विदेशों में राम-कथा (Story of Ram in the World)

Story of Ram in the World in Hindi

राम-कथा भारत की ही नहीं, विश्व की सम्पत्ति है। वह संस्कृृत भाषा में रची गई, फिर भारत की अन्य भाषाओं में उसका अनुवाद हुआ और उसके साथ-साथ अन्य देशों की भाषाओं में भी उसका ट्रान्सलेशन (translation) व कुछ परिवर्तित (some changes) रूप में पहुंची। यह जहां भी गई जनमानस केे दिल में छूते हुए, उस क्षेत्र के समाज का अभिन्न अंग बन गई।kadamtaal

एशिया के देशों में तो राम-कथा इतनी अधिक प्रचलित है कि रामायण को कुछ विद्वानों ने ‘एशिया का महाकाव्य’ (Epic of Asia)  ही कह दिया है। यह वहां के जीवन, धर्म, संस्कृति, कला आदि का महत्वपूर्ण अंग बन चुकी है। राम-कथा के माध्यम से इन देशों में भारतीय संस्कृति पहुंची और वहां की जनता ने उसे अपने साहित्य और धर्म का हिस्सा बना दिया।

यद्यपि इन देशों में रामायण की कथा तथा चरित्रों में परिवर्तन हो गया है, किंतु रूपान्तर के बावजूद वे चरित्र लोक-मानस में इतने घुल-मिल गये है कि उनका अपना एक अलग रूप ही विकसित हो गया है।

जिन देशों में कई सौ-साल पहले राम-कथा पहुंची, उसमें चीन, तिब्बत, जापान, इण्डोनेशिया, थाईलैंड, लाओस, मलेशिया, कम्बोडिया, श्रीलंका, फिलीपिन्स, म्यानमार, रूस आदि देश प्रमुख हैं।

जापान में राम-कथा Ram Katha in Japan in Hindi

जापान में रामायण जातक-कथा से पहुंची गयी। 12वीं शताब्दी में रचित होबुत्सुशु नामक ग्रन्थ में रामायण की कथा जापानी में उपलब्ध है, लेकिन ऐसे प्रकरण भी हैं, जिनसे कहा जा सकता है कि जापानी इससे पूर्व भी राम-कथा से परिचित थे।

विगत एक हजार वर्ष से बुगाकु अथवा गागाकु नाम से प्रसिद्ध संगीत-नृत्य की ऐसी कुछ शैलियाँ जापान के राजमहलों में सुरक्षित हैं, जिनसे दोरागाकु नाट्य-नृत्य शैली में राम-कथा मिलती है। 10वीं शताब्दी में रचे ग्रन्थ ‘साम्बो-ए-कोताबा’ में दशरथ और श्रवणकुमार का प्रसंग मिलता है। ‘होबुत्सुशु’ की राम-कथा और रामायण की कथा में भिन्नता है। जापानी कथा में शाक्य मुनि के वनगमन का कारण निरर्थक रक्तपात को रोकना है। वहां लक्ष्मण साथ नहीं है, केवल सीता ही उनके साथ जाती है। सीता-हरण में स्वर्ण-मृृग का प्रसंग नहीं है, अपितु रावण योगी के रूप में राम का विश्वास जीतकर उनकी अनुपस्थिति में सीता को उठाकर ले जाता है। रावण को ड्रैगन (सर्पराज)-के रूप में चित्रित किया गया है, जो चीनी प्रभाव है। यहां हनुमान के रूप में शक्र (इन्द्र) हैं और वही समुद्र पर सेतु-निर्माण करते हैं। कथा का अन्त भी मूल राम-कथा से भिन्न है।

