केदारेश्वर बनर्जी | Great Indian Scientist

केदारेश्वर बनर्जी | Great Indian Scientist in Hindi

प्रोफेसर केदारेश्वर बनर्जी ने भारत में एक्स-रे क्रिस्टेलोग्राफिक (X-ray Crystallographic) (धातु के परमाणु और आणवीक संरचना का अध्ययन क्रिस्टेलोग्राफी कहलाती है) अनुसंधान की नींव रखी। बनर्जी प्रथम पंक्ति के वैज्ञानिक होने के साथ-साथ आकर्षक व्यक्तित्व, दयालु, स्नेही और पक्के इरादों वाले कर्मठ व्यक्ति थे।

Prof. Kedareswar Banerjee का जन्म 15 सितम्बर 1900 सथल (पबना), विक्रमपुर, ढाका (अब बंग्लादेश) में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनकी स्कूली शिक्षा ढाका में हुई। आगे की पढाई के लिए वे कलकत्ता चले गये जहां से उन्होनें विज्ञान के क्षेत्र में डाॅक्टरेट की डिग्री हासिल की। उन्हें 1930 में कलकत्ता विश्वविद्यालय द्वारा D.Sc की उपाधि से सम्मानित किया गया। उन्होने प्रोफसर सी.वी. रमन (Prof. C.V. Raman) के साथ शोध कार्य किया।

1924 तक, जब केवल कुछ क्रिस्टल संरचनाओं का ही दुनियाभर में निर्धारण हो पाया था, तब बनर्जी ने क्रिस्टलीय नेफथलीन और एनथरेसिन (naphthalene and anthracene) की परमाणु संरचना का निर्धारण करके पूरी दूनिया का ध्यान अपनी तरफ खींचा था।

1933 में Kedareswar Banerjee ने क्रिस्टेलोग्राफिक चरणों में होने वाली समस्याओं के समाधान के लिए अपना एक नया दृष्टिकोण का प्रस्तुत किया, जिसने न केवल उस समय इस्तेमाल होने वाली ट्राइल और इरर विधि से आगे की तरफ देखा गया वरन आधुनिक युग की अत्यन्त शक्तिशाली प्रत्यक्ष क्रिस्टलोग्राफी विधि का भी आगाज हुआ।

क्रस्टिलोग्राफी के विकास में प्रो. केदारेश्वर बनर्जी द्वारा 1933 में किया गया शोध बाद में प्रो. हरबर्ट हैपमैन और कारले (Hebert A.Hauptman and  Jerome Karle) को 1985 में मिले रसायन विज्ञान के लिए नोबल पुरस्कार की नींव बना। उनके मौलिक पेपर मे लिखित प्रत्यक्ष विधि का उल्लेख नोबल पुरस्कार विजेता जेरोम कार्ल (Jerome Karle) ने अपने भाषण में काफी सम्मान के साथ किया था।

वे 1934-43 तक ढाका विश्वविद्यालय में भौतिकी मे रीडर के पद में कार्यरत रहे।

1943-52 तक इंडियन एसोसिएशन फाॅर कल्टिवेशन आॅफ साइंस, कोलकाता में फिजिक्स के प्रोफेसर के पद पर कार्य किया।

1952-59 तक वे इलाहाबाद विश्वविद्यालय में फिजिक्स डिपार्टमेंट के एचओडी रहे।

वे 1959-65 में अपनी सेवा अवकाश तक इंडियन एसोसिएशन फाॅर कल्टिवेशन आॅफ साइंस में डायरेक्टर के पद पर विराजमान रहे।

उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय में काँच, बहुलक (पाॅलीमर) और अमाॅफिस पदार्थो पर कार्य किया जो बाद में बेहद महत्वपूर्ण पदार्थ सिद्ध हुए। उसके बाद ही एक्सरे डिफ्रेक्शन का प्रयोग डीएनए की संरचना जानने के लिए किया गया। इस कार्य के लिए प्रसिद्ध वैज्ञानिक वाटसन और क्रिक (Watson and Crick) को 1962 में मेडिसन के क्षेत्र में नोबल पुरस्कार दिया गया।

संरचनात्मक एक्सरे क्रिस्टलोग्राफी के अलावा भी प्रो. केदारेश्वर बनर्जी ने क्रिस्टल फिजिक्स के व्यापक क्षेत्र में अनुसंधान किया। क्रिस्टल आॅपटिक्स के कुछ शोधों पर तो उन्हें अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त हुई।

