आप मेरी माता हैं

आप मेरी माता हैं | Maharaja Chhatrasal

छत्रसाल (Raja Chhatrasal) बड़े प्रजापालक थे। वे अपनी प्रजा की देखभाल पुत्र के समान करते थे। वे राज्य का दौरा करते और जनता से उसकी कठिनाईयाँ पूछते थे।

एक बार एक युवती महाराज की ओर आकर्षित हुई। वह उनके पास आकर बोली-‘राजन! आपके राज्य में मैं दुःखी हूँ।’

यह सुनकर छत्रसाल बड़े व्याकुल हुए। वे सोच में पड़ गये। मन-ही-मन कहने लगे-‘मेरे लगातार प्रयत्नशील रहने पर भी राज्य की जनता दुःखी रहे, यह मेरे लिए बड़े कष्ट की बात है।’

उन्होने महिला से पूछा-‘देवी! बताइये आपको क्या कष्ट है । मैं उसे दूर करने का यथाशक्ति प्रयत्न करूंगा।’

‘ऐसी आश्वासन भरी बातें सभी करते हैं, पर पूरी करने वाले बिरले ही होते हैं। पहले आप वचन दे तो मैं अपनी बात बता सकती हूँ’-युवती ने जवाब दिया।

‘हाँ! हाँ!! आप अपनी बात निःसंकोच कहिये।’ सरल हृदयी महाराज का उत्तर था।

‘मैं चाहती हूँ कि आप जैसी संतान मेरे भी हो।’ युवती का जवाब था।

महाराज यह सुनकर स्तब्ध (stunned) रह गये। फिर विवेक और संयम से काम लेते हुए उन्होंने उस नारी से चरणों में मस्तक झुकाकर निवेदन किया-

‘माँ! आप जिस पुत्र की कल्पना कर रही हैं, सम्भव है, वह मेरी तरह न हो, अतः आज से आप मुझे ही अपना पुत्र स्वीकार करें।’

नरेश का उत्तर सुनकर नारी की मोह-मुरछा जगी। उसे अपनी गलती (mistake) का बोध हो गया। राजा जीवनभर उसके प्रति राजमाता के समान respect रखते रहे।


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One thought on “आप मेरी माता हैं

  1. जय ही महाराजा छत्रशाल की में इन्ही की पावन नगरी मौसहानिया मैं रहता हूं जहा सुख की अनुभूति होती ह

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