थाईलैंड  में राम-कथा Ram Katha in Thailand in Hindi

थाईलैंड में यह परम्परागत विश्वास है कि राम-कथा सृष्टि उनके ही देश में हुई थी। वहाँ जब भी नया शासक राजसिंहासन पर आरूढ़ होता है, वह उन वाक्यों को दोहराता है, जो राम ने विभीषण के राजतिलक के अवसर पर कहे थे।  भारत के बाहर थाईलेंड में आज भी संवैधानिक रूप में राम राज्य है। वहां भगवान राम के छोटे पुत्र कुश के वंशज सम्राट “भूमिबल अतुल्य तेज” राज्य कर रहे हैं, जिन्हें नौवां राम कहा जाता है। थाईलैंड के पुराने रजवाडों में भरत की भांति राम की पादुकाएं लेकर राज्य करने की परंपरा पाई जाती है। वे सभी अपने को रामवंशी मानते थे। यहां “अजुधिया” “लवपुरी” और “जनकपुर” जैसे नाम वाले शहर हैं । सन् 1340 ई. में राम खरांग नामक राजा के पौत्र थिवोड ने राजधानी सुखोथाई (सुखस्थली)-को छोड़कर ‘अयुधिया’ अथवा‘अयुत्थय’ (अयोध्या)- की स्थापना की। यह विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि राम खरांग के पश्चात् नौ शासकों के नाम राम-शब्द की उपाधि से विभूषित थे। वे राम प्रथम, राम द्वितीय आदि नामों से अभिहित होते थे। यहाँ वाल्मीकिकृत रामायण के आधार पर अनेक महाकाव्यों की रचना हुई। इसमें सर्वप्रथम ग्रन्थ है रामकियेन अर्थात् राम-कीर्ति। इसके लेखक महाराज राम प्रथम माने जाते हैं। इसमें कुछ अंश कम्बोडिया की अपूर्ण कृति रामकेति से भी लिये गये हैं। राम द्वितीय में नृत्य-नाट्य का सूत्रपात किया और रामकियेन नाट्-रूपक का सृृजन किया। इसके अभिनय में राजपरिवार के प्रमुख सदस्य भी भाग लेते थे, जो गौरव-गरिमा की बात मानी जाती थी। आज यह नृृत्य-नाट्य थाईदेश की राष्ट्रीयता का अभिन्न अंग बन गया है।

म्यांमार में राम-कथा Ram Katha in Myanmar in Hindi

म्यांमार में ईसा पूर्व ही राम-कथा यहां पहुंच चुकी थी। ईसा के दो शताब्दी पहले से विष्णु एवं बुद्ध के प्रणाम मिलते हैं, लेकिन यह आश्चर्यजनक बात ही है कि राम-कथा का साहित्यिक सृृजन सत्राहवीं शताब्दी के पूर्व का उपलब्ध नहीं होता। प्रथम रचना रामवस्तु इसी काल की मिलती है और इसमें राम कथा को बौद्ध कलेवर में प्रस्तुत किया गया है। इसके नायक बोधिसत्व राम हैं, जो कि तुषित स्वर्ग से देवताओं की प्रार्थना पर अवतरित हुए हैं। दूसरी रचना महाराम है, जो अठारहवीं शताब्दी के अन्त अथवा उन्नीसवीं शताब्दी के आरम्भ में रची गई थी। यह कृति भी गद्य में ही है। यह मूलतः रामवस्तु का ही विस्तृत एवं अलंकृृत रूप है। तीसरी मुख्य गद्य रचना ‘राम-तोन्मयो’ है जो 1904 ईं. में साया-हत्वे ने लिखी। इसमें पात्रों के नाम तथा प्रसंगों को बदल दिया गया है। चैथी रचना है राम-ताज्यी, जिसे अ-ओ-पयो ने 1774 ई. में लिखा है। यह गीतिकाव्य है, जिसे इसके ररचिता ने बंगाल के बाउल गायकों की भांति नगर-नगर, ग्राम-ग्राम घूम-फिर कर गाया तथा इस प्रकार ‘रामख्यान’ का प्रचार-प्रसार किया। पांचवीं रचना राम-भगना है, जिसे 1784 ई. में ऊ-तो ने लिखा। इसका कथानक राम-सुग्रीव मैत्री तक ही सीमित है। छठी रचना अलौंग राम-तात्यो है, जिसे साया-हतुन ने 1904 ईं. में रचा। यह भी गीतिकाव्य है। सातवीं रचना नाटक थिरी राम गद्य एवं पद्य दोनों में है। यह नाटक भी 8वीं-9वीं शताब्दी के प्रारम्भ या अंत मेें 1320 ताड़पत्रों पर लिखा गया था। आठवीं रचना भी गद्य-पद्यमय नाटक पोन्तव राम है, जिसे ऊ-कू नने 1880 ई. में लिखा था। नवीं रचना है, पोन्तव राम-लखन, जिसे ऊ-गाँग गोने 1910 ई. में लिखा था। मुख्यतः यह कृृति राम के प्रति सीता के प्रेम की कहानी है। म्यानमार में 1767 ई. से रामलीला (थामाप्वे) भी रात को खेली जाती है।

