गलत मान्यतायों का तिरस्कार हो

गलत मान्यतायों का तिरस्कार हो

कई पुरानी मान्यतायें हमें जीवन से, मूल सिद्वांत से भ्रमित कर देती हैं या हमारे भाग्य में पाप अनजाने में बढा़ देती हैं। दहेज भी ऐसी एक मान्यता रही जो कि अब काफी हद तक कम हो गई है। इस मान्यता की वजह से गरीब घर की कई लड़कियां तो पूरी जिन्दगी कुंवारी ही रह जाती थीं। अभी एक मान्यता या बुरी सोच जिसके कारण अभी भी भारत में बहुत से घर बर्बादी के कगाार पर खड़े हैं। वह है किसी खुशी या गम के मौके पर शराब का प्रचलन। शराब एक ऐसी सोच/आदत है जिससे कितने व्यक्ति कम आयु में ही अपने जीवन से हाथ धो लेते हैं और उनकी पत्नियों और बच्चों को जीवन काफी कष्ट में गुजारना पड़ता है। एक मान्यता या आदत जो चली आ रही है सास (mother in law) की साम्राज्यवादी नीतियों की है। आने वाली बहु को सास के कथनानुसार उस घर की हर पुरानी मान्यताओं को मानना पड़ता है। नहीं मानने पर घर में अशान्ति रहने लगती है। इसी संदर्भ में परनिंदा भी बहुत की जाती है जो भाग्य पर असर डालती है।

अपने बच्चों से कार्य करवाना एक अच्छी आदत है जिससे से वह अपने पैरों पर खड़े होने की क्षमता बनायें परन्तु इसी की आड़ में कई शराबी पिता अपने बच्चों से शराब भी मंगवाते हैं और बच्चों को एक गलत वस्तु से अवगत कराते हैं। इसी प्रकार बीड़ी-सिगरेट मंगवाना भी एक गलत सोच है। यह बच्चों में गलत सोच का बीज बोती है। फिल्म र्निमाता समाज को अच्छाई देने का काम करते हैं परन्तु अपने लाभ के चक्कर में वे फिल्मों में महिलायों के अश्लील सीन दिखा कर नौजवानों और बच्चों को बहुत कम उमर में ही कामुकता से परिचय करा देते हैं। इस प्रकार कमजोर सोच के नौजवान या बच्चे गलत रास्ते पर चलने लगते हैं।

इसी प्रकार कई अच्छी मान्यताओं का प्रभाव कम होता जा रहा है। पुराने समय से बड़ों के पैर छुने या चरण स्पर्श के संस्कार अब बहुत कम या लुप्त होते जा रहे हैं। चरणस्पर्श करके हम बड़ों को आदर सम्मान देते हैं वहीं उनसे अच्छे संस्कार या अच्छे ज्ञान को भी पाते हैं। आज नेताओं से काम निकलवाने या उनकी जी हजुरी में भी यह सब हो रहा है।

हिंदू समाज में आज भी पंडितों का आदर सत्कार किया जाता है। परन्तु ऐसा करने वालों की संख्या कम होती जा रही है। आज अधिकांश लोग किसी परिजन की मृत्यु या जन्म इत्यादि पर ही याद करते हैं और उसमें भी केवल औपचारिकता ही निभाई जा रही है। उसी प्रकार पंडित में भी उतने ज्ञानी नहीं रह गए हैं। यह एक हिन्दूत्व विचारधारा की बहुत बड़ी पराजय है या अच्छे संस्कारों की हार या कमी हुई है। क्योंकि बहुत से अच्छे संस्कारों की प्राप्ति तो हमें उन्हीं से ही होती है।

आज परिवार टूटते जा रहे हैं जिससे घर के बुर्जुग अपने अनुभवों का लाभ आने वाली पीढ़ी को नहीं दे पा रहे हैं। इस प्रकार भी अच्छे संस्कारों का पतन हो रहा है। आधुनिकतावाद ने आज के बच्चों को और नौजवानों को मोबाइल, लैपटाप, कम्प्युटर, टेलीविजन इत्यादि अनेकों वस्तुओं में ही लिप्त कर दिया है इससे आज की पीढ़ी समाज से दूरी बना कर चल रही है। इससे समाज में स्वार्थ के संस्कारों का बोल-बाला हुआ है। धन की लालसा बड़ी है इन वस्तुओं की मांग बढ़ गई पैसा है या नहीं मोबाइल तो होना ही चाहिए और वह भी ऐसा जिसमें ज्यादा से ज्यादा फिचर्स हों। पैसे की भूख बढ़ने से, समाज में, एक-दूसरे से आगे बढ़ने की होड़ में, आज दोस्ती-मित्राता या संबन्धों के अस्तित्व को खतरा उत्पन्न हो गया है। इस प्रकार भी संस्कारों का पतन हो रहा है। पढ़ाई में किताबी ज्ञान जरूर बढ़ा है वैज्ञानिक ज्ञान की वृद्वि हुई है। हमारे सुविधाओं के साज समान बहुत आसानी से मिल रहे हैं। पर मन की खुशी कम या कह सकते हैं गायब हो रही है। क्यों? भागमभाग हैै कहाँ जाना है किसी को पता नहीं परन्तु बस यह लग रहा है एक दौड़ चल रही है जिसमें मैं पीछे न रह जाऊं।

