मुस्लिम युवक की युक्ति से गाय की प्राण-रक्षा

मुस्लिम युवक की युक्ति से गाय की प्राण-रक्षा
Muslim youth save cow in Hindi

Muslim youth save the life of cow in Hindi

मुसलमान युवक (muslim youth) और गाय (cow) के प्रति उसकी दया की यह सच्ची घटना जुलाई सन् 2015 के अन्तिम सप्ताह की है, मैं अपने पति के साथ कुछ आवश्यक खरीदारी के लिये बाजार निकली। मुहल्ले की गली से होकर हम गुजर रहे थे। एक नाले के पुल के पास कुछ लोगों को इकट्ठा देखकर हमें भी कोतूहल हुआ। वहां पहुंचकर हम ठिठक गये। मेरी तो सांस ही रुक-सी गई। हमने देखा कि एक गाय (cow) नाले के पुल के पास बिजली के नंगे तारों के बीच फंसकर जीवन के लिए संघर्ष कर रही थी। ऐसा लग रहा था कि उसके प्राण अब निकले तब निकले।

उपस्थित लोग करंट फैले होने के कारण पास जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे। मैं सजल नेत्रों एवं भरे हृदय से उन गोमाता की प्राणरक्षा के लिए निमित्त प्राणदाता प्रभु से प्रार्थना करने लगी।

भीड़ धीरे-धीरे बढ़ती जा रही थी। अपनी-अपनी बुद्धि के अनुसार लोग तरह-तरह के उपाय सोच रहे थे। उधर गाय पल-प्रतिपल सुस्त पड़ती जा रही थी।

अचानक भीड़ में से एक युवक चिल्लाया कि आप लोग तनिक ठहरिये, मैं रस्सा लेकर आता हूँ। इतना कहकर वह भागता हुआ गया और एक मोटा रस्सा और लकड़ी का फट्टा लेकर उपस्थित हुआ। गाय (cow) के सम्मुख कुछ इंटे फैंकी गयी। उन इंटों के ऊपर उस फट्टे को रखा गया। उस युवक ने अपनी जान की प्रवाह न करके फट्टों पर से चलकर गाय के सम्मुख पहुंचा। उसने जुगत लगाकर गाय के एक पांव पर रस्सी बांध दी। फिर उपस्थित लोगों ने मिलकर उस रस्सी से गाय को खींच कर करंट के क्षेत्र से बाहर निकाल लिया।

कुछ ही देर में गाय धीरे-धीरे उठकर चलने लगी। हम सबकी जान-मे-जान आयी। उपस्थित लोगों की बातों से पता चला कि यह मुस्लिम युवक (muslim youth)  है। गाय को सर्वप्रथम उसी ने देखा, लोगों का इकट्ठा किया और अन्ततः उसी की युक्ति से गाय की प्राणरक्षा भी सम्भव हो सकी। धन्य है प्रभु की कृपा। धन्य है वह मुस्लिम युवक (muslim youth) और धन्य है उसकी मानवता (humanity)।

वह अपने इस सद्कर्म करने के बाद वहां से चला गया जैसे कि कुछ हुआ ही न हो। वहां उपस्थित सभी लोग उसकी खुले दिल से तारीफ कर रहे थे जिसने अपनी जान को जौखिम में डालकर गाय की प्राण रक्षा की। आजकल के आम परिपेक्ष में cow and Islam को लेकर भी वहां उपस्थित लोग कभी देर तक चर्चा करते रहे।

प्रेषक: सुषमा, गाजियाबाद

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