कम्बोडिया  में राम-कथा Ram Katha in Cambodia in Hindi

कम्बोडिया (कम्पूचिया) में पहली शताब्दी से ही राममयी संस्कृति का प्रचार-प्रसार मिलता है। छठी सातवीं शताब्दी के खण्डहरों तथा शिलालेखों में रामायण के प्रणम मिलते हैं। रामकेर या रामकेर्ति कम्बोडिया का अत्यधिक लोकप्रिय महाकाव्य है, जिसने यहां की कला, संस्कृति, साहित्य को प्रभावित किया है। इसके लेखक के नाम के बारे में पता नहीं चला है। इसकी प्राचीनतक हस्तलिपियाँ 17वीं शताब्दी की उपलब्ध होती हैं। इसके अनेक पाठभेद हैं और कोई सर्वमान्य रूप नहीं है, फिर भी यह राष्ट्र की आत्मा की सुन्दरतक अभिव्यक्ति है। इसकी लोकप्रियता का एक कारण यह भी है कि यहां के शासक जयवर्मन सप्तम के जीवन की घटनाएँ राम के  जीवन की घटनाओं से बहुत मिलती हैं। आज भी यह कथा सत्य एवं न्याय की विजय की प्रतीत मानी जाती है।

फिलीपीन्स में राम-कथा Ram Katha in Philippines in Hindi

फिलीपीन्स में राम-कथा महारादिया लावना नाम से 13वीं-14वीं शदाब्दी की प्राप्त होती है। इसमें राम-कथा तथा पात्रों का स्वरूप बदला हुआ है। यहां की राम-कथा में राम को मन्दिरी, लक्ष्मण को मंगवर्न, सीता को मलाइला तिहाइया कहा जाता है। फिलीपीन्स की राम-कथा में भी असत्य पर सत्य की विजय दिखाई गयी है। रावण बुरा है, वह परास्त होता है (मारा नहीं जाता), राम-सीता का दाम्पत्य स्थापित होता है।

मलेशिया में राम-कथा Ram Katha in Malaysia in Hindi

मलेशिया मुस्लिम देश होने पर भी वहाँ भारतीय संस्कृति का प्रभाव रहा है। मलयेशिया में रामकथा का प्रचार अभी तक है। वहां मुस्लिम भी अपने नाम के साथ अक्सर राम लक्ष्मण और सीता नाम जोडते हैं। यहां राम-कथा साहित्य, छाया नाटक तथा रामायण-नृत्य में मिलती है। मलय रामायण की प्राचीनतम प्रति सन् 1633 ई. में बोदलियन पुस्तकालय ;ठवकसमपंद स्पइतंतल ;न्ज्ञद्धद्ध में सुरक्षित की गयी। यह अरबी लिपि में है, जिससे स्पष्ट है कि इस पर इस्लाम का प्रभाव है। इसके तीन पाठ रोकड़ा वान रेसिंगा, शेलाबेर और मैक्सवेल के मिलते हैं। मलय राम-कथा के साहित्यिक पाठ प्रायः हिकायत सेरी राम के नाम से प्राप्त होते हैं, किंतु डब्ल्यू.ई. मैक्सवेल द्वारा सम्पादित ग्रन्थ का नाम श्रीराम है। एक और ग्रन्थ हिकायत महाराज रावण भी मिलता है, जो हिकायत सेरी राम से मिलता है। हिकायत सेरी राम ग्रन्थ  में रावण के चरित्र से लेकर राम-जन्म, सीता-जन्म, राम-सीता विवाह, राम वनवास, सीता हरण औरा सीता की खोज, युद्ध, सीता त्याग तथा राम-सीता के पुनःमिलन तक की कथा है। डाॅ. कामिल बुल्के ने इस ग्रन्थ पर पड़े प्रभावों के सम्बन्ध में लिखा है कि इस पर जैन तथा बंगाली राम-कथाओं का प्रभाव निर्विवाद है। उड़िया राम-साहित्य, रंगनाथ तथा कम्ब रामायण अर्थात भारत के पूर्वी तट की रचनाओं का प्रभाव सेरी राम पर पड़ा है। सेरी राम पर रामायण ककविन तथा इस्लाम धर्म का जो प्रभाव है, वह एक प्रकार से अनिवार्य ही था।