सम्मान और पुरस्कार

बनर्जी भारतीय विज्ञान अकादमी और राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी (NASc) के फैलो चुन गये।

वे 1947 में भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भौतिक विज्ञान समूह के अनुभागीय अध्यक्ष रहे।

1948 में क्रिस्टलोग्राफी के अंतर्राष्ट्रीय संघ की महासभा के उद्घाटन सम्मेलन में उनको सम्मानित अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था।

वह 1947-1951 के दौरान यूनेस्को के नेशनल कमीशन आॅफ काॅरपोरेशन के सदस्य थे।

1953-1956 के दौरान योजना आयोग के वैज्ञानिक सलाहकार समिति के सदस्य और समीक्षा समितियों और कई राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं के सलाहकार बोर्ड के सदस्य रहे।

1958-1960 के दौरान राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी के उपाध्यक्ष और 1967 में अध्यक्ष रहे।

इलाहाबाद यूनिर्वसिटी ने सन् 2000 में उनके नाम पर वायुमंडली और समुद्र विज्ञान केंद्र की स्थापना की।

भारत में विज्ञान की उन्नति में उनका सबसे महत्वपूर्ण योगदान यह रहा कि वे जहां भी गये उन्होंने रिसर्च के लिए स्कूलों को खोलने में योगदान किया जिससे ऊर्जावान रिर्सचर आगे आ सके और उनकी अनमोल वैज्ञानिक परंपरा को आगे बढाने वाली नई पीढी तैयार हुई।

Prof. Kedareswar Banerjee ने अपनी अतिम सांस 30 अप्रैल, 1975 को कोलकाता के उपनगर बारासात में ली।

पूरी लिस्टः Indian Scientist – भारत के महान वैज्ञानिक


आपको यह जीवनी केदारेश्वर बनर्जी | Great Indian Scientist in Hindi  कैसी लगी, कृप्या कमेंट बाक्स पर साझा करें।

आपके पास यदि Hindi में कोई motivational inspirational article, story, essay है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ kadamtaal@gmail.com पर E-mail करें. हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ प्रकाशित करेंगे|

Random Posts

  • pyar ka pradasan सुनहरे बालों वाली लड़की – प्यार का प्रदर्शन

    सुनहरे बालों वाली लड़की – प्यार का प्रदर्शन एक काॅलेज में एक लड़का पढ़ता था। संगीत के प्रति उसकी दीवानगी थी। पैसे के अभाव में वह अपनी पसंद का एक गिटार नहीं खरीद पा रहा था। उसका सपना था कि जब वह पढ़-लिखकर अच्छी नौकरी प्राप्त करेगा तो एक दिन वही गिटार जरूर खरीदेगा। उसी काॅलेज में एक अतिसुंदर लड़की […]

  • Hindi story अन्याय का कुफल

    अन्याय का कुफल | Hindi Story on Impact of Injustice यह दो व्यापारी मित्रों की हिंदी स्टोरी (Hindi story) है। एक का नाम था धर्मबुद्धि, दूसरे का दुष्टबुद्धि। वे दोनों एक बार व्यापार करने विदेश गये और वहाँ से दो हजार अशर्फियाँ कमा लाये। अपने नगर में आकर सुरक्षा के लिये उन्हे एक वृक्ष के नीचे गाड़ दिया और केवल […]

  • sune pahad सूने पहाड़-मेरा संस्मरण

    सूने पहाड़-मेरा संस्मरण अभी कुछ दिनों पहले ही मैं अपने ननिहाल गया। लगभग 14 साल बाद। नानी की मृत्यु के बाद बस जाना ही नहीं हुआ। मेरी माताजी सिर्फ दो बहने हैं। मामा न होने के कारण किसके यहां ठहरने की उधेड़बुन में बस समय बीतता ही चला गया। बचपन की यादों का दौर जैसे चलचित्र की भांति आंखों के […]

  • arjun राजकुमार सुधन्वा और अर्जुन (Sudhanva and Arjun War)

    राजकुमार सुधन्वा और अर्जुन Story of war between Rajkumar Sudhanva and Arjun in Hindi राजकुमार सुधन्वा (Sudhanva) चम्पकपुर के नरेश हंसध्वज का छोटा पुत्र था। वह जितना महान शूरवीर था, उतना ही महान ईश्वर भक्त भी था। महाभारत युद्ध के पश्चात धर्मराज युधिष्ठिर ने अश्वमेघ यज्ञ किया। घोड़े के पीछे अर्जुन के नेतृत्व में सेना विजय-यात्रा कर रही थी। किसी भी राजा का […]

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*
*