इस दौड़ का असर सबसे अधिक आने वाली पीढ़ी पर पड़ रहा है। शिशुुकाल से ही बच्चे को टेलिविजन के आगे बिठा दिया जाता है। बड़ों की दौड़ से, बच्चों को दिए जाने वाले संस्कारों, की भी गुणवत्ता घट रही है। सांइस ने बेशक बहुत तरक्की कर ली हो परन्तु हमारे संस्कारों में गिरावट ने हमारे भाग्य को ही बदल दिया है। एक दिखावटी व्यक्तिव के मालिक हैं हम आज। आज सफलता हासिल करने का एक भूत सवार हो गया है आज के कुछ नौजवानों में, उस के लिए वे किसी भी हद तक अच्छे संस्कारों की बलि चढ़ाने से भी नहीं हिचकिचाते हैं।

संस्कारों का पतन, हमारे दैनिक जीवन के, लगभग हर पहलू में, देखने को मिल जाता है। इसका एक उदाहरण रिश्वत भी है। दूसरा है नेताओं का बढ़बोलापन। नेताओं ने तो कुर्सी के अंहकार में, जनता में अच्छाई की जगह बुराई का साम्राज्य स्थापित कर दिया है। हमारे हजारों अच्छे व बुरे संस्कारों में से बहुत कम उदाहरण देकर, सिर्फ यह समझाने का प्रयास किया है कि संस्कारों के पतन या गिरावट ने संसार में, पाप को बढ़ावा दिया है। संसार में आपसी रंजिश बढ़ी है। नफरत बढ़ी है। आपसी प्रेम कम हुआ है। तनाव बढ़ा है। शान्ति कम हुई है। खुशी जीवन में कम हुई है। मनुष्य के जीवन का असली लक्ष्य खुशी और शान्ति ही हैं। पर मिल क्या रहा है? तो ऐसे मनुष्य जीवन का क्या फायदा, जिसके लिए, 84 लाख योनियों को भोगने के बाद भी न खुशी मिली न शान्ति मिली। इस सब के लिए दोषी कौन है। दोषी हैं वे हमारे विचार / संस्कार / आदतें जिनके कार्य परिणाम स्वरूप हमारा भाग्य बना। अतः अभी भी सम्भलने का समय है। हम अपने बुरे विचारों को रोकें और अच्छे संस्कारों को अपनायें। पुरानी मान्यतायें जिन से हमारा या समाज का नुकसान हो रहा है। उनको समाप्त किया जाए एवं ऐसी अच्छी मान्यतायें जिनसे समाज का उद्धार हो रहा था। उनको उजागर किया जाए।

Also Read : नैतिक शिक्षा की अनिवार्यता


आपको यह कहानी सच्चाई हर जगह चलती है Truth is everywhere, short motivational story of Chittaranjan Das in Hindi  कैसी लगी, कृप्या कमेंट बाक्स पर साझा करें।

आपके पास यदि Hindi में कोई article, story, essay, poem है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ kadamtaal@gmail.com पर E-mail करें. हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ प्रकाशित करेंगे|

Random Posts

  • Bharat Ke Mahan Vaigyanik अनिल कुमार गयेन | Bharat Ke Mahan Vaigyanik

    अनिल कुमार गयेन | Bharat Ke Mahan Vaigyanik Our Scientist अनिल कुमार गयेन (Anil Kumar Gain) का जन्म 1 फरवरी 1919 में हुआ था। उनके माता-पिता लक्खी गांव, पूर्वी मिदनापुर के निवासी थे। उनके पिता जी का नाम जिबनकृष्ण और माताजी का नाम पंचमी देवी था। जब वे काफी छोटे थे तभी उनके पिताजी का निधन हो गया। परिवार का […]

  • लघु हिंदी कहानी बंदर और मछली | स्वर्ग और नरक two short moral stories

    बंदर और मछली | स्वर्ग और नरक छोटी-छोटी कहानियाँ भी हमें बहुत बड़ी सीख दे जाती हैं। नीचे दो लघु हिंदी कहानियाँ (short hindi story) दी गयी हैं – पहली हिन्दी कहानी बंदर और मछली की है जो कि दोस्तों को लेकर हमें सचेत करती है तथा दूसरी लघु हिंदी कहानी मिलजुल कर रहने में ही भलाई है, इस तथ्य को समझाती है।  […]

  • failure quotes hindi असफलता पर अनमोल विचार

    असफलता पर अनमोल विचार Failure Quotes in Hindi  हर व्यक्ति को खुले दिल से विफलता  (failure)को स्वीकार करना चाहिए। हम विफलता से ही सीखते हैं। दुनिया के सफलतम लोगों को विफलता जैसे कठिन मार्ग ने ही राह दिखाया है।  कभी भी सफलता को अपने दिमाग पर हावी मत होने दो तथा विफलता को दिल से मत लगाओ। Never let success […]

  • sudha chandran सुधा चन्द्रन – यह मेरे सपने हैं

    सुधा चन्द्रन – यह मेरे सपने हैं Inspirational Story of Sudha Chandran (Classical Dancer and Actor) who win the race of success without a leg in Hindi बहुत कम ऐसे लोग देखने में मिलते हैं जिनके जीवन में त्रासदी होने पर भी वे आगे बढ़ने का हौसला नहीं खोते हैं तथा सफलता (success) का उच्च मुकाम हासिल करके सबको अचंभित करते हैं। […]

One thought on “गलत मान्यतायों का तिरस्कार हो

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*
*