लाओस में राम-कथा Ram Katha in Laos in Hindi

लाओस का प्राचीन नाम मोंग जिंग थांग (Muong Xieng Thong) अथवा लेम थांग (Laem Thong) है, जिसका की संस्कृत नाम स्वर्णभूमि प्रदेश है। लाओस में राम-कथा संगीत, नृृत्य, चित्रकारी, स्थापत्य और साहित्य की धरोहर के रूप में ताड़-पत्रों पर सुरक्षित है। राजमहल और व्येन्त्याने-नगर की नाट्यशाला में राम-कथा का संगीत-रूपक के रूप में मंचन होता है। राम-कथा यहां दो रूपों में मिलती हैं-एक रूपान्तर ‘फालम’ (प्रिय लक्ष्मण, प्रिय राम) जो व्येत्स्या ने प्रदेश से प्राप्त हुआ हैं, दूसरे पोम्पचाक्् (ब्रह्मचक्र) जो उत्तरी लाओस की मेकांग घाटी से प्राप्त हुआ है। पहली रचना एक जातक-काव्य है। भगवान बुद्ध जेतवन मंे एकत्र भिक्षुओं को श्रीराम की कथा सुनाते हैं। इसकी रचना लवदेश में हुई थी, इसी कारण यह यहां के लोगों को सर्वप्रिय है। इन दोनों रूपान्तरों की राम कथा एवं पात्र-सृृष्टि वाल्मिकी-रामायण की अपेक्षा थाईलैण्ड, इण्डोनेशिया, मलाया आदि में मिलने वाली राम-कथा से अधिक मिलती है।

तिब्बत और मंगोलिया में राम-कथा Ram Katha in Tibet and Mongolia in Hindi

तिब्बत में राम-कथा का प्रवेश मुख्यतः बौद्ध जातकों के कारण हुआ। डाॅ. कामिल बुल्के के अनुसार राम-कथा अनामक जातक तथा दशरथ जातक के माध्यम से तिब्बत पहुंची। इन दोनों जातकों का क्रमशः तीसरी और पांचवीं शताब्दी में चीनी भाषा मं अनुवाद हुआ था। इसके अतिरिक्त राम-कथा का लिखित रूप 13वीं शताब्दी में प्राप्त होता है। द बुस (Bus) के दमार-स्तोन-चोस-ग्लांक (Dmar-Stonrgyal) ने अपने गुरु सा-स्क्या पण्डित से सुनी कथा के आधार पर लिखा, जिसके कारण इसमें अनेक त्रुटियां हैं। सा-स्क्या पंडित (Sa-Shya Pandita) ने सुभाषित-रत्न-निधि राम से 457 चैपाइयों का एक संग्रह तिब्बती भाषा में लिखा था, जिसमें कहीं-कहीं राम-कथा का उल्लेख है, इसके अलावा संस्कृत-ग्रन्थ काव्यादर्श का तिब्बती अनुवाद फाग्स-पा (Phags-Pa) ने 13वीं शताब्दी में करवाया था। इसमें भी रामकथा मिलती है। डाॅ. कामिल बुल्के के अनुसार यद्यपि तिब्बत में राम-कथा बौद्ध-कथाओं के रूप में पहुंची थी, तथापि इस पर गुणभद्र के उत्तरपुराण तथा गुणाढय की रचना में सीता रावण की पुत्री बतायी गयी है।

तिब्बत से होकर राम-कथा मंगोलिया पहुंची, लेकिन इसका सम्बन्ध वाल्मीकीय रामायण से न होकर बौद्ध एवं जैन राम-कथाओं से था। ऐसा विश्वास है कि तिब्बत के लामा लोगों ने धर्म-प्रचार के लिये मंगोलिया में इस कथा का प्रचार किया। मंगोलिया में राम-कथा राजा जीवक की कथा है, जो आठ अध्यायों में विभक्त है। इस कथा की छः पुस्तकें लेनिनग्राद पुस्तकालय में सुरक्षित हैं।

