हमारी अच्छी सोच-मन की खुशी एवं मन की शान्ति

हमारी अच्छी सोच-मन की खुशी एवं मन की शान्ति
Hamari aachi soch man ki khushi man ki shanti

hamari soch

हम अभी इस बात से अनभिज्ञ हैं कि भाग्य क्या है। हमारा luck हमारी thinking पर निर्भर करता है। बहुत महत्वपूर्ण है हमारी अन्दर चल रहे विचारों की और मन की बात। उन विचारों को समझना, गलत विचारों को रोकना है और अच्छे विचारों को ही स्थान देना है। किसी के द्वारा हमारे साथ किए गए गलत व्यवहार के लिए, हमारे मन में बदले या नफरत के, द्वेष इत्यादि के उठे विचारों को तुरन्त रोक कर, अपने विचारों में दूसरे के प्रति क्षमा भाव जागृत करना है।

हमारे विचारों में सत्य को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। सत्य ही ईश्वर है। स्वार्थ, द्वेष, नफरत, दुश्मनी, अंहकार, क्रोध, ईष्र्या, बाहरी जगत की जरूरतों की अत्याधिक लालसा इत्यादि वाले विचारों से दूरी बनाने का प्रयास करना है।

हमें यह जान लेना है कि विचार मैं ही बनाता हूँ और मैं ही उन विचारों को समाप्त कर सकता हूँ। दूसरे क्या सोचते हैं इसकी चिन्ता मुझे नहीं करनी है। मुझे अपने पर ध्यान देना है। मेरी सोच / मेरे संस्कार / मेरी आदतें मेरे विचारों द्वारा निर्मित होते हैं। मैं ही इन्हें नियंत्रित कर सकता हूँ। मेरी आदतें/मेरे संस्कार ही मेरे व्यक्त्वि का आधार हैं।

मेरी सोच के द्वारा किए गए कार्य के फलस्वरूप मेरा भाग्य बनता है। मैं गलत सोच के कार्य करूंगा तो मेरा भाग्य भी अंधकारमय हो जाएगा। परनिंदा से बचना है। बहस से बचना है। बहस से अंहकार उत्पन्न होता है। बीती बातों को याद करना, अपने सुखे धावों को कुरेदने के समान है। हमारे विचार बाहरी जगत की सूचनाओं, परिथितियों एवं मान्यताओं पर केन्द्रित होते हैं। दूसरे क्या सोचते हैं इसकी चिंता मत करो मैं क्या सोचता हूँ वही महत्वपूर्ण है।

मन की खुशी क्या है। खुशी मेरे अन्दर है उसे मुझे किसी से लेने या खरीदने कहीं जाना नहीं पड़ता। हमारी कोई जरूरत पूरी होती है तब मन प्रसन्न हो जाता है। मन की खुशी कार्य की सम्पन्नता से भी होती है। हमारा मन हमेशा प्रसन्न जब ही रह सकता है जब हमारे विचार/हमारी सोच एक सही दिशा में ही कार्यवान्वित हो रहे हो।

अच्छी सोच-अच्छे कर्म-अच्छा भाग्य यही सिद्वान्त है, जो सृष्टि के कार्यों के संचालन में मदद करता है। हमारी सोच/मान्यताओं के आधार पर हमारे जीवन के अधिकांश फैसले निर्भर होते हैं।

Also Read :भूल सुधार एवं क्षमा करना


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