस्कृत को भी एक तरफ रखिये, जब उन्हें अपनी सभ्यता का या अपने धर्म-संस्कृति का ज्ञान ही नहीं, तो उन पर उन्हें श्रद्धा कैसे होगी? अपनी भाषा हिन्दी में जो कुछ वे पढ़ते हैं, उसका भी उन्हें मार्मिक ज्ञान नहीं होता। विदेशीय भाषा द्वारा प्राप्त की गयी शिक्षा अन्तःकरण पर नहीं जमती। प्रत्यक्ष ही देखिये, लाखों छात्र काॅलेजों में पढ़ते हैं, किन्तु उनमें से कितने यथार्थ वैज्ञानिक बनते हैं, कितने राजनीति के विद्वान होते हैं, कितने अर्थशास्त्र के माहिर होते हैं, कितनों को उच्च स्तर की इन्जीनियरिंग आती है, कितने स्तरीय डाक्टर हैं? अपनी भाषा में जब शिक्षा हो, तब ही सच्चा विषय-ज्ञान हो सकता है, यह परम सत्य है।

आचरण शिक्षा की आवश्यकता

हमारी शिक्षा का मूल मंत्र ‘विद्या ददाति विनयम्’ है, पर वह विद्या व्यर्थ ही नहीं, अनर्थकारी भी है, जिसे ग्रहण कर आज का किशोर-युवक वर्ग अविनीत बनता जा रहा है। क्रमशः यह धुन बीज ही आगे चल कर महत्वपूर्ण पदों पर बैठ रहा है। सम्पूर्ण राष्ट्र को इस संकट पर विचार करना चाहिए और शीघ्र ही इस महामारी की चिकित्सा ढूंढ निकालनी चाहिए। आज बहुत सारे शिक्षित अशिक्षितों से अधिक चरित्रहीन देखने को मिलते हैं।

आधुनिक शिक्षा ने युवापीढ़ी को ऐवरेस्ट की चोटी से उठाकर एक ऐसी अंधेरी तलहटी में औंधे मुंह पटक दिया है, जहाँ उसकी चेतना, मानवीय भावना, सामाजिक तथा राष्ट्रीय साधना लुप्त हो गयी है। हड़ताल, तोड़-फोड़, लूटखसोट, शिक्षकों की अवहेलना करना, अनुशासनहीनता, नेतागिरी  और निन्दनीय कार्यों में नेतृत्व करना उसकी शान है। वह ढोल बजाकर अपने साथियों से कहता है-शिक्षक में श्रद्धा रखना दकियानूसी, सेवा करना चापलूसी, आज्ञा मानना भोंदूपन और अनुशासन में रहना पराधीनता है। शिक्षक पढ़ाता है तो क्या एहसान करता है, उसे  पढाने की सेलरी मिलती है।

अभी फिलहाल ही जे.एन.यू. के क्या-क्या देश विरोधी नारे लगे, गुजरात में पटेल आंदोलन के नाम पर क्या हुआ, दक्षिण भारत में छात्र आंदोलन में क्या हुआ, हम सभी जानते हैं।

आज हम देखते हैं कि कुछ छात्र ट्रक, बस, कार रोककर दारागिरी से सरस्वतीपूजा, रामलीला, दुर्गापूजा, आदि के नाम पर लोगों सेे चन्दा लेते हैं। वे उस धन को गलत-सलत खर्च करते हैं। वे मूर्ति के सामने कमर लचकाकर अश्लील रेकार्ड बजा कर नाचते हैं, नृृत्य पार्टी को बुलाते हैं, पर विद्वान प्रवक्ताओं को नहीं। चन्दे का हिसाब दिखाने के लिए कहने पर मारने-पीटने की धमकी देते हैं। इन अवसरों पर लाउडस्पीकरों से अनवरत प्रसारित गाने अश्लील तो रहते ही हैं, रातभर लोगों की नींद को भी बधित करते हैं। ये छात्र हैं या असमाजिक तत्व। कहाँ तक कहा जाए, जब तक शिक्षा में आचार शिक्षा की प्रधानता न रहेगी, जब तक शिक्षित और सदाचारी ये दोनो शब्द समानार्थक न बना दिये जायेंगे।

स्वस्थ शरीर-स्वस्थ मन

स्वस्थ शरीर ही स्वस्थ मन का निर्माण करता है अतः जब तक शिक्षा के साथ व्यायाम का समुचित प्रबन्ध कर नवयुवकों को बलिष्ठ न बनाया जायेगा, तब तक देश उन्नति का नाम ही नाम रहेगा। इनके पालन से ही चरित्र निर्माण का पावन कार्य हो सकता है। अतः स्कूलों-काॅलेजों के पढ़ाई के साथ खेल-कूद व अन्य इसी प्रकार की कार्यक्रम लगातार होने चाहिए।

Motivational Quotes on Educational System in Hindi

शिक्षा अत्यन्त शक्तिशाली हथियार है जिससे कि आप पूरी दूनिया ही बदल सकते हैं। 
Education is the most powerful weapon which you can use to change the world.
 -Nelson Mandela

शिक्षा का उद्देश्य गहनता और सूक्ष्मता से सोचने की क्षमता विकसित करना है।  बुद्धिमता और सदाचार-यही सच्ची शिक्षा का लक्ष्य होना चाहिए। 
The function of education is to teach one to think intensively and to think critically. Intelligence plus character – that is the goal of true education.
– Martin Luther King

अपनी प्रतिष्ठा से ज्याद अपने चरित्र की और ध्यान दें क्योंकि चरित्र आपकी असलियत बताता है जबकि प्रतिष्ठा केवल वह है जो लोग आपके बारे में सोचते हैं। 
Be more concerned with your character than your reputation, because your character is what you really are, while your reputation is merely what others think you are.
-John Wooden

आज की आवश्यकता

आज देश का चरित्र दिनों दिन गिरता जा रहा है। प्रत्येक संवेदनशील मनुष्य इससे दुःखी है और चाहता है कि इस परिस्थित से छुटकारा मिले। विश्व भी गलत रास्ते पर बढ़ कर आतंकवाद से तरस्त और आणविक विनाश के दहलीज तक पहुंच चुका है। अतः आज हमें सफल होना है तो आवश्यक है कि शिक्षा को सुनियोजित रूप से क्रियान्वित करने की।

यदि समय पर प्रशासकों तथा समाज-सेवकों ने आम नागरिकों विशेषकर छात्रों के चरित्र.-निर्माण पर ध्यान नहीं दिया तो अत्यन्त संकट की स्थिति पैदा हो जायेगी। सबका हित इसी मे है कि शिक्षा विधि चरित्र निर्माण-केन्द्रित बनायी जाये। राष्ट्र के विभिन्न बांधों, अणुशक्ति केन्द्रों, विद्युत-उत्पाद स्टेशनों, ऊँची-ऊँची इमारतों, बड़े-बड़े उद्योगों से कहीं अधिक मूल्यवान है राष्ट्र का चरित्र-निमार्ण, जिसके बिना सब धन धूल के समान है।

वैयक्तिक चरित्र राष्ट्र की अक्षय-निधि है। समाज वैयक्तिक चरित्र पर बड़ी आशा करता है, क्योंकि समाज का गठन व्यक्तियों से बनता है। यह बात राष्ट्रीय स्तर पर तो और भी सत्य है। अतः चरित्र ही राष्ट्र का पांव भी है, मार्ग भी।


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2 thoughts on “वर्तमान शिक्षा पद्धति में भाषा और आचरण

  1. आपने बहुत सही कहा। भाषा में सभ्यता होना बहुत जरूरी है।

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