श्रीलंका में राम-कथा Ram Katha in Sri Lanka in Hindi

श्रीलंका में राम-कथा का कोई विशद ग्रन्थ नहीं मिलता है, वैसे कई लेखकों ने रामायण की गाथाओं को सिंहली भाषा में लिखा है। इनमें कुमारदास का जानकीहरण प्रमुख है। यहां राम की अपेक्षा हनुमान तथा सीता से सम्बन्धित कहानियां अधिक प्रचलित है, जिसका सम्भवतः कारण यह है कि राम यहां बहुत कम समय रहे थे। कुछ विद्वान रामायण को कवि कल्पना मानते हैं और कुछ राम, रावण, सीता, हनुमान, आदि को  तो स्वीकार करते हैं, परन्तु रामायण की लंका को वर्तमान श्रीलंका नहीं मानते, बल्कि वह द्वीप श्रीलंका के दक्षिण में अथवा इण्डोनेशिय का कोई द्वीप मानते हैं।

रूस में राम-कथा Ram Katha in Russia in Hindi

रूस में राम-कथा का प्रवेश दो सौ वर्षाें से अधिक पुराना नहीं है। 1833 ई. में युवा पाठकों के लिए म. चिस्तीकोव का प्राचीन भारतीय महाकाव्य-रामायण-अनुवाद प्रकाशित हुआ। इससे पूर्व 1819 ई. मंे पीटरसवर्ग की पत्रिका का सरेब्नावात्येल प्रास्वेशियेनिया इब्लागोत्वारोनिया के दसवें अंक के भाग 8 में वाल्मीकि रामायण का एक बहुत बड़ा अंश ‘पुत्र की मृृत्यु पर माता-पिता का संताप’ शीर्षक से प्रकाशित हो चुका था। 1844 ई. में मायाक पत्रिका में प्रकाशित द. कोप्त्येव का रामायण से एक अंश शीर्षक अनुवाद भी छपा।

विदेशों में राम-कथा (Story of Ram in the World)


आपको यह लेख विदेशों में राम-कथा Story of Ram in the World in Hindi कैसा लगा, कृप्या कमेंट बाक्स पर साझा करें। अगर आपके पास विषय से जुडी और कोई जानकारी है तो हमे kadamtaal@gmail.com पर मेल कर सकते है |

आपके पास यदि Hindi में कोई article, story, essay, poem है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ kadamtaal@gmail.com पर E-mail करें. हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ प्रकाशित करेंगे|

Random Posts

  • बुराई छोड़ो अच्छाई को जगह दो

    हमारी सोच ही हमारा भाग्य है फिर क्यों न हम सभी उस पर ध्यान दें। यह इतना आसान काम भी नहीं है इसके लिए, रोज़ के अभ्यास की जरूरत है जिससे हमारी बुरी सोच समाप्त होगी और अच्छी सोच को स्थान मिलेगा। अभ्यास से कुछ आदतों / संस्कारों को छोड़ना अनिवार्य है। प्रातःकाल में उठते ही अख़बार को पढ़ने की […]

  • अनजाने पाप

    कपिल वर्मा धीरे-धीरे सड़क पार कर रहे थे, चारों तरफ इतनी भीड़ थी कि सड़क पार करना कठिन था आज वर्मा जी को बहुत समय बाद इस क्षेत्रा में आना हुआ था। शौरूम में कदम रखते ही, सभी कर्मचारियों की निगाहें उनकी तरफ उठ गई। शौरूम के मालिक मोहन अपनी कुर्सी से उठकर उनके स्वागत के लिए आगे बढ़ गए। […]

  • water is medicine पानी भी एक दवा है – इसके चमत्कार देखें

    पानी भी एक दवा है – इसके चमत्कार देखें Water is also a medicine – see its miracles in Hindi 1979 में जब अयातुल्लाह ने शाह से ईरान में सत्ता हथिया ली तब एक ईरानी डाक्टर फेरदून बटमंगहिलीज Fereydoon Batmanghelidj (1930 or 1931 – November 15, 2004) को अन्य बुद्धिजीवियों के साथ तेहरान के बदनाम जेल में डाल दिया गया। एक रात […]

  • ramanaya in ancient china in hindi प्राचीन चीनी साहित्य में रामायण (Ramayana in Ancient Chinese Literature)

    Ramayana in Ancient Chinese Literature in Hindi प्राचीन चीनी साहित्य में राम कथा पर आधारित कोई मौलिक रचना नहीं हैं। ये रचानाऐं चीन में बौध भिक्षुओं द्वारा ले जायी गयी हैं। जिनको कि जातक में परिवर्तित किया गया जिसके अनुसार  भगवान बुद्ध ही पूर्व जन्म में राम हैं। चीन में रामायण की कथा का प्रवेश तीसरी शताब्दी तक हो गया […]

  • washerman धोबी की ईमानदारी (Washerman’s Honesty)

    धोबी की ईमानदारी (Short inspirational story on Washerman’s Honesty) घटना शुक्रवार 10 जुलाई 2015 की है। मैने अपनी पेंट की जेब में 5 हजार रूपये रखे थे। दूसरे दिन सुबह घर से आॅफिस जाते समय दूसरी पेंट पहन ली और जिस पेंट में रूपये थे, घर पर छोड़ दिया। उसी दिन पत्नी ने उस पैंट को धुलवाने के लिये धोबी […]

  • hero alom हीरो अलोम – इच्छाशक्ति की जीत

    हम अपने आसपास कई बार बहुत ही साधारण व्यक्तित्व, आर्थिक रूप से कमजोर, पारिवारिक परेशानी से जूझने वाले और अल्प शिक्षा प्राप्त लोगों को देखते हैं जो कि विपरीत परिस्थितयों के बावजूद अपनी मेहनत, दृढ इच्छाशक्ति से सफलता का मुकाम हासिल करके सबको अचंभित करते है। ऐसे लोग हम सब के लिए प्रेरणा के स्त्रोत होते हैं। यहां हम बात […]

  • harish chandra हमारे वैज्ञानिक: हरीश चंद्र (Harish Chandra)

    डा. हरीश चंद्र (Dr. Harish Chandra) समकालीन पीढ़ी के अद्वितीय गणितज्ञों में से एक थे। उन्होने अनंत आयामी समूह प्रतिनिधित्व  के सिद्धान्त (Representation Theory) को अपने शोध के द्वारा गणित और फिजिक्स के महत्वपूर्ण शाखा में विकसित किया। उनका जन्म 11 अक्टूबर 1923 में कानपुर में हुआ था। माता जी का नाम सत्यगति सेठ व पिता जी का नाम चन्द्रकिशोर […]

  • tea health चाय और हमारा स्वास्थ्य

    चाय और हमारा स्वास्थ्य Impact of Tea in our Health in Hindi क्या आप जानते हैं कि 200 वर्ष पहले भारतीय घरों में चाय नहीं होती थी। परन्तु आज चाय हमारे देश की सभ्यता का आवश्यक अंग बन गई है। घर आये मेहमान का स्वागत बिना चाय के अधूरा सा लगता है। जिस चाय से अधिकांश लोगों को इतना अधिक […]

  • jokar अपने आपको जोकर न बनायें

    आप सबको खुश नहीं रख सकते You cannot make everyone happy मित्रों कभी न कभी तो आप सर्कस गये ही होंगे। वहां लोगों को हंसाने-गुदगुदाने के लिए एक पात्र आता है-जिसे जोकर (joker) कहते हैं। जो अपने चेहरे को अजीब से रंगो और मुखेटे से ढके रहता है। मुझे लगता है जोकर ही वह किरदार है जिसमें हर किसी को […]

  • kadamtal स्वाभिमान (Self Respect)

    स्वाभिमान (Self Respect) Motivational Story of Hazrat Umar in Hindi एक बार हज़रत उमर अपने नगर की गलियों से गुज़र रहे थे, तभी उन्हें एक झोपड़ी से एक महिला व बच्चों के रोने की आवाज़ सुनाई दी। वे रुके, फिर जिज्ञासवश झोपड़ी के भीतर झांक कर देखा तो पाया कि एक महिला अपने रोते हुए चार बच्चोें को चुप करा रही […]

12 thoughts on “विदेशों में राम-कथा (Story of Ram in the World)

    1. श्रीराम का नाम सर्वव्यापी है। बस उसको हमे अपने मन में ग्रहण करना है।

  1. सभी देशवासियों हो